TrendingRepublic DayGold Silver PriceDonald Trump

---विज्ञापन---

बंगाल में ‘बाबरी’ रिप्लिका से 90KM दूर बनेगा अयोध्या जैसा राम मंदिर, विराजेंगे ‘हरे रंग’ के भगवान राम

यह मंदिर श्री कृत्तिवास राम मंदिर ट्रस्ट बना रहा है. मंदिर का शिलान्यास फरवरी में होगा. इस पहल की शुरुआत साल 2017 में की गई थी.

100 करोड़ रुपये खर्च करके यह मंदिर बनाया जाएगा.

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में जहां बाबरी मस्जिद की रिप्लिका बनाई जा रही है, उससे करीब 90 किलोमीटर दूर अयोध्या जैसा राम मंदिर बनाया जाएगा. नदिया जिले के शांतिपुर में 15 बीघा जमीन पर एक बोर्ड लगाकर इसका ऐलान किया गया है. हालांकि, इस मंदिर में भगवान राम की जो मूर्ति लगाई जाएगी, वो अयोध्या वाले मंदिर से अलग होगी. इसमें 14वीं शताब्दी के बंगाली कवि कृत्तिवास ओझा रचित 'कृत्तिवासी रामायण' में भगवान राम के जिस रूप का जिक्र किया गया है, वैसी मूर्ति लगाई जाएगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यह मंदिर श्री कृत्तिवास राम मंदिर ट्रस्ट बना रहा है. मंदिर का शिलान्यास फरवरी में होगा. इस पहल की शुरुआत साल 2017 में की गई थी.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें : नॉनवेज मंगाया तो पछताओगे! अयोध्या में यहां मांसाहार खाने-बेचने पर लगा बैन, डिलीवरी वालों को भी चेतावनी

---विज्ञापन---

अयोध्या जैसा मंदिर, बंगाली संस्कृति की झलक

ट्रस्ट के अध्यक्ष और पूर्व विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने बताया कि यह कोई राजनीतिक कदम नहीं, बल्कि एक धार्मिक और सांस्कृतिक पहल है. उन्होंने बताया कि मुख्य मंदिर अयोध्या के राम मंदिर जैसा ही होगा, लेकिन इसके चारों ओर 15वीं शताब्दी का टेराकोटा डिजाइन होगा, जो इस क्षेत्र की वास्तुकला की विशेषता है.

हरे रंग के होंगे राम

भट्टाचार्य ने कहा कि गर्भगृह में भगवान राम का रंग हरा होगा, जैसा कि कृत्तिवासी रामायण में बताया गया है. उनके साथ माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान भी होंगे. 100 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट में एक रिसर्च सेंटर, डिजिटल हेरिटेज हब और कल्चरल सेंटर भी होगा. मंदिर और मूर्ति का डिजाइन फाइनल कर लिया गया है.

यह भी पढ़ें : बंगाल पहुंचेगा दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, 1026 वर्ष बाद भारत भ्रमण पर निकले ‘सोमनाथ बाबा’

मंदिर कृत्तिवास ओझा के जन्मस्थान फूलिया से महज 100 मीटर की दूरी पर बनाया जाएगा. कृत्तिवास ओझा ने रामायण का बंगाली अनुवाद किया था, जिसे 'श्री राम पांचाली' कहा जाता है. ट्रस्ट ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए साल 2028 तक का लक्ष्य रखा है.


Topics:

---विज्ञापन---