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फिलीपींस के बाद भारत को मिला ब्रह्मोस मिसाइल का नया खरीदार, डील हुई फाइनल

Brahmos Missile Deal: भारत का डिफेंस सिस्टम किसी भी तरह से अपने देश की रक्षा करने में सक्षम है. पड़ोसी देशों की नीयत को देखते हुए भारत ने सुरक्षा बेड़े में कई सिस्टम ऐड किए हैं. इन्हीं में से एक ब्रह्मोस मिसाइल भी है. भारत की इस मिसाइल को अब दूसरा खरीदार भी मिल गया है.

Photo Credit- News24GFX

Brahmos Missile Deal: पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सुपरसोनिक क्रूज ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया था. पाकिस्तानी एयरबेस पर कई मिसाइलें दागी गईं. भारत का ये पाकिस्तान के आतंकी हमलों का जवाब था. यह मिसाइल फिर से सुर्खियों में आ गई है. इस मिसाइल का नाम दो नदियों के नाम पर रखा गया है. कुछ साल पहले भारत ने फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा किया था. अब भारत को ब्रह्मोस के लिए एक नया खरीदार मिल गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडोनेशिया के साथ इसकी डील को लेकर लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं.

इंडोनेशिया के साथ हुआ सौदा

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का सौदा होना है. इसके लिए लगभग सभी काम पूरे किए जा चुके हैं. कहा जा रहा है कि अभी केवल रूसी पक्ष की मंजूरी मिलने का इंतजार है. जैसे ही रूस से मंजूरी मिलेगी, डील फाइनल कर दी जाएगी.

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भारत के साथ इंडोनेशिया की इसको लेकर जनवरी में बात हुई थी. बता दें कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान समेत कई भारतीय सैन्य नेता इंडोनेशिया पहुंचे थे.

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फिलीपींस के साथ हुआ 3500 करोड़ का सौदा

भारत-पाकिस्तान के संघर्ष में पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया गया था. तभी से भारत के डिफेंस सिस्टम की हर तरफ चर्चा होने लगी. साल 2022 में फिलीपींस के साथ भी भारत ने 3500 करोड़ का सौदा किया. इसके साथ ही भारत ने फिलीपींस को लॉन्चिंग और जरूरी प्रणाली भी दी थी. कई देशों ने ब्रह्मोस मिसाइल में अपनी दिलचस्पी दिखाई है.

भारत और रूस की साझेदारी

भारत और रूस ने मिलकर इस रक्षा प्रणाली को बनाया है। इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा नदी और रूस की मॉस्को नदी से लिया है. इसे भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने रूस के साथ मिलकर बनाया गया है. इस मिसाइल को पानी, हवा और जमीन से लॉन्च किया जा सकता है. इंडोनेशिया के साथ डील होने पर अन्य देशों की भी ब्रह्मोस के लिए दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है.

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