करीब दो दशक तक आबिद अली, उर्फ राजू, उर्फ रहमान डकैत का नाम पुलिस फाइलों में गूंजता रहा. भोपाल के कुख्यात ‘ईरानी डेरे’ से चल रही गैंग के इस मास्टरमाइंड का खौफ कई राज्यों तक फैला था. शुक्रवार को रहमान को सूरत क्राइम ब्रांच ने एक गुप्त ऑपरेशन चलाकर लालगेट इलाके से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि भोपाल में छापेमारी के बाद वह सूरत में छिपकर किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहा था. रविवार को उसे भोपाल ले आया गया, जहां कोर्ट ने उसे 17 जनवरी तक पुलिस रिमांड में भेज दिया.
‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर वारदातें
पुलिस के मुताबिक, राजू ईरानी का नेटवर्क 14 राज्यों में सक्रिय था. उसका गैंग फिल्म ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर काम करता था. गैंग के सदस्य कभी फर्जी सीबीआई अधिकारी, कभी सफारी सूट में पुलिस अफसर, तो कभी साधु बनकर बुजुर्गों और भोले-भाले लोगों को लूटते थे. कई बार इसकी गैंग के लोग नकली छापे और धोखाधड़ी के ऑपरेशन करने के लिए सेल्स टैक्स ऑफिसर, कस्टम ऑफिसर, CBI या पुलिस वाले बनकर काम करते थे. हर क्राइम की पहले से बहुत ध्यान से प्लानिंग की जाती थी. रास्ते और भागने के तरीके पहले से तय होते थे. गिरफ्तार होने पर भी गैंग के सदस्य अपने साथियों के नाम या नेटवर्क का स्ट्रक्चर नहीं बताते थे. ठगी, डकैती, जबरन वसूली और हत्या की कोशिश जैसे मामलों में उस पर महाराष्ट्र में सख्त मकोका भी लगा है.
चलाता था छह गैंग
जांच में खुलासा हुआ कि भोपाल की अमन कॉलोनी स्थित ईरानी बस्ती में छह से अधिक ज्यादा गैंग सक्रिय हैं. ये गैंग फर्जी सोना बेचने, जमीन हड़पने और महंगे मोबाइल चोरी करने में माहिर हैं. बताया जाता है कि ये सभी गिरोह राजू ईरानी को रिपोर्ट करते थे. छापेमारी के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव बरामद किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच होनी है.
फर्जी गारंटी पर जमानत
ईरानी गैंग की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 28 दिसंबर को हुई छापेमारी में पकड़े गए 32 आरोपियों में से 14 आरोपी महज 48 घंटे में बाहर आ गए. उन्होंने कोर्ट में फर्जी गारंटर पेश किए, जिनमें से एक व्यक्ति की मौत दो साल पहले ही हो चुकी थी.
विरासत में मिला जुर्म
इस गैंग की जड़ें 1970 के दशक से जुड़ी हैं. पहले राजू के पिता हशमत ईरानी इस गैंग को संभालते थे. 2006 में राजू ने कमान संभाली. ईरानी डेरे के लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य का क्रिमिनल रिकॉर्ड रहा है. इस डेरे में करीब 70 परिवार रहते हैं. गैंग के सदस्य क्राइम करने के लिए पूरे भारत में – दिल्ली, मुंबई, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में – महीनों तक सफर पर रहते हैं. चोरी का सामान ये लोग कूरियर के जरिए वापस लाते थे.
अगर कोई गिरफ्तार हो जाता था तो गैंग का हेड उसकी जमानत करवाता था और उसके परिवार को सपोर्ट भी करता था.
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