IC 814: The Kandahar Hijack Rachna Katyal Story: साल 2000 में हुए आईसी 814 कंधार हाइजैक की वो दर्दनाक घटना आज भी हर भारतीय के दिलों पर एक गहरे जख्म की तरह है जिसपर हाल ही में नेटफ्लिक्स की आई सीरीज ने फिर से नमक छिड़क दिया है। ये घटना भारत के इतिहास के उन काले पन्नों में दर्ज है जिन्हें देश फिर से कभी याद नहीं करना चाहेगा। प्लेन हाईजैक की इस घटना में आतंकियों ने एक शख्स की जान भी ले ली थी।
दरअसल हम IC 814 के उस यात्री के बारे में हम बात कर रहे हैं, जिसकी ‘हाईजैकिंग’ के दौरान बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। वो पैसेंजर कोई और नहीं बल्कि न्यूली वेड रुपिन कात्याल थे, जो अपनी नई-नवेली दुल्हन के साथ हाईजैक किए गए विमान में सवार हुए थे। ये कपल अपने हनीमून से वापस लौट रहा था लेकिन किसे पता था कि ये उनका साथ में आखिरी सफर बन जाएगा।
रोती-बिलखती रहीं रचना कात्याल
सीरीज में रुपिन कात्याल को मरते हुए तो दिखा दिया गया लेकिन जो देश को नहीं दिखा वो था रुपिन की पत्नी का वो दर्द जो कई सालों तक उनके दिलों-दिमाग पर घर बनाकर छाया रहा। रुपिन की पत्नी रचना कात्याल, जिन्हें आतंकियों ने ये तक नहीं बताया था कि उनके पति को बेरहमी से उन्होंने मार दिया था। रचना कात्याल फ्लाइट में बैठे हुए लगातार रोती रही थीं कि मुझे मेरे पति के पास प्लीज ले जाइए लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। वो हाईजैकर्स के सामने रोती-बिलखरती रही लेकिन उसकी नई जिंदगी को आतंकियों ने तबाह कर दिया। रचना अब क्या करती हैं? इस घटना के बाद उन्होंने क्या किया, चलिए आपको बताते हैं।हाइजैक की पीड़ा और उसके बाद का संघर्ष
इस सीरीज के नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद खूब बवाल तो देखने को मिल ही रहा है लेकिन साथ ही इसके सारे किरदार भी चर्चाओं में आ गए हैं। रचना कात्याल भी उन्हीं में से एक हैं। आईसी 814 कंधार हाइजैक के दौरान, रचना कात्याल ने अपने पति रुपिन कात्याल को आतंकवादियों के हाथों खो दिया था। इस घटना के बाद रचना का जीवन बेहद मुश्किल हो गया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शुरू में उन्हें अपने पति की मौत की सूचना भी नहीं मिली क्योंकि वो एक भ्रम में जी रही थीं। उन्हें एक बीमारी हो गई थी जिसमें उन्हें ऐसा लग रहा था कि उनके पति जिंदा ही हैं क्योंकि फ्लाइट पर जितने भी यात्री थे सभी की जान बच गई थी। अफसोस की बात ये रही कि शादी को एक महीना भी पूरा नहीं हुआ था कि रचना अपने जीवन के सबसे कठिन समय का सामना कर रही थीं।