नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट के युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। भारत में अब बोतलबंद पानी (Bottled Water) की कीमतों में 8 से 11 फीसदी तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। देश के करीब 5 अरब डॉलर के पानी बाजार पर युद्ध का साया ऐसा मंडराया है कि दिग्गज कंपनियों को अपनी कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है।
क्यों लगी पानी की बोतल में महंगाई की आग?
इस बढ़ोत्तरी के पीछे सबसे बड़ा विलेन कच्चा तेल (Crude Oil) है। दरअसल, पानी की बोतल और उसके ढक्कन बनाने के लिए पॉलिमर की जरूरत होती है, जो कच्चे तेल का एक बाय-प्रोडक्ट है। युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे प्लास्टिक की बोतलों की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है।
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पैकेजिंग मटेरियल: पिछले 15 दिनों में बोतल बनाने वाले मटेरियल की लागत में 70% तक का उछाल आया है।
प्लास्टिक की कीमत: बोतल बनाने वाली सामग्री अब ₹170 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो पहले की तुलना में 50% ज्यादा है।
ढक्कन भी हुए महंगे: पानी की बोतल का एक ढक्कन, जिसकी कीमत पहले कम थी, अब दोगुनी होकर 45 पैसे प्रति पीस हो गई है।
बिसलेरी (Bisleri) ने बढ़ाई सबसे ज्यादा कीमतें
मार्केट लीडर बिसलेरी, जिसकी बाजार में एक-तिहाई हिस्सेदारी है, उसने कीमतों में 11% का इजाफा किया है। 12 बोतलों (1 लीटर) वाला बॉक्स पहले 216 रुपये में मिलता था। अब इसी बॉक्स के लिए ग्राहकों को ₹240 चुकाने होंगे। बिसलेरी के अलावा पार्ले एग्रो के बैली और क्लियर प्रीमियम वॉटर जैसे ब्रांड्स ने भी अपने दाम 8 से 11 फीसदी तक बढ़ा दिए हैं।
टैक्स की राहत भी हुई बेअसर
हैरानी की बात यह है कि सितंबर में सरकार ने बोतलबंद पानी पर जीएसटी (GST) को 18% से घटाकर 5% कर दिया था। उम्मीद थी कि इससे पानी सस्ता होगा, लेकिन युद्ध की वजह से बढ़ी लागत ने टैक्स में मिली इस राहत को पूरी तरह डकार लिया है। अब ग्राहकों को सस्ता पानी मिलने के बजाय ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
इन कंपनियों पर भी दिखेगा असर:
सिर्फ बिसलेरी ही नहीं, बल्कि कोका-कोला (Kinley), पेप्सी (Aquafina), रिलायंस (Campua) और टाटा (Himalayan/Copper Water) जैसी दिग्गज कंपनियों के बीच चल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद, बढ़ती लागत के कारण जल्द ही अन्य ब्रांड्स भी अपनी कीमतों में संशोधन कर सकते हैं।