केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब महज कुछ दिन बाकी हैं. 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सुबह 11 बजे संसद में देश की अर्थव्यवस्था का लेखा-जोखा पेश करेंगी. यह समय आज की पीढ़ी के लिए नॉर्मल लगता है, लेकिन स्वतंत्र भारत के शुरुआती दशकों में बजट हमेशा शाम 5 बजे आता था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 53 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का अंत हुआ और बजट को एक नए समय पर पेश करने का चलन शुरू हुआ.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शाम 5 बजे बजट पेश किए जाने की इस परंपरा को साल 1999 में यशवंत सिन्हा ने तोड़ा, जो तत्कालीन अटल सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री थे. यशवंत सिन्हा ने पहली बार सदन में सुबह 11 बजे बजट पेश किया. इस परिवर्तन ने न सिर्फ समयसूची बदली, बल्कि आर्थिक नीति निर्माण की प्रक्रिया को भी आधुनिक रूप प्रदान किया.
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अंग्रेजी हुकूमत की याद दिलाता था ये समय
बहुत कम लोग जानते हैं कि ब्रिटिश काल से चली आ रही इस शाम 5 बजे की प्रथा का लिंक यूनाइटेड किंगडन की राजधानी लंदन के टाइम जोन से जुड़ा था. दरअसल, जब भारत में शाम 5 बजते हैं तो उसी समय लंदन की घड़ी में सुई सुबह 11 बजे का इशारा करती हैं. आजादी से पहले शाम पांच बजे पेश होने वाले बजट पर ब्रिटिश अधिकारी भी अपनी राय रख पाते थे. स्वतंत्रता के बाद भी यह रिवाज बरकरार रहा, क्योंकि वित्तीय बाजारों और वैश्विक संवाद की आवश्यकता इसी समय पर निर्भर थी.
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20वीं सदी में बदला इतिहास
हालांकि, 20वीं सदी के अंत तक भारत आर्थिक स्थिति से एक मजबूत देश बन चुका था. तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने तर्क दिया कि सुबह का समय स्टॉक मार्केट, उद्योगपतियों और जनता को बेहतर अवसर देगा, जिससे बजट विश्लेषण और उसे लागू करने में गति आएगी. इस निर्णय ने भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक पटल पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया.
समय परिवर्तन के साथ तारीख में भी बदलाव
समय परिवर्तन के साथ बजट की तारीख में भी क्रांतिकारी बदलाव आया. 2017 तक फरवरी के अंतिम कार्य दिवस पर पेश होने वाला बजट अरुण जेटली ने 1 फरवरी को शिफ्ट कर दिया. इसका कारण बताया गया कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष से पहले सरकार को बजट इंप्लीमेंट करने के लिए काफी समय मिल जाएगा. पहले फरवरी-अप्रैल के बीच केवल सिर्फ 30-35 दिन का ही गैप मिलता था, जिसमें नीतिगत घोषणाओं को लागू करना चुनौतीपूर्ण होता था.
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