Bigg Boss 18 Biased Decisions: बिग बॉस 18 के ग्रैंड फिनाले में अब बस एक हफ्ता ही बचा है। 19 जनवरी को शो का विनर मिल जाएगा, साथ ही करणवीर-विवियन के बीच शो की ट्रॉफी को लेकर चल रही टशनबाजी का भी फाइनली 'द एंड' हो जाएगा। इसी बीच आपको बिग बॉस के ऐसे बायस्ड फैसले बताते हैं जब पूरा गेम ही एक फैसले ने पलट दिया था।
दिग्विजय राठी का एविक्शन
दिग्विजय राठी शो में काफी मजबूत लग रहे थे लेकिन उन्हें जिस तरह इंटरनल वोटिंग करके घरवालों के वोटों के आधार पर बाहर निकाला गया, उससे ना ही सिर्फ दिग्विजय के फैंस बल्कि शो की ऑडियंस भी काफी नाराज हो गई। बिग बॉस की तरफ से ये एक ऐसा बायस्ड फैसला था, जिसने पूरी गेम को ही पलटकर रख दिया था। श्रुतिका को आसानी से इस पूरी प्रक्रिया में विलेन बना दिया गया था लेकिन मेकर्स ने ऐसा क्यों किया, ये किसी को समझ में नहीं आया।
श्रुतिका-चाहत का एविक्शन
फिनाले से सिर्फ 1 हफ्ते पहले श्रुतिका अर्जुन और चाहत पांडे, दो मजबूत फीमेस कंटेस्टेंट्स को एक ही साथ नॉमिनेट कर दिया गया। जिसका नतीजा ये रहा कि दोनों ही फिनाले के इतने करीब आकर शो के बाहर हो गईं। दोनों को बिग बॉस द्वारा सिर्फ रजत के साथ नॉमिनेट किया गया था। जाहिर है रजत को सोशल मीडिया पर बाहर से काफी सपोर्ट है तो वो एविक्शन से बच गए और बाकी दोनों फीमेल कंटेस्टेंट्स बाहर हो गईं।
ईशा सिंह को नहीं किया गया नॉमिनेट
बिग बॉस का सबसे बड़ा बायस्ड फैसला इस सीजन का ये है कि जब रजत के साथ ही ईशा सिंह ने भी सेम ही गलती की, तो उन्हें सजा के तौर पर नॉमिनेट नहीं किया गया। अगर ईशा और उनकी पूरी टीम भी घर से बेघर होने के लिए नॉमिनेट हो जाती तो शायद श्रुतिका और चाहत का सफर फिनाले के इतने करीब आकर खत्म नहीं होता।
शहजादा-नायरा को दो ही हफ्ते में निकाला
शो की शुरुआत में आए कंटेस्टेंट्स में से शहजादा धामी और नायरा बनर्जी ऐसे कंटेस्टेंट्स थे जो शो में काफी कुछ कर सकते थे लेकिन उन्हें बिग बॉस की तरफ से एक भी मौका नहीं दिया गया और टीवी के बड़े चेहरे होने के बाद भी बहुत जल्दी बाहर कर दिया गया।