Physical vs Gold Digital : पितृ पक्ष के बाद देश में एक बार फिर से त्योहारों का सीजन शुरू होने जा रहा है। अक्टूबर और नवंबर महीने में नवरात्रि, दशहरा, दुर्गापूजा, धनतेरस और दिवाली समेत कई बड़े त्योहार आने वाले हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इस फेस्टिव सीजन देश में सोने और चांदी के साथ-साथ इसके ज्वेलरी की बिक्री में तेजी आएगी होगी।
दरअसल, भारत में शादी हो या फिर कोई त्योहार सोना और चांदी खरीदने की परंपरा रही है। दरअसल गोल्ड में निवेश को फायदेमंद और बेहतर विकल्प समझा जाता है, लेकिन डिजिटलीकरण के इस दौर में लोगों के पास अब गोल्ड में इन्वेस्टमेंट के कई ऑप्शन मिलने लगे हैं।
इतना ही नहीं धीरे-धीरे लोग फिजिकल गोल्ड (Physical Gold) के बदले डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में भी निवेश करने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि दुकान पर जाकर सोना या फिर इसके गहनों की खरीदारी की जाए या फिर डिजिटल गोल्ड की। साथ सवाल यह भी उठता है कि गोल्ड के किस रुप में निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है ?
गोल्ड में इन्वेस्टमेंट की बात की जाए तो लोगों का पास आज सोने के गहने, सोने के सिक्के के साथ-साथ वर्चुअल यानी डिजिटल गोल्ड के विकल्प भी मौजूद हैं। इसमें गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड, सोवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB) या पेटीएम और फोनपे सोना समेत कई विकल्प हैं।
जानकारों की मानें तो अगर आप पहनने के लिए सोने के गहने खरीदना चाहते हैं तो यह ठीक है। अन्याथा अगर आप फिजिकल गल्ड में निवेश करना चाहते हैं तो आपके लिए सोने के सिक्के और स्लाइस सोने खरीदना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। क्यों एक तो इस पर कोई मैकिंग चार्ज नहीं लगता और यह पूरी तरह से प्योर होता है। इसे बेचने पर बाजार रेट के हिसाब में पैसा मिल जाता है। लेकिन ज्वेलरी के केस में ऐसा नहीं होता।
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इसके साथ ही इन लोगों का कहना है डिजिटल गोल्ड (Digital Gold) में निवेश एक बेहतर विकल्प साबित हो रहा है। यह जहां बाजार में सोने के भाव से जहां सस्ता मिलता है वहीं इसमें रिटर्न मिलने की भी ज्यादा संभावना रहती है। जैसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) स्कीम में कोई व्यक्ति निवेश करता है तो उसे बैंक की ओर से सालाना 2.5 फीसदी का ब्याज मिलता है। इसके साथ ही ऑनलाइन खरीदारी बैंक 50 रुपये प्रति ग्राम का अतिरिक्त डिस्काउंट भी देती है।
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