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'बदलूराम का बदन…', क्यों वायरल हुआ ये गाना, क्या है इसके पीछे की कहानी और असम रेजिमेंट से कनेक्शन?

Assam Regiment Video: असम रेजीमेंट के जवान अपने रेजिमेंटल सॉन्ग बदलूराम के बदन पर थिरके तो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. 20 जनवरी को परेड की रिहर्सल के दौरान जवानों ने इस गाने पर डांस किया और इस गाने को रेजिमेंटल सॉन्ग बनाने के पीछे की कहानी भी उन्होंने बताई.

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रिपब्लिक डे परेड की रिहर्सल में गाने पर थिरके थे जवान.

Assam Regiment Viral Video: दिल्ली में आज कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में असर रेजिमेंट के जवान भी मार्च पास्ट करेंगे. इससे पहले 20 जनवरी को हुई रिहर्सल में असम रेजिमेंट के जवान एक गाने पर खूब थिरके, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. गाने के बोल हैं- बदलूराम का बदन और यह गाना रेजिमेंट का रेजिमेंट्ल सॉन्ग है, लेकिन इस गाने का मतलब क्या है? इसके पीछे की कहानी क्या है? यह गाना इतना खास क्यों है? आइए इन सवालों का जवाब जानते हैं…

द्वितीय विश्व युद्ध से है गाने का कनेक्शन

बता दें कि परेड की रिहर्सल के दौरान रेजिमेंट के इंस्ट्रक्टर ने माहौल को हल्का करने के लिए जवानों को एक गाना गाने को कहा तो जवानों ने बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है… गाना शुरू कर दिया और तालियां बजाते हुए थिरकने लगे. इस गाने के पीछे की कहानी इतिहास के पन्नों में छिपी है. इसकी कहानी के तार रेजिमेंट की बहादुरी और द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े हैं. वहीं यह गाना एक सच्चे और बहादुर जवान राइफलमैन बदलूराम की याद में लिखा और कंपोज किया गया था.

जापानी सेना से लड़ाई में हुए थे शहीद

बता दें कि असम रेजिमेंट ब्रिटिश इंडियन आर्मी की पहली बटालियन थी और बदलूराम उस रेजिमेंट के जवान थे. दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश भारतीय सेना और जापान की सेना का टकराव हुआ था, उस दौरान मोर्चे पर बदलूराम तैनात थे, जो युद्ध में शहीद हुए. जब तक वे तैनात रहे, जापान की सेना भारतीय क्षेत्र में घुस नहीं सकी, लेकिन उनकी शहादत के बाद जापान की सेना ने कोहिमा को घेर लिया, जिस वजह से ब्रिटिश इंडियन आर्मी को सप्लाई का लाइन कट गई, जिसके कारण जवानों तक खाना नहीं पहुंच सका.

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बदलूराम का राशन बना ‘संजीवनी’

कोहिमा के दुर्गम पहाड़ी इलाके और जापानी सेना की एंट्री एयरक्राफ्ट गन ने एयरड्रॉप सप्लाई भी बाधित कर दी थी. इन मुश्किल हालातों में शहादत के बाद भी बदलूराम फरिश्ता साबित हुआ. कंपनी उनका नाम राशन लिस्ट से हटाना भूल गई और उनके नाम का राशन जमा होता रहा, जो कोहिमा में जापानी सेना की घेराबंदी में कैद जवानों के लिए वरदान साबित हुआ. इस राशन ने जवानों को भूखा-प्यासा मरने नहीं दिया. बदलूराम की इस न दिखने वाली मदद की याद में 1946 में मेजर पीटी पॉटर ने ‘बदलूराम का बदन जमीन के नीचे है’ गाना लिखा.

बदलूराम की शहादत और अनोखी मदद को यादगार बनाने के लिए इस गाने को रेजिमेंट का रेजिमेंटल सॉन्ग बना दिया गया. शिलॉन्ग में पासिंग आउट परेड में भी रंगरूटों के द्वारा यही सॉन्ग गाया जाता है.

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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