Explained Why BJP Shiv Sena alliance almost break: महाराष्ट्र के मुंबई में होने वाले बीएमसी चुनाव के लिए 227 सीटों में से 226 पर तो BJP-शिवसेना में गठबंधन हुआ, लेकिन एक समय ऐसा आया कि सिर्फ एक सीट के लिए बीजेपी और शिवसेना का गठबंधन टूटने की नौबत आ गई, लेकिन दोनों पार्टियों के नेता यह बात जानते हैं कि मुंबई में ठाकरे को मात देनी है, तो एकनाथ शिंदे का साथ ज़रूरी है. यह जानते हुए बीजेपी ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना से मुंबई में गठबंधन किया. पहले शिंदे को 52 सीटों का ऑफर दिया गया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
सीट नंबर 225 पर बीजेपी और शिवसेना में टक्कर
दक्षिण मुंबई की सीट नंबर 225 पर बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने हैं. 226 सीट पर गठबंधन है, लेकिन एक सीट के लिए बीजेपी और शिवसेना में भिड़ंत जारी है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने बीजेपी पर दबाव बढ़ाते हुए मुंबई में 227 सीटों में से 112 सीटों की मांग की. हाल के निकाय चुनावों में मिली सफलता और शहरी क्षेत्रों में पकड़ का हवाला देकर शिंदे लगातार ज्यादा सीटों की मांग करते रहे. शिंदे का दावा था कि मुंबई में शिवसेना के परंपरागत वोटर ठाकरे बंधुओं के सामने बीजेपी को वोट देने से परहेज करेंगे. यही वजह रही कि शिंदे 112 सीटों की मांग पर अड़े रहे.
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आखिरकार शिंदे को 90 सीटों का प्रस्ताव दिया गया, जिसे उन्होंने देर-सवेर स्वीकार कर लिया. लेकिन बीजेपी मुंबई की 225 नंबर सीट शिंदे की शिवसेना को देने के लिए तैयार नहीं हुई. शिंदे भी इस सीट पर अड़े रहे.
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क्या है 225 नंबर की सीट का गणित
दरअसल, 225 नंबर की सीट कुलाबा विधानसभा क्षेत्र में आती है, जहां से बीजेपी के विधायक राहुल नार्वेकर हैं और वे महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर भी हैं. नार्वेकर ने सीट नंबर 225, 226 और 227 पर दावा करते हुए इन तीनों सीटों पर अपने छोटे भाई, भाभी और बहन के लिए टिकट मांगे. साल 2017 में हुए बीएमसी चुनाव में 226 और 227 सीटों से नार्वेकर के भाई और भाभी चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन इस बार 225 नंबर सीट पर भी दावा कर दिया गया.
शिवसेना यूबीटी नेता संजय राऊत ने आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष और स्थानीय विधायक राहुल नार्वेकर ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर तीन सीटों पर निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका.
साल 2017 में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने जीता चुनाव
साल 2017 में वार्ड नंबर 225 से शिवसेना की सुजाता सानप ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से चुनाव जीता था. बाद में सुजाता ने अपने देवर गणेश सानप, जो पूर्व पार्षद रह चुके हैं, उनके साथ एकनाथ शिंदे की शिवसेना में प्रवेश किया. सुजाता को भरोसा दिया गया था कि उनका सम्मान रखा जाएगा और उन्हें फिर से वार्ड 225 से टिकट दिया जाएगा. लेकिन 225 नंबर सीट को विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने नाक की लड़ाई बना लिया और इस सीट के लिए दबाव बनाया. आख़िरकार यह तय हुआ कि यहां फ्रेंडली फाइट होगी.
अब 225 नंबर की सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय
विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने अपने विधानसभा क्षेत्र के तीन वार्ड—225, 226 और 227—में पार्षद पद के लिए अपनी भाभी हर्षदा नार्वेकर, बहन गौरवी शिवलकर और सगे भाई मकरंद नार्वेकर को टिकट देकर मैदान में उतारा है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने बीजेपी के नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन के कहने पर सांसदों और विधायकों के परिवारजनों को टिकट देने से परहेज किया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष के मामले में परिवार पर सीएम की मेहरबान नज़र आई.
उधर, शिवसेना यूबीटी का उम्मीदवार भी इसी वार्ड से चुनाव लड़ रहा है, जिससे मुकाबला अब त्रिकोणीय हो चुका है.
क्या है वार्ड 225 की खासियत?
बीएमसी के 225 नंबर वार्ड में खुद बीएमसी का मुख्यालय, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया, चर्चगेट स्टेशन और सबसे खूबसूरत मरीन ड्राइव जैसे इलाके शामिल हैं. यहां फोर्ट और बोरी बाज़ार इलाके में गुजराती, मारवाड़ी और जैन वोट निर्णायक भूमिका में हैं, जबकि कुलाबा इलाके में मराठी वोट निर्णायक हैं. पुरानी जर्जर इमारतों का पुनर्विकास, म्हाडा और एसआरए इमारतों का विकास यहां के अहम मुद्दे हैं. इस इलाके में झुग्गी-बस्तियों की संख्या भी अधिक है.
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