Cancer Symptoms: ल्यूकेमिया एक ऐसा कैंसर होता है जो अगर किसी को हो जाए तो उसके जीवन को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसमें इंसान के शरीर का खून संक्रमित हो जाता है। अगर इस बीमारी का समय पर पता नहीं चल पाता है तो वह धीरे-धीरे ब्लड सेल्स को डैमेज करने लगता है। इस बीमारी का लक्षण आंखों में दिखाई देता है। आंखों का सफेद भाग का रंग पीला दिखाई देना पीलिया के साथ-साथ ब्लड कैंसर का भी संकेत हो सकता है। चलिए जानते हैं इस बारे में।
कैसे आंखों का पीला रंग बनता है संकेत?
NCBI की रिपोर्ट के मुताबिक, स्टडी में पाया गया है कि अगर किसी को कैंसर होने के साथ-साथ लिवर खराब हो जाता है, तो उसकी आंखों का रंग पीला दिखाई देने लगता है। दरअसल, कैंसर सेल्स खून को गंदा कर देते हैं और उससे शरीर में बिलिरुबिन बाइल ब्लॉक हो जाता है। इससे खून में बिलिरुबिन बढ़ने लगता है। इससे ही आंखों का रंग तो कभी शरीर का रंग भी पीला दिखने लगता है।
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ल्यूकेमिया कैंसर कितना खतरनाक?
ल्यूकेमिया में खून वाला कैंसर होता है। इसमें कैंसर के सेल्स बोन मैरो में बनने लगते हैं। बोन मैरो हमारे शरीर में हड्डियों के बीच मौजूद खाली जगह पर होता है। ये टिश्यू का मुलायम ग्रुप होता है, जो ब्लड सेल्स को बनाने में मदद करती है। हमारी बॉडी में रेड सेल्स, व्हाइट सेल्स और प्लेटलेट्स को यहीं बनाते हैं। अगर इनमें से कोई सेल अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती है, वहीं कैंसर बन जाती है।
ल्यूकेमिया का रिस्क किसे ज्यादा होता है?
- यह कैंसर बच्चों और बुज़ुर्गों में ज्यादा पाया जाता है।
- पारिवारिक इतिहास, परिवार में किसी को ल्यूकेमिया या ब्लड कैंसर हुआ है तो रिस्क बढ़ जाता है।
- रेडिएशन जैसे X-ray, रेडियोथेरेपी, परमाणु अटैक के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर हो सकता है।
- कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी होने के बाद मरीजों को ये कैंसर हो सकता है।
- इम्यून सिस्टम कमजोर होने पर जैसे कि AIDS वाले लोगों को ये कैंसर हो सकता है।
- बहुत ज्यादा सिगरेट पीने वाले लोगों को।
ब्लड कैंसर के 9 संकेत
- रात में पसीना आना या जल्दी थकान होना।
- सांसों का फूलना।
- बुखार, वो भी रात के समय होना।
- बार-बार इंफेक्शन होना।
- वजन घटना।
- हड्डियों और जोड़ों में दर्द होना।
- लिम्फ नोड्स में सूजन होना।
- मसूड़ों और नाक से खून आना।
- हल्की-फुल्की चोट लगने पर स्किन का नीला पड़ जाना।
कैसे होगा बचाव?
- धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।
- हानिकारक केमिकलों के संपर्क में आने से बचें।
- रेडिएशन से बचाव।
- हेल्दी डाइट का सेवन करें।
- पर्याप्त नींद लें।
- तनाव कम करें।
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