AI Impact Summit 2026: नई दिल्ली में चल रहा इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट आज अपने अंतिम दिन पर है, लेकिन इसके नतीजे पहले ही भारत के लिए बड़ी सफलता के संकेत दे चुके हैं. अरबों डॉलर के निवेश, दुनिया की दिग्गज कंपनियों की भागीदारी और दर्जनों देशों के समर्थन के साथ यह साफ हो गया है कि भारत अब एआई की वैश्विक दौड़ में सिर्फ हिस्सा नहीं ले रहा, बल्कि नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है. सवाल यह है कि इस समिट से भारत को आखिर क्या मिला और आने वाले समय में इसका देश को कितना फायदा होगा.
250 अरब डॉलर का निवेश
इस समिट की सबसे बड़ी सफलता बुनियादी ढांचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश कमिटमेंट को माना जा रहा है. यह निवेश डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने में लगाया जाएगा. इससे भारत का डिजिटल ढांचा मजबूत होगा और टेक सेक्टर को अभूतपूर्व गति मिलेगी.
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रिलायंस का सबसे बड़ा दांव
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रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और जियो ने अगले सात वर्षों में करीब 109.8 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है. यह पैसा देशभर में अत्याधुनिक डेटा सेंटर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई सेवाओं के विकास पर खर्च होगा. कंपनी का लक्ष्य भारत को एआई और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है.
अडानी समूह का इतना निवेश
अडानी समूह ने भी 2035 तक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 अरब डॉलर निवेश की योजना पेश की है. यह निवेश मुख्य रूप से नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले डेटा सेंटर बनाने पर केंद्रित होगा. समूह का अनुमान है कि इससे संबंधित उद्योगों में करीब 150 अरब डॉलर का अतिरिक्त आर्थिक प्रभाव पैदा हो सकता है.
माइक्रोसॉफ्ट और ग्लोबल कंपनियों का भरोसा
माइक्रोसॉफ्ट ने इस दशक के अंत तक ग्लोबल साउथ में एआई विस्तार के लिए 50 अरब डॉलर तक निवेश की योजना बनाई है. कंपनी पहले ही भारत में 17.5 अरब डॉलर के निवेश का रोडमैप दे चुकी है. इसके अलावा योट्टा डेटा सर्विसेज 2 अरब डॉलर की लागत से एशिया के सबसे बड़े एआई कंप्यूटिंग हब में से एक विकसित कर रही है, जिसमें एनवीडिया की उन्नत चिप्स का इस्तेमाल होगा.
Google का बड़ा निवेश और AI हब की तैयारी
इंडिया एआई समिट में गूगल ने भी भारत के लिए अपनी लंबी अवधि की निवेश योजना का ऐलान किया है. कंपनी के सीईओ सुंदर पिचाई ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी जिंदगी का सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव है और भारत तेजी से वैश्विक AI इकोसिस्टम में अपनी मजबूत जगह बना रहा है.
गूगल आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में करीब 15 अरब डॉलर के इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के साथ एक फुल-स्टैक AI हब तैयार कर रहा है. इस प्रोजेक्ट में गीगावॉट स्तर की कंप्यूटिंग क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सबसी केबल गेटवे शामिल होगा. इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे और देशभर के स्टार्टअप, उद्योग और संस्थानों तक उन्नत AI तकनीक की पहुंच आसान हो सकेगी.
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TCS, OpenAI और नई संभावनाएं
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने अपने डेटा सेंटर डिविजन के लिए ओपनएआई को पहला ग्राहक बनाया है. यह साझेदारी भारत को वैश्विक एआई सेवाओं के निर्यात का बड़ा केंद्र बनाने में मदद कर सकती है. इससे भारतीय आईटी सेक्टर के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है.
एलएंडटी और एनवीडिया की ‘एआई फैक्ट्री’
लार्सन एंड टुब्रो ने एनवीडिया के साथ मिलकर देश की सबसे बड़ी एआई फैक्ट्री बनाने की योजना पेश की है. इसमें बड़े स्तर पर एआई-रेडी डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा. इस परियोजना से उच्च कौशल वाले रोजगार भी बढ़ने की संभावना है.
‘दिल्ली घोषणापत्र’ से बढ़ा ग्लोबल प्रभाव
केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक समिट का कूटनीतिक पहलू भी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि रहा. अब तक 70 देशों ने ‘दिल्ली घोषणापत्र’ पर सहमति जताई है और उम्मीद है कि यह संख्या 80 के पार जा सकती है. इससे साफ है कि एआई नीतियों और वैश्विक मानकों को तय करने में भारत की भूमिका मजबूत हो रही है.
बता दें, इस आयोजन में करीब 5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया, जो देश में नई तकनीक के प्रति बढ़ते उत्साह को दिखाता है. सरकार का मानना है कि इतना बड़ा निवेश और भागीदारी भारत की अर्थव्यवस्था और टेक इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर साबित होगी.
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