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Amitabh Bachchan के पिता की जिंदगी में कैसे आईं 'मां', KBC 16 के मंच पर सुनाया किस्सा

Amitabh Bachchan In KBC 16: अमिताभ बच्चन ने केबीसी 16 के मंच पर अपने पिताजी हरिवंश राय बच्चन की पहली पत्नी के बारे में खुलकर बात की। साथ ही बताया कि वो पहली बार उनकी मां तेजी बच्चन से कैसे मिले थे…

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Amitabh Bachchan In KBC 16

Amitabh Bachchan In KBC 16: बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन इन दिनों अपने क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति 16 को लेकर लाइमलाइट में बने हुए हैं। इस शो में अभिनेता आने वाले प्रतियोगियों से कई सारी दिलचस्प बातें करते हैं। कई बार उन्हें अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़े किस्से शेयर करते हुए भी सुना गया है।

हाल ही में केबीसी 16 के मंच पर महानायक ने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन और उनकी पहली पत्नी के बारे में बात की। अमिताभ ने बताया कि जब उनके पिता की पहली पत्नी का निधन हो गया था, उस वक्त कवि काफी गंभीर स्थिति में चले गए थे।

केबीसी के मंच पर शेयर किया किस्सा

कौन बनेगा करोड़पति 16 के मंच पर अमिताभ बच्चन ने अपने पिता की पहली पत्नी के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता की पहली पत्नी का निधन हो गया था। उसके बाद वो गंभीर स्थिति में चले गए थे। बहुत उदास अवस्था में.. जितनी भी कविता उन्होंने लिखी थीं, उस जमाने में बहुत बहुत अंधेरा था। बहुत दुख के साथ भरी हुई थीं।

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बिग बी ने आगे कहा, ‘कुछ समय के बाद पिताजी ने कवि सम्मेलन में जाना शुरू किया जिससे कुछ पैसे मिल सकें। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने अपनी मां तेजी बच्चन का जिक्र किया और बताया कि पहली बार उनके पिता और मां कैसे मिले थे। उन्होंने कहा, ‘मेरे पिता के एक दोस्त बरेली में थे। वो उनसे मिलने बरेली पहुंच गए। रात को दोनों साथ में डिनर कर रहे थे, तब दोस्त ने उनसे एक कविता सुनाने का अनुरोध किया था।

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बरेली में हुई थी दोनों की पहली मुलाकात

महानायक ने आगे बताया कि इससे पहले उनके पिता कविता सुना पाते, उनके दोस्त ने अपनी पत्नी से तेजी (अमिताभ बच्चन की मां) को अंदर से बुलाने के लिए कह दिया। अमिताभ बच्चन ने कहा, ‘वहीं मेरे पिताजी की मेरी मां से मुलाकात हुई थी।

अमिताभ बच्चन यहीं नहीं रुके उन्होंने आगे कहा, ‘मां के आने के बाद मेरे पिताजी ने ‘क्या करु संवेदना लेकर तुम्हारी।’ कविता सुनाई, जिसे सुनकर मां रो पड़ी थीं। इसके बाद पिताजी के दोस्त ने दोनों को अंदर अकेला छोड़ दिया। थोड़ी देर बाद वो माला लेकर अंदर आए और पिताजी से बात की। बस यही वो दिन था जब पिताजी ने तय कर लिया था कि वो उनकी जीवन संगिनी बनेंगी।

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