70-80 के दौर में अमिताभ बच्चन का करियर और स्टारडम पीक पर था. उन्होंने राजेश खन्ना जैसे स्टार को टक्कर दी और बड़े पर्दे पर अच्छा मुकाम हासिल किया था. लेकिन उस समय अगर अमिताभ बच्चन को कोई टक्कर देता था तो वो विनोद खन्ना था. उन्होंने फिल्मों में एक्टिंग की शुरुआत बतौर विलेन की थी लेकिन बाद में वह हीरो बन गए थे. करियर अच्छा खासा चल रहा था लेकिन अचानक से उन्होंने एक्टिंग छोड़ने और सन्यास लेने का ऐलान कर दिया था, जिसने सभी को चौंका दिया था.
विनोद खन्ना के अचानक एक्टिंग छोड़ने के पीछे की ढेरों वजहों पर कयास लगाया गया. इसी में से एक वजह ये भी कही जाती रही थी कि उस समय मल्टीस्टारर फिल्में ज्यादातर बनती थीं. विनोद खन्ना ने भी अमिताभ के साथ 'अमर अकबर एंथनी' जैसी फिल्में की लेकिन क्रेडिट बिग बी ले गए. विनोद को स्टारडम तो मिला लेकिन जो माइलेज मिलना चाहिए था वो बिग बी ले गए और इसकी वजह से इंडस्ट्री को उन्होंने अलविदा कह दिया.
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सन्यास लेने की वजह पर क्या बोले थे विनोद खन्ना?
विनोद खन्ना ने उस समय उठे इन तमाम कयासों पर खुद रिएक्शन दिया था. उन्होंने न्यूज 24 की सीएमडी और एडिटर इन चीफ अनुराधा प्रसाद से एक्सक्लूसिवली बात की थी. मार्च 1998 में की गई इस बातचीत का वीडियो भी यूट्यूब पर है. इस बातचीत में एक्टर से पूछा जाता है, 'आपकी ज्यादातर फिल्में मल्टीस्टारर थीं और इसमें कुछ फिल्में रहीं, परवरिश-अमर अकबर एंथनी, इसमें क्रेडिट अमिताभ बच्चन को मिला और उन्होंने सारी लाइमलाइट ही चुरा ली.' इस पर अभिनेता कहते हैं, 'उन्हें लाइमलाइट जरूर चुरानी चाहिए.' इस पर उनसे पूछा गया, 'क्या आपको बुरा लगा?' विनोद ने हंसते हुए जवाब दिया था, 'नहीं मुझे बुरा नहीं लगा. मैं जो डिजर्व करता था मुझे वो मिला. मुझे नहीं लगता कि वो फिल्में मेरे बिना बन सकती थीं.'
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अमिताभ बच्चन की वजह से लिया था सन्यास?
अनुराधा प्रसाद ने विनोद खन्ना से फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ने को लेकर सवाल किया, 'क्या आपको लगता है कि ये सारे प्रेशर जो थे इन्होंने मजबूर किया और सन्यास के बारे में सोचने पर मजबूर किया?' इस पर विनोद खन्ना ने जवाब दिया था, 'मैं मानता हूं कि अमिताभ बच्चन को टक्कर देने वाला उस समय एकमात्र मैं ही था तो मैं ये क्यों सोचूंगा कि मुझे सफलता नहीं मिली या फिर जो चाहिए था वो अचीव नहीं किया. मीडिया ने ही इस कॉम्पिटिशन को जारी रखा. ये सब सिर्फ कहने की बात है. आप 100 आदमी से पूछिए इसमें 50 मेरा नाम लेंगे और 50 अमिताभ बच्चन का.'
विनोद खन्ना ने 1978 में कर दी थी रिटायरमेंट अनाउंस
करियर की सफलता को लेकर अनुराधा प्रसाद ने उनसे सवाल किया था, 'उस टर्म्स में जो माइलेज आपको मिलनी चाहिए थी वो आपको नहीं मिली क्योंकि वो सुपरस्टार बन गए थे.' इस पर अभिनेता ने अग्रेसिवली जवाब दिया, 'मैं तो उस समय छोड़ दी थी इंडस्ट्री. 1978 में मैंने अपनी रिटायरमेंट अनाउंस कर दी थी. उसके बाद मैंने कोई फिल्में साइन नहीं की. मेरी लास्ट फिल्म मुकद्दर का सिकंदर अमिताभ बच्चन के साथ थी, जो मैंने कंप्लीट कर ली थी. रिटायरमेंट अनाउंस करने के बाद भी मैंने 1981 तक काम किया. अपनी सारी फिल्में पूरी की.'
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यहां देखिए विनोद खन्ना का पूरा इंटरव्यू
विनोद खन्ना का करियर
विनोद खन्ना ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 1968 में कर ली थी. उनकी पहली फिल्म 'मन का मीत' थी, जिसमें वह सुनील दत्त के अपोजिट विलेन के रोल में दिखे थे. इस फिल्म में उनके करदार को काफी पसंद किया गया था. लेकिन उनकी पहली सोलो फिल्म 'हम तुम और वो' थी, जिसे 1971 में रिलीज किया गया था. इसके बाद उन्होंने एक हीरो के तौर पर अपना सिक्का जमा लिया था और उन्होंने 'मेरा गांव मेरा देश', 'अमर अकबर एंथोनी', 'कुर्बानी', और 'दयावान' समेत ढेरों फिल्मों में किया लेकिन, करियर के 10 साल में ही उन्होंने इंडस्ट्री को छोड़ने का भी प्लान कर लिया था. हालांकि, बाद में बाद 1987 में फिल्म 'इंसाफ' से उन्होंने वापसी की थी.
एक्टिंग के अलावा विनोद खन्ना राजनीति में भी सक्रिय रहे. उन्होंने भाजपा के नेता के तौर पर कई बार लोकसभा चुनाव भी जीते थे. फिर बाद में वह कैंसर से जिंदगी की जंग हार गए. उन्होंने 27 अप्रैल 2017 को कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया.