New Tax Regime: क्या आपने कभी गौर किया है कि न्यू टैक्स रिजीम के तहत कुछ स्कीम्स में निवेश पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती, लेकिन उन पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे से बाहर है। उदाहरण के लिए, नई कर व्यवस्था के तहत सुकन्या समृद्धि योजना या पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) जैसी योजनाओं से मिलने वाले ब्याज पर कोई कर नहीं लगता। लेकिन इनमें निवेश पर धारा 80C के तहत कटौती नहीं मिलती।
पुरानी में है सुविधा
अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं, तो आप इन योजनाओं में निवेश पर 1.5 लाख/वर्ष तक की कटौती का दावा कर सकते हैं। इसके विपरीत नई रिजीम में निवेश पर टैक्स छूट का लाभ नहीं है। SBI रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि अलग-अलग तरह की बचत या निवेश पर टैक्स लगाने के मामले में नई कर व्यवस्था ने पिछली व्यवस्था से अलग दृष्टिकोण क्यों अपनाया है।
SBI ने बताया कारण
SBI की रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी व्यवस्था में फाइनेंशियल एसेट पर टैक्स इंसेंटिव ‘समग्र स्तर पर बचत को सामान्य रूप से बढ़ाए बिना इक्विटी और दक्षता के सिद्धांत’ का उल्लंघन करते हैं। इसलिए, विभिन्न फाइनेंशियल एसेट पर अलग-अलग टैक्स इनसेंटिव की निरंतरता को फिर से जांचने की आवश्यकता थी। लॉन्ग टर्म मैच्योरिटी वाले फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट के लिए टैक्स ट्रीटमेंट शॉर्ट टर्म और मीडियम टर्म की मैच्योरिटी वाले इंस्ट्रूमेंट से अलग होना चाहिए, क्योंकि ये इंस्ट्रूमेंट सामाजिक सुरक्षा के लिए लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल एक्युम्लेशन को बढ़ावा देने में विशेष भूमिका निभाते हैं।
क्या है उद्देश्य?
उदाहरण के लिए, सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश करने वाले लोगों को न्यू टैक्स रिजीम के तहत इस खाते से अर्जित ब्याज पर छूट मिलती रहेगी और मैच्योरिटी राशि भी टैक्स फ्री होगी। लेकिन, इस योजना में किया गया निवेश धारा 80C के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए पात्र नहीं होगा। इस प्रकार, दीर्घकालिक बचत को प्रोत्साहित करना जारी रहेगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य ही लंबी अवधि की बचत को प्रोत्साहित करना है।
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ऐसे समझें लाभ
दरअसल, मौजूदा वक्त में तुरंत टैक्स बचाने के लिए लोग इस तरह की योजनाओं में निवेश कर देते हैं, लेकिन उसे कायम नहीं रख पाते। सरकार चाहती है कि निवेश लंबे समय तक बना रहे। जब न्यू रिजीम के तहत ऐसी स्कीम्स में निवेश पर तुरंत कोई टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा, तो लोग भविष्य में मिलने वाले लाभ को ध्यान में रखते हुए निवेश बरकरार रखने को प्रोत्साहित होंगे। इसीलिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
न्यू रिजीम अच्छी
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नई व्यवस्था को डिफ़ॉल्ट कर व्यवस्था बनाने का निर्णय व्यक्तियों के लिए कर प्रक्रिया को सरल बनाने के सरकार के उद्देश्य के अनुरूप है। बजट 2025 में सरकार ने न्यू रिजीम को आकर्षक बनाने की कोशिश की है। टैक्स स्लैब में बदलाव हुए हैं और 12 लाख तक की इनकम को टैक्स के दायरे से बाहर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यू रिजीम को अपनाना करदाताओं के लिए एक स्मार्ट कदम होगा। इससे उनके पास अधिक डिस्पोजेबल इनकम होगी।
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