हिंदी सिनेमा जगत में रोमियो जूलियट, सोनी माहीवाल और हीर रांझा की बहुत कहानियां देखने के लिए मिली हैं. गुजरे जमाने में ऐसी कई ऐतिहासिक रोमांटिक ड्रामा फिल्में रहीं, जिनकी कमाई का रिकॉर्ड अब तक नहीं टूट पाया. वहीं, उन फिल्मों को बनाने में भी कइयों साल लग जाया करते थे. आज रोमांटिक फिल्में 6 महीने में तैयार हो जाती हैं लेकिन गुजरे जमाने में मेकर्स फिल्मों पर पानी की तरह पैसा बहाते थे. ऐसे में एक 66 साल पुरानी फिल्म के बारे में बता रहे हैं, जिसे बनाने में मेकर्स कंगाल हो गए थे और इसे 16 साल बनाने में लगे थे. लेकिन जब फिल्म को रिलीज किया गया तो इसने शानदार प्रदर्शन किया. फिल्म को देखने के लिए लोग रात-रात भर थिएटर के बाहर सोते थे और सुबह 5 किमी लंबी लाइन टिकट के लिए लगती थी. चलिए बताते हैं इसके बारे में…
दरअसल, जिस रोमांटिक ड्रामा फिल्म के बारे में बात की जा रही है इसे बनाने में 16 साल का वक्त लगा था, इसे बनाने की शुरुआत 1944 में हुई थी और सिनेमाघरों में फिल्म को 1960 में उतारा गया था. इसका बजट भी उस समय के मुकाबले काफी भरकम था. फिल्म का निर्माण 1.5 करोड़ में किया गया था. इसके सीन को असली दिखाने के लिए अधिकतर चीजों का असल में इस्तेमाल किया गया था और देश के कोने कोने से चीजों को मंगवाया गया था. इसका फायदा भी फिल्म को बॉक्स ऑफिस में मिली थी. फिल्म ने 10 करोड़ का बिजनेस किया था. पहले इसे ब्लैक एंड व्हाइट में रिलीज किया गया था. बाद में इसे रिलीड करने के लिए कलर में कर दिया गया था और ये वर्ल्ड सिनेमा के इतिहास की पहली फीचर फिल्म बन गई.
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टिकट के लिए लगती थी 5 किमी लंबी लाइन
हम जिस फिल्म की बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं बल्कि 'मुगल-ए-आजम' है. इस फिल्म को जब सिनेमाघरों में रिलीज किया गया था लोगों में इसका जबरदस्त क्रेज था. लोग इसकी टिकट खरीदने के लिए दो-दो दिन तक लाइन में थड़े रहते थे. करीब 5 किलोमीटर तक लंबी लाइनें लगी रहती थीं. एक बार एक्टर राजा मुराद ने ANI से इस फिल्म को लेकर बातचीत की थी. उनके पिता हामिल अली मुराद इस मूवी का हिस्सा थे. एक्टर ने बताया था कि फिल्म को सोमवार को रिलीज किया जाना था और लोग एडवांस बुकिंग के लिए शनिवार को ही लाइन में लग गए थे. लोग टिकट के लिए सड़क पर ही सोते थे और परिवार वाले उनके लिए खाना लेकर आते थे.
दिल्ली के दर्जी, सूरत से कढ़ाई करने वाले स्पेशलिस्ट…
फिल्म 'मुगल ए आजम' को लेकर बताया जाता है कि इसमें किरदारों के जो कपड़े थे वो मामूली नहीं थे. बल्कि उसे सिलने के लिए दिल्ली से दर्जी आए थे और सूरत के कढ़ाई करने वाले स्पेशलिस्टों को बुलाया गया था. वहीं, फिल्म में किरदारों के पास दिखाई गई जूलरी को हैदराबाद के सुनार और मुकुट को कोल्हापुर के किरदारों ने तैयार किया था. इसमें दिखाए गए हथियारों को राजस्थान के लोहरों ने तैयार किए थे. वहीं, जूते आगरा से मंगवाए गए थे.
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मेकर्स हो गए थे कंगाल
इतना ही नहीं, बताया जाता है कि फिल्म 'मुगल ए आजम' में एक युद्ध सीन भी शूट किया गया था, जिसे मेकर्स ने रियल दिखाने के लिए 2000 ऊंट, 4000 घोड़े और 8000 सैनिक बुलाए थे. इसमें कुछ जवान जयपुर रेजिमेंट से उधार लिए गए थे. कहा जाता है कि इसी वजह से फिल्म को बनाने के दौरान मेकर्स कंगाल हो गए थे और बुरी तरह से कर्ज में डूब गए थे. उनके पास सिगरेट खरीदने तक के पैसे नहीं बचे थे.
15 साल तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बनी फिल्म
पृथ्वीराज कपूर की फिल्म 'मुगल ए आजम' को लेकर बताया जाता कि इसके नाम एक अलग ही रिकॉर्ड दर्ज था. मूवी 15 साल तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म गई थी. फिल्म के 9.17 करोड़ टिकट बिके थे. इतना ही नहीं, इसे एक नेशनल अवॉर्ड के साथ ही 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिले थे.