नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा गांधी और देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर श्रद्धांजलि दी है। कई अन्य नेताओं के साथ पीएम मोदी ने भी महात्मा गांधी को राजघाट पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
वहीं, पीएम मोदी शास्त्री जी को श्रद्धांजलि देने के लिए विजयघाट पहुंचे।
महात्मा गांधी जयंती
आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 153वीं जयंती है। इस मौके पर देश बापू को याद कर रहा है। हर वर्ष 2 अक्टूबर का दिन गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी एक महान नेता के साथ समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन निडर होकर लोगों के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष किया। अंग्रेजों से भारत को मुक्त करवाने वाले महात्मा गांधी के विचार आज भी लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके जन्मदिवस पर उन्हें नमन किया है और देशवासियों को उनके सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का दोबारा संकल्प लेने को कहा है।
आपको बता दें कि महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। बाद में लोग उन्हें बापू कहकर बुलाने लगे। बापू ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत के दम पर ब्रिटश हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था।
आइए आज हम उनके अनमोल विचारों को अपने दोस्तों और करीबियों के बीच शेयर करें और उनके सपनों के भारत के निर्माण के लिए दृढ़ संकल्प लें-
गांधी जी के अनमोल विचार
- पाप से घृणा करो पर पापी से नहीं, क्षमादान बहुत मूल्यवान चीज है।
- स्वयं को जानने का सर्वश्रेष्ठ तरीका है खुद को औरों की सेवा में लगा देना।
- आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्वपूर्ण है, जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते।
- प्रेम की शक्ति दंड की शक्ति से हजार गुनी प्रभावशाली और स्थायी होती है।
- जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो, तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं है।
- जो चाहे वह अपनी अंतरात्मा की आवाज सुन सकता है, वह सबके भीतर है।
- व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।
- काम की अधिकता नहीं, अनियमितता आदमी को मार डालती है।
- हम जिसकी पूजा करते हैं, उसी के समान हो जाते हैं।
- अहिंसा कायरता की आड़ नहीं है, अहिंसा वीर व्यक्ति का सर्वोच्च गुण है, अहिंसा का मार्ग हिंसा के मार्ग की तुलना में कहीं ज्यादा साहस की अपेक्षा रखता है।
- अहिंसा के बिना सत्य का अनुभव नहीं हो सकता, अहिंसा का पहला सिद्धांत हर अमानवीय चीज के प्रति असहयोग करना है।
- धरती पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधन हमारी जरूरत पूरी करने के लिए हैं, लालच की पूर्ति के लिए नहीं।
शास्त्री जी की जयंती
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद श्रीवास्तव, जो इलाहाबाद में राजस्व कार्यालय में एक क्लर्क थे, और रामदुलारी देवी के घर मुगलसराय में हुआ था। उनकी जन्मतिथि महात्मा गांधी की जयंती के साथ मेल खाती है।
उन्होंने हरीश चंद्र हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा लेने के बाद एक इंटर कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन असहयोग आंदोलन में शामिल होने के लिए शास्त्री जी अपनी पढ़ाई छोड़ दी। 16 मई, 1928 को उनका विवाह ललिता देवी से हुआ।
रोचक तथ्य
16 साल की उम्र में, शास्त्री अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के लिए असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। उनका प्रधानमंत्रित्व काल 19 महीने की अल्पावधि के लिए था, लेकिन उन्होंने स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष का हिस्सा बनकर 30 वर्षों तक देश की सेवा की है। वह लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित जन समाज (लोक सेवक मंडल) के सेवकों के आजीवन सदस्य थे। वहां उन्होंने पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए काम करना शुरू किया और बाद में उस समाज के अध्यक्ष बने।
1920 के दशक के आसपास, शास्त्री भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए और अंग्रेजों द्वारा उन्हें कुछ समय के लिए जेल भेज दिया गया। 1930 के दशक में, उन्होंने नमक सत्याग्रह में भाग लिया और उन्हें दो साल से अधिक समय के लिए जेल भेज दिया गया। 1937 में, वह यूपी के संसदीय बोर्ड के आयोजन सचिव थे और बाद में 1942 में, जब महात्मा गांधी ने मुंबई में भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया, तब उन्हें फिर से जेल भेज दिया गया था। उनका कारावास 1946 तक जारी रहा, जिसमें कुल नौ साल जेल में रहे।
जेल में उनके समय का उपयोग किताबें पढ़ने और पश्चिमी दार्शनिकों, क्रांतिकारियों और समाज सुधारकों के काम को समझने में बीतता था। उन्हें 1966 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उन्होंने भारत में श्वेत और हरित क्रांति को बढ़ावा दिया जिसने गुजरात में अमूल दूध सहकारी का समर्थन करके और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड बनाकर दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद की।
1965 में, हरित क्रांति को बढ़ावा देने से हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे स्थानों में खाद्यान्न की उत्पादकता में मदद मिली।
एक प्रेरक नेता
1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान जब देश भोजन की कमी का सामना कर रहा था, लाल बहादुर शास्त्री ने अपना वेतन नहीं लिया। उन्होंने एक रेल दुर्घटना के लिए खुद को जिम्मेदार ठहराते हुए, रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की समाप्ति के बाद पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ ताशकंद में शांति संधि पर हस्ताक्षर किए जाने के ठीक एक दिन बाद, 11 जनवरी, 1966 को में शास्त्री का निधन हो गया। उनकी मृत्यु अभी भी एक रहस्य बनी हुई है। मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया गया, लेकिन शास्त्री परिवार ने दावा किया कि यह जहर था। उन्हें 1966 में मरणोपरांत सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न मिला।
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