प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2022 को आधिकारिक तौर पर इस दिन को मनाने की घोषणा की थी. 16 जनवरी की तारीख इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन 2016 में भारत सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया' (Startup India) पहल की शुरुआत की थी. सरकार के इस कदम के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य थे- पहला ये कि देश में नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें. युवाओं की मानसिकता को 'Job Seeker' से बदलकर 'Job Creator' बनाना. दूसरा उद्देशय था जमीनी स्तर पर इनोवेशन को बढावा देने का. सरकार स्टार्टअप कल्चर को केवल दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित न रखकर छोटे शहरों (Tier-2 और Tier-3) तक पहुंचाना चाहती है. और सबसे आखिरी मगर बेहद महत्वपूर्ण उद्देश्य ये था कि भारत को आत्मनिर्भर बनाया जाए, ताकि रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम की जाए और स्वदेशी समाधान तैयार हो.
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स्टार्टअप इंडिया: आंकड़ों का सफर (2016 से 2026)
भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. पिछले 10 वर्षों में यह सफर कुछ इस तरह रहा है:
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कुल रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स:
2016 में: जब यह मिशन शुरू हुआ, तब डीपीआईआईटी (DPIIT) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या मात्र 400-500 के आसपास थी.
2026 में: आज भारत में 145000 से अधिक डीपीआईआईटी मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं. यह 300 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी है.
कितने यूनीकॉर्न (Unicorns) हो गए?
आंकड़ों पर जाने से पहले आपको बता दें कि यूनीकॉर्न वह स्टार्टअप है जिसकी वैल्यूएशन $1 बिलियन यानी करीब 8300 करोड़ रुपये से ज्यादा हो. भारत में वर्तमान में लगभग 115 से 118 यूनीकॉर्न हैं. साल 2021 में भारत में रिकॉर्ड 45 यूनीकॉर्न बने थे, जिसे 'स्टार्टअप का स्वर्ण युग' कहा गया. 2024-25 में 'फंडिंग विंटर' (निवेश की कमी) के कारण यह रफ्तार थोड़ी धीमी हुई, लेकिन प्रॉफिटेबिलिटी पर ध्यान बढ़ा है.
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कितने बंद हो गए?
यह स्टार्टअप दुनिया का कड़वा सच है. वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, 90% स्टार्टअप शुरू होने के पहले 5 वर्षों में बंद हो जाते हैं. भारत में भी लगभग यही स्थिति है. अनुमान के मुताबिक, पिछले 10 सालों में शुरू हुए कुल स्टार्टअप्स में से लगभग 10000 से 15000 बड़े या चर्चित स्टार्टअप्स आधिकारिक तौर पर बंद हो चुके हैं या इनएक्टिव हो गए हैं. और इसके पीछे कैश बर्न (पैसा खत्म होना), खराब बिजनेस मॉडल या बाजार में मांग की कमी जैसे कारण रहे.
भारत के आज 2026 में स्टार्टअप इकोसिस्टम की स्थिति क्या है ?
आज का परिदृश्य 2016 से बहुत अलग है. अब निवेशक केवल ग्रोथ नहीं, बल्कि मुनाफा (Profit) मांग रहे हैं. जोमैटो और पेटीएम जैसे बड़े नाम अब मुनाफे की ओर बढ़ चुके हैं . अब एडटेक (EdTech) या ई-कॉमर्स की जगह AI , स्पेस-टेक (Space-tech) और क्लीन एनर्जी स्टार्टअप्स का बोलबाला है. इसमें महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो लगभग 48% स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक (Director) है.