Satyajit Ray Struggle Story: पहले जमाने में सिनेमा का जुनून निर्माताओं और निर्देशकों को अपनी पत्नियों के गहने और घर के कीमती सामान को गिरवी रखने लिए भी मजबूर कर देता था. ऐसा ही एक पुराना किस्सा, जहां पर निर्देशक के पास इतने पैसे नहीं बचे कि वह फिल्म बना सके. लेकिन जनून ने पीछे हटने नहीं दिया. उनकी पत्नी सहारा बनी और अपने गहने तक बेच दिए. आइए जानते हैं ये पूरी कहानी.
यह भी पढ़ें: 9 भाषाओं में बनी वो फिल्म, जिसका हिंदी में आते ही हुआ बुरा हाल, मेकर्स के छूट गए थे पसीने
---विज्ञापन---
निर्माता ने बेचे पत्नी के गहरे
फिल्म इंडस्ट्री में सत्यजीत रे को कौन नहीं जानता? सिनेमा का ज्ञान देने वाले सत्यजीत फिल्मों को लेकर काफी जुनूनी थे. वे फिल्म बनाना चाहते थे। लेकिन पैसा कहाँ से लाते? उन्होंने अपनी बीमा पॉलिसी बेच दी. पुराने ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स भी बेच दिए. लेकिन फिर भी पैसे इकट्ठे नहीं हो पाए. तब उनकी पत्नी विजया रे उनका सहारा बनीं और उन्होंने अपने गहने भी बेच दिए. इतना सब करने के बाद भी पैसे कम पड़े. तब बंगाल सरकार ने उन्हें कुछ लोन दिया. इस तरह फिल्म की शूटिंग शुरू हुई.
---विज्ञापन---
यह भी पढ़ें: तबाही मचाने वाली है साउथ की ये फिल्म, 1000 कलाकार, 1400 VFX शॉट्स ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
किस फिल्म के लिए उठाया इतना कष्ट?
सत्यजीत रे ने अपनी बेहद कमाल की फिल्म पाथेर पांचाली के लिए इतना सबकुछ किया था, जो कि आज कल्ट फिल्मों में से एक है. इसकी कहानी और निर्देशन ने लोगों का दिल छू लिया और भारतीय सिनेमा में यादगार फिल्म बनकर तैयार हुई.
रिलीज होते ही रिकॉर्ड तोड़े
1955 में फिल्म रिलीज हुई. पहले लोग नहीं समझे, लेकिन धीरे-धीरे तारीफ होने लगी. बॉक्स ऑफिस पर यह सुपरहिट साबित हुई. भारत में बहुत कमाई की. यह फिल्म विदेशों में भी दिखाई गई और दुनिया भर में प्रशंसा मिली. यह फिल्म कैन फिल्म फेस्टिवल में इनाम जीती. आज भी कई लोग इसे भारतीय सिनेमा की सबसे अच्छी फिल्म मानते हैं. इसने करोड़ों रुपये कमाए और सत्यजीत रे को स्टार बना दिया.
यह भी पढ़ें: Sunny Deol की वो हीरोइन, जो बनी नेशनल क्रश, ब्लॉकबस्टर से किया था डेब्यू, फिर दे डाली सब फ्लॉप
फिल्म की कहानी और मेहनत
बहुत कम लोगों को पता होगा लेकिन पाथेर पांचाली एक गरीब परिवार की सच्ची कहानी है. इसमें अपु नाम का लड़का अपनी बहन दुर्गा और माँ-बाप के साथ जीवन जीता है. फिल्म में गाँव की सादगी, बच्चे की मासूमियत और मुश्किलें बहुत खूबसूरती से दिखाई गई हैं. सत्यजीत रे ने बहुत कम बजट में यह फिल्म बनाई. उन्होंने खुद कैमरा, संगीत और निर्देशन संभाला. शूटिंग में कई साल लगे क्योंकि पैसे खत्म हो जाते थे. आखिरकार इतनी कठिनाईयों के बाद भी सत्यजीत रे अपनी इस फिल्म को बना पाए और बाद में उन्होंने इससे काफी कमाई भी की.
यह भी पढ़ें: ‘आंखों में नमी, लड़खड़ाते कदम’, Dharmendra के निधन के बाद पहली बार दिखीं Prakash Kaur