Bawasir Ke Lakshan: बवासीर को हेमोरॉइड्स (Hemorrhoids) या पाइल्स (Piles) कहा जाता है. यह ऐसी दिक्कत है जिसमें गुदा के बाहर और अंदर नसें सूज जाती हैं, स्किन की गांठें बनने लगती हैं और खून निकलता है. महिलाओं में भी अक्सर बवासीर की दिक्कत देखी जाती है. मलत्याग करते वक्त अत्यधिक जोर लगाया जाए तो बवासीर हो सकता है. वहीं, लंबे समय से कब्ज हो तो इससे भी बवासीर हो सकता है. बवासीर की दिक्कत बढ़ जाने पर दवाओं के अलावा सर्जरी से इसका इलाज किया जाता है. ऐसे में जरूरी है कि पहली स्टेज में ही यानी बवासीर शुरु होने पर ही इसकी पहचान करके इलाज शुरू कर दिया जाए. यहां जानिए महिलाओं को बवासीर हो जाए तो शरीर पर कौन-कौनसे लक्षण नजर आने लगते हैं.
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महिलाओं में बवासीर के लक्षण | Piles Symptoms In Women | Mahilao Me Bawasir Ke Lakshan
पाइल्स की पहली स्टेज में हेमोरॉइड्स एनल ऑपनिग यानी गुदा के खुलने वाली जगह पर होते हैं. यह छोटी-छोटी सूजी हुई स्किन होती है जिसमें कई बार दर्द नहीं होता है. इस स्टेज में मलत्याग करते हुए खून निकल सकता है. महिलाओं में बवासीर के शुरुआती लक्षण माइल्ड होते हैं और जैसे-जैसे कंडीशन खराब होती है वैसे-वैसे लक्षण ज्यादा गंभीर होने लगते हैं.
- गुदा (Anal) में खुजली महसूस होती है, सूजन आ जाती है और असहजता महसूस होती है.
- मल में खून नजर आता है.
- मलत्याग करते हुए दर्द होता है.
- मल के साथ म्यूकस नजर आता है. कई बार अंडरवियर पर रेक्टम (Rectum) से निकला सफेद डिस्चार्ज दिखाई पड़ता है.
- टॉयलेट से निकलने के बाद फिर से मलत्याग करने की इच्छा होने लगती है.
महिलाओं को बवासीर होने के क्या कारण हैं
प्रेग्नेंसी या प्रेशर बढ़ना – प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के पेल्विक एरिया पर प्रेशर पड़ता है. ऐसे में रेक्टल रक्त धमनियों पर दबाव पड़ता है और बवासीर बनने लगता है.
कब्ज होना – खानपान में फाइबर की कमी और लंबे समय तक चलने वाली कब्ज के कारण बवासीर हो सकता है. कब्ज होने पर मल कड़ा हो जाता है और जल्दी बाहर नहीं निकलता जिसके कारण जोर लगाने पर रेक्टम के अंदर खरोंच लगती है और बवासीर पनपता है.
दस्त लगना – दस्त होने पर बार-बार मलत्याग करने की इच्छा होती है. इससे इरिटेशन बढ़ती है और लंबे समय तक दस्त होने पर हेमोरॉइड्स पनपते हैं.
बहुत देर तक बैठे रहना – अगर महिलाएं बहुत देर तक बैठे रहने वाला काम करती हैं तो इससे हिप्स पर दबाव पड़ता है और ग्लुटियल मसल्स फैलती हैं. इससे छोटी नसें खिंचती हैं और सूज जाती हैं जिससे बवासीर हो जाता है.
उम्र बढ़ना या भारी सामान उठाना – महिलाओं में 50 साल की उम्र के बाद बवासीर ज्यादा देखा जाता है. इसके अलावा, कम उम्र की लड़कियां अगर भारी सामान उठाती हैं या एक्सरसाइज में हैवी लिफ्टिंग करती हैं तो इससे बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है.
बवासीर से बचने के लिए क्या करें
अपने खानपान में फाइबर से भरपूर चीजों को शामिल करें. सेब और अमरूद जैसे फल खाएं. दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें, बहुत देर तक मल को अंदर ना रखें और जब महसूस हो तब मलत्याग करें. खानपान में बाहर का प्रोसेस्ड फूड कम कर दें और हेल्दी वेट मैनेज करने पर फोकस करें.
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अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
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