अगस्त्य नंदा और सिमर भाटिया की डेब्यू फिल्म 'इक्कीस' को सिनेमाघरों में रिलीज कर दिया गया है. यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म है, जिसमें उन्होंने अगस्त्य नंदा के पिता का रोल प्ले किया है. वहीं, अगस्त्य ने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल का रोल प्ले किया है. उनके अभिनय की फिल्म में तारीफ की जा रही है. इसके साथ ही अन्य कलाकारों में फिल्म में जयदीप अहलावत भी हैं. उन्होंने उस पाकिस्तानी अफसर का किरदार निभाया है, जिसने अरुण पर गोली चलाई थी. 1971 में हुई बसंतर की लड़ाई में वह शहीद हो गए थे. गोली चलाने की बात उस पाकिस्तानी अफसर ने अरुण के पिता ब्रिगेडियर एमएल खेत्रपाल के सामने कबूला था. चलिए बताते हैं उस पाकिस्तानी अफसर और किस्से के बारे में…
जब सरगोधा पहुंचे थे अरुण खेत्रपाल के पिता
दरअसल, फिल्म 'इक्कीस' में जयदीप अहलावत ने ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर का रोल प्ले किया है. उन्होंने जब लाहौर में अरुण के पिता से मुलाकात की थी तो जबरदस्त स्वागत किया था और उन्हें उनके बेटे को मारने की बात भी बताई थी. बात ऐसी थी कि अरुण खेत्रपाल के शहीद होने के कई साल बाद 2001 में उनके पिता ब्रिगेडियर एमएल खेत्रपाल ने सरगोधा जाने का मन बनाया था, जहां पर वह पैदा हुए थे. सरगोधा अब पाकिस्तान में है और वहीं लाहौर एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात पाक के ब्रिगेडियर नसीर से हुई थी.
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पाक अफसर ब्रिगेडियर नसीर के बारे में
बहरहाल, अगर पाक अफसर ब्रिगेडियर नसीर के बारे में बात की जाए तो वह पाकिस्तान सेना की 13 लांसर्स के एक रिटायर्ड अधिकारी थे. वह साल 2001 में तब सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के पिता से मुलाकात की थी. उस समय दुनियाभर की नजरें उन पर ही थम गई थीं. 1971 में भारत-पाकिस्तान की बसंतर में हुई लड़ाई में अरुण खेत्रपाल शेर की तरह लड़े थे और 21 साल की उम्र में वह शहीद हो गए थे.
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फिल्म 'इक्कीस' में क्या है?
इसके साथ ही फिल्म 'इक्कीस' को लेकर बात की जाए कि फिल्म पाक ब्रिगेडियर नसीर के सीन को कैसे दिखाया गया है तो इसमें दिखाय गया है कि वह सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के पिता ब्रिगेडियर एमएल खेत्रपाल से बड़े सम्मान के साथ मिलते हैं. एयरपोर्ट पर भी गर्मजोशी से स्वागत किया. ये ब्रिगेडियर ख्वाजा मोहम्मद नसीर वही थे, जिसने लड़ाई के दौरान अरुण खेत्रपाल पर गोली चलाई थी. फिर जब उन्होंने इस बात को सेकंड लेफ्टिनेंट के पिता को बताई थी तो उस समय अलग ही माहौल था. बाद में जब एमएल खेत्रपाल लौटे तो उन्होंने बताया था कि जैसे पाक अफसर और उनका परिवार कुछ कहना चाहता था.