आम आदमी पार्टी क्या अकेले लड़ेगी पांच राज्यों में चुनाव।
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Assembly polls 2023: आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने सोमवार को कहा कि पार्टी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ने के लिए तैयार है और उम्मीदवारों के नामों की घोषणा जल्द की जाएगी। चुनाव आयोग (Election Commission) ने घोषणा की है कि मिजोरम, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव 7 नवंबर से शुरू होकर 19 नवंबर तक अलग-अलग दिनों में मतदान होंगे और वोटों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। चुनाव के लिए आप की तैयारी के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल ने कहा, 'हम राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या उनकी पार्टी INDIA ब्लॉक के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी ? उन्होंने कहा कि जो कुछ भी होगा उससे अवगत कराया जाएगा। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में वर्तमान में कांग्रेस की सरकार है, जो आप INDIA ब्लॉक का एक हिस्सा है।
यह भी पढ़ें : Viral Video: वंदे भारत में चढ़ रहे यात्री का फिसला पैर, RPF जवान ने ऐसे बचाई जानसंजय सिंह और मनीष सिसोदिया के बाद अब पार्टी का काम कौन संभालेगा
आम आदमी पार्टी में सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया के बाद संजय सिंह की गिरफ्तारी को इस लिहाज से बड़ा माना जा रहा है कि अब पार्टी के बड़े काम कौन करेगा। संजय सिंह अरविंद केजरीवाल के तीसरे सबसे खास सहयोगी थे, जिन पर ईडी ने एक्शन लिया है। मनीष सिसोदिया के जेल जाने के बाद संजय सिंह केजरीवाल के सबसे बड़े सहयोगी बनकर उभरे थे। संजय सिंह संगठन का काम करने के साथ ही विपक्षी दलों के साथ बैठक में हिस्सा लेते थे। संसद में सरकार को घेरने की बात हो या पार्टी के लिए स्लोगल व नारे लिखने की बात हो संजय सिंह पार्टी का यह काम करते थे। जब केजरीवाल के पास संजय सिंह, मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन जैसे विश्वस्थ साथी नहीं हैं, ऐसे में पार्टी को आगे लेकर जाने के लिए कौन काम करेगा।
हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। अगर आप इन राज्यों में चुनाव लड़ती है तो उसे बड़े चेहरों की जरूरत होगी, जो पार्टी के ओर से प्रचार करें और चुनावी रणनीति बनाएं। हालांकि पार्टी का कहना है कि इनके पास राघव चड्ढा और भगवंत मान जैसे चेहरे हैं, जो कमान संभालेंगे। लेकिन दूसरी बात यह भी है राघव चड्ढा और भगवंत मान को मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जैसा राजनीतिक अनुभव नहीं हैं। ऐसे में देखना है कि अरविंद केजरीवाल पार्टी को खड़ी करने में किस तरह से जान फूंकते हैं।
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