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Episiotomy क्या है? डिलीवरी के समय महिला की काटी गई स्किन या एपिसियोटॉमी ठीक होने में कितना समय लगता है

What Is Episiotomy For: एपिसियोटॉमी क्यों आवश्यक है, यह क्या होती है और क्यों होती है बता रहे हैं वुमेन्स हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. मुमताज खुर्शीद. डॉक्टर ने बताया एपिसियोटॉमी के बारे में सबकुछ.

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डिलीवरी के समय छोटा ऑपरेशन कैसे होता है? Image Credit - Instagram

Episiotomy Meaning: डिलीवरी के समय एपिसियोटॉमी प्रोसीजर किया जाता है. यह एक तरह का कट होता है जो गुदा और योनि के बीच के हिस्से पर लगाते हैं. इससे डिलीवरी में मदद मिलती है और बच्चे को आसानी से बाहर निकाला जा सकता है. लेकिन, एपिसियोटॉमी ना हो तो क्या होगा और यह इतनी जरूरी क्यों है? इस सवाल का जवाब दे रहे हैं वुमेन्स हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. मुमताज खुर्शी. डॉक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि एपिसियोटॉमी क्या है, कैसे होती है, इसे करना क्यों जरूरी है, एपिसियोटॉमी होने के बाद क्या होता है और महिला को रिकवर (Episiotomy Recovery) होने में कितना समय लगता है.

एपिसियोटॉमी क्या है | What Is Episiotomy

एपिसियोटॉमी एक छोटा सर्जिकल कट होता है जो वजाइना (Vagina) और पेरिनियम यानी योनि और गुदा के बीच के हिस्से में लगता है. यह कट महिला को डिलीवरी के दौरान दिया जाता है. एपिसियोटॉमी इसलिए जरूरी है ताकि योनि से बाहर आने में बच्चे को मदद मिल सके. योनि का आकार छोटा होता है जिस चलते बिना कट लगाए अगर एपिसियोटॉमी की जाएगी तो योनि का कोई भी हिस्सा कट सकता है. इससे डैमेज ज्यादा होता है.

क्या हर किसी को एपिसियोटॉमी की जरूरत होती है?

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गाइनोकोलॉजिस्ट डॉ. सुप्रिया पुरानिक ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्होंने बताया है कि जो महिलाएं डिलीवरी से पहले एक्सरसाइज करती हैं और रेग्यूलर पेरिनियल मसाज करती हैं तो नेचुरल डिलीवरी (Natural Delivery) में एपिसियोटॉमी की जरूरत नहीं पड़ती है.

एपिसियोटॉमी का प्रोसीजर क्या है

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सबसे पहले लोकल एनिसथिशिया दिया जाता है. यह त्वचा को सुन्न यानी नंब कर देता है. इसके बाद छोटा सा कट लगाया जाता है और बच्चा बाहर निकल जाने के बाद इस चीरा लगाए गए एरिया पर टांके लगाए जाते हैं. टांके (Stitches) लगाने पर कटा हुआ हिस्सा ठीक होने लगता है.

कब पड़ती है एपिसियोटॉमी की जरूरत

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  • अगर बच्चे का सिर बड़ा हो और वजाइनल ओपनिंग (Vaginal Opening) छोटी हो.
  • फेटल डिस्ट्रेस यानी जब बच्चे का हार्ट रेट ड्रॉप हो रहा हो और डिलीवरी तुरंत करनी जरूरी हो.
  • डिलीवरी कोम्प्लिकेटड हो या फिर वैक्यूम का इस्तेमाल करने की जरूरत हो.
  • रिजिड पेरिनियम यानी जब टिशूज टाइट हो जाएं और स्किन नेचुरली स्ट्रेच ना हो.

एपिसियोटॉमी के बाद रिकवरी में कितना समय लगता है

7 से 10 दिन में टांके पिघल जाते हैं और ठीक हो जाते हैं. गर्म पानी से नहाना जरूरी होता है और सफाई मेंटेन करना जरूरी है. माइल्ड पेन रिलीवर्स और पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज हेल्प करते हैं.

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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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