How To Control Child Online Gaming Addiction: गाजियाबाद में 9वें फ्लोर से कूदकर तीन सगी बहनों के आत्महत्या किए जाने की खबर ने माता-पिता के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है- क्या बच्चों का मोबाइल और गेमिंग की दुनिया में जरूरत से ज्यादा डूब जाना खतरनाक हो सकता है? शुरुआती रिपोर्ट्स में सामने आया है कि तीनों नाबालिग बहनें एक टास्क-बेस्ड कोरियन गेम की लत का शिकार थीं. तीनों नाबालिग थीं और लंबे समय से एक टास्क-बेस्ड कोरियन गेम खेल रही थीं. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि ऐसे गेम क्या होते हैं और बच्चों की सुरक्षा के लिए किन बातों पर ध्यान देना चाहिए.
क्या है ‘कोरियन लवर’ गेम
कोरियन लवर जैसे गेम आम वीडियो गेम्स से अलग होते हैं. इन्हें टास्क-बेस्ड, सिमुलेशन या रोल-प्लेइंग गेम्स की कैटेगरी में रखा जाता है. ये गेम K-Drama और कोरियन पॉप कल्चर से प्रेरित होते हैं, जहां खिलाड़ी को एक वर्चुअल कोरियन कैरेक्टर से भावनात्मक रूप से जोड़ा जाता है. गेम का माहौल इस तरह बनाया जाता है कि खिलाड़ी को लगता है वह किसी असली इंसान से बातचीत कर रहा है.
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असल दुनिया से कट जाते हैं बच्चे
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इन गेम्स में मिलने वाले टास्क और चुनौतियां धीरे-धीरे खिलाड़ी को मानसिक रूप से जकड़ लेती हैं. बच्चा परिवार, दोस्तों और पढ़ाई से दूरी बनाने लगता है. पहले भी ब्लू व्हेल और मोमो चैलेंज जैसे टास्क-बेस्ड गेम्स इस वजह से चर्चा में रहे हैं, जहां बच्चों को खतरनाक स्टेप्स करने के लिए उकसाया गया. सबसे खतरनाक पहलू इन गेम्स के अनऑफिशियल वर्जन या उनसे जुड़े ऑनलाइन कम्युनिटी ग्रुप्स होते हैं. कई बार ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर खिलाड़ियों को ऐसे टास्क दिए जाते हैं, जो उनकी मानसिक और शारीरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. यही वजह है कि बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो जाता है. इसके लिए माता पिता इन बातों पर ध्यान देना सबसे जरूरी है.
1. इन-गेम चैट पर खास नजर रखें
आजकल ज्यादातर गेम्स में चैट या मैसेजिंग फीचर होता है, जिससे कोई भी अजनबी बच्चे से संपर्क कर सकता है. माता-पिता को यह जरूर देखना चाहिए कि बच्चा किससे बात कर रहा है और किन विषयों पर बातचीत हो रही है. कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे चैट-फीचर वाले गेम्स से दूरी बनाना ज्यादा सुरक्षित विकल्प हो सकता है.
2. टास्क और चैलेंज आधारित गेम्स से रहें सतर्क
वीडियो गेम्स दिमाग को तेज कर सकते हैं, लेकिन टास्क और चैलेंज आधारित गेम्स में खतरा ज्यादा होता है. अगर बच्चा गेम खेलते समय खुद को कमरे में बंद करने लगे, चिड़चिड़ा हो जाए या असामान्य व्यवहार दिखाए, तो यह चेतावनी का संकेत हो सकता है. ऐसे मामलों में तुरंत बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना जरूरी है.
3. उम्र की रेटिंग और ऐप परमिशन जरूर जांचें
प्ले स्टोर और ऐप स्टोर पर हर गेम के साथ उम्र की रेटिंग दी जाती है. माता-पिता को यह देखना चाहिए कि बच्चा अपनी उम्र के मुताबिक ही गेम खेल रहा है या नहीं. साथ ही यह भी जांचें कि गेम कैमरा, माइक्रोफोन या लोकेशन जैसी किन परमिशन की मांग कर रहा है. जरूरत से ज्यादा एक्सेस मांगने वाले गेम्स को हटाना ही बेहतर है.
4. लत लगाने वाले गेम्स से बच्चों को ऐसे बचाएं
कई गेम्स ऐसे होते हैं जो हर लेवल पर बच्चों को कॉइन खरीदने या पैसे खर्च करने के लिए उकसाते हैं. धीरे-धीरे बच्चा गेम की लत में फंस जाता है और उसे खुद भी इसका एहसास नहीं होता. अगर बच्चा बार-बार गेम में खरीदारी की मांग करे, तो उसे प्यार से समझाएं और ऐसे गेम्स से दूरी बनवाएं.
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5. बच्चे फोन की जांच करना भी जरूरी
बच्चों की आपनी प्राइवेट होती है. लेकिन अगर बच्चा बहुत ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा है और उसके व्यवहार में भी बदलाव है तो उसके फोन की जांच करें और देखें कि वो कहीं किसी गेम के जाल में तो नहीं फंस गया और फिर उसे प्यार से समझाएं. और ये करना उस केस में जरूरी है जब बच्चा नाबालिग है और अपने लिए फैसले नहीं ले सकता.
माता-पिता की भूमिका सबसे अहम
इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि बच्चों के साथ खुला संवाद और समय पर निगरानी कितनी जरूरी है. बच्चों को डराने के बजाय उनसे बात करें, उनके व्यवहार को समझें और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग जैसी मदद लेने से न हिचकें. डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सबसे पहले परिवार की ही होती है.