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कोलकाता से चेन्नई का सफर सिर्फ 3 घंटे में होगा पूरा; कमाल की है ये टेक्नोलॉजी

Kolkata to Chennai in Just 3 Hours: IIT मद्रास के स्टार्टअप वॉटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज ने सी-ग्लाइडर बेस्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया है, जो विंग-इन-ग्राउंड (WIG) तकनीक का उपयोग करके समुद्र की सतह से 4 मीटर ऊपर उड़ान भरेगा। इससे 1600 किमी की दूरी मात्र 3 घंटे में पूरी की जा सकेगी।

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Kolkata to Chennai in Just 3 Hours: आपको एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए ट्रैवल करना पड़ता है और इसमें कुछ समय तो लगता है। मगर हम आपसे कहें कि एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसकी मदद से आप केवल 3 घंटे में कोलकाता से चेन्नई की 1600 किलोमीटर की दूरी पूरी कर सकेंगे। जी हां, आईआईटी मद्रास का स्टार्टअप वॉटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज इसको हकीकत में बदलने की तैयारी कर रहा है। यहां हम आपको इसके बारे में बता रहे हैं।

कैसे काम करेगी यह तकनीक?

एयरो इंडिया 2025 में वॉटरफ्लाई टेक्नोलॉजीज के को-फाउंडर हर्ष राजेश ने इस नए ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जानकारी दी। कंपनी सी-ग्लाइडर (Seaglider) तकनीक पर आधारित विंग-इन-ग्राउंड (WIG) क्राफ्ट विकसित कर रही है। यह वाहन समुद्र की सतह से केवल 4 मीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरेगा, जिससे यात्रा तेज और किफायती होगी।

ग्राउंड इफेक्ट का उपयोग

कंपनी के दूसरे फाउंडर केशव चौधरी ने बताया कि यह ग्राउंड इफेक्ट का फायदा उठाएगा। जब कोई प्लेन पानी या जमीन के बेहद करीब उड़ता है, तो उसके पंखों पर हवा का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कम फ्यूल में ज्यादा लिफ्ट मिलती है। इसके कारण प्लेन कम ऊंचाई पर रहते हुए भी तेजी से और कम लागत में उड़ान भर सकेगा।

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उन्होंने यह भी कहा कि यह समान विमानों की तुलना में सस्ता होगा क्योंकि इसे ज्यादा ऊंचाई पर उड़ान भरने की जरूरत नहीं है, जिससे इसके स्ट्रक्चर को ज्यादा मजबूत बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कम लागत में लंबा सफर

आमतौर पर एक कमर्शियल फ्लाइट को कोलकाता से चेन्नई तक उड़ान भरने के लिए लगभग 2.5-3 टन एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की जरूरत होती है, जिसकी लागत 95,000 प्रति किलोलीटर तक होती है। जबकि वॉटरफ्लाई का सी-ग्लाइडर फ्यूल की खपत को कम करके टिकट की कीमतों को बेहद सस्ता बना सकता है।

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प्लानिंग टाइमलाइन
100 किलोग्राम प्रोटोटाइप 2025 के मिड तक
1 टन वजनी प्रोटोटाइप 2025 के अंत तक
20-सीटर मॉडल 2026 में उड़ान भरने की संभावना

आनंद महिंद्रा ने की तारीफ

महिंद्रा ग्रुप के अध्यक्ष आनंद महिंद्रा ने इस प्रोजेक्ट की सराहना करते हुए कहा कि आईआईटी मद्रास अब सिलिकॉन वैली को स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने में टक्कर दे रहा है! लगभग हर हफ्ते कोई नई टेक्नोलॉजी स्टार्टअप की खबर आती है। यह परियोजना न केवल हमारी विशाल जलमार्ग संपदा का उपयोग करती है, बल्कि इसका डिजाइन भी बेहद आकर्षक है।

 

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