केंद्र सरकार राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्' के लिए भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' के सम्मान की तरह ही नियम बनाने का विचार कर रही है. इस महीने की शुरुआत में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस बारे में चर्चा हुई है. 'वंदे मातरम' को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, जो स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एक बड़ा नारा बनकर उभरा था. संविधान सभा ने इसे राष्ट्रगान के बराबर सम्मान देने की बात कही थी. लेकिन वर्तमान में इसे गाने को लेकर कोई अनिवार्य मुद्रा या नियम नहीं हैं.
क्या हो सकते हैं नए नियम?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्रालय की ओर से बुलाई गई इस बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने चर्चा की कि क्या राष्ट्रगीत के लिए भी निर्देश तय किए जाने चाहिए.
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- राष्ट्रगीत को किन परिस्थितियों में गाया जाना चाहिए?
- क्या इसे राष्ट्रगान के साथ गाना अनिवार्य किया जाए?
- अपमान पर सजा या जुर्माना लगाया जाए?
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बता दें, अभी राष्ट्रगान के सम्मान को लेकर संविधान के अनुच्छेद 51A(a) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्य का जिक्र किया गया है. राष्ट्रगान के अपमान पर 3 साल तक की जेल का प्रावधान है. लेकिन राष्ट्रगीत के लिए फिलहाल ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है.
जब संसद में हुई तीखी बहस
हाल के वर्षों में, राजनीतिक और ऐतिहासिक बहसों में वंदे मातरम का मुद्दा तेजी से बढ़ा है. संसद के शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी. इसमें गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर वंदे मातरम की शान को दबाने का आरोप लगाया. भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस ने 'तुष्टिकरण की राजनीति' के चलते 1937 में इस गीत के अहम छंदों को हटा दिया था.
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दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि BJP इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है और उसने पश्चिम बंगाल चुनावों को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय गीत पर चर्चा के लिए समय निकाला.