Income tax free state: निर्मला सीतारमण ने 01 फरवरी 2023 को देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था क्योंकि उन्होंने लगातार अपना 5वां राष्ट्रीय बजट पेश किया था। टैक्स स्लैब की संख्या छह से घटाकर पांच की गई। टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। व्यक्तिगत आयकर में उच्चतम कर की दर लगभग 47 से घटाकर 39 प्रतिशत कर दी गई है। हालांकि, राष्ट्र जहां कर भुगतान पर की जा सकने वाली बचत की गणना करने में व्यस्त है वहीं, सिक्किम के लोगों को सीतारमण और उनके जटिल आंकड़ों की जरा भी परवाह नहीं है। इसके पीछे के कारण है, जो आपको पता होगा चाहिए।
सिक्किम एक ऐसा राज्य है जिसके मूल निवासियों को आयकर के भुगतान से छूट प्राप्त है। 13 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के कारण सिक्किम के व्यापारिक समुदाय या वामपंथियों को भी छूट की सुविधा दी गई थी। अब सिक्किम पूर्ण form-60 के तहत आने वाला राज्य है।
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पिछले साल तक सिक्किम 6.58 लाख की आबादी वाला एक छोटा सा राज्य कहा जाता था। अब हो सकता है संख्या कुछ आगे पीछे हुई हो। हालांकि, बड़ी बात यह है कि वहां के लोगों की आय भले ही एक करोड़ रुपये हो, सरकार उनसे एक रुपये भी वसूल नहीं करती।
सिक्किम को मिली यह छूट?
इसका कारण जानने के लिए आपको भारत के इतिहास के बारे में जानना होगा। साल 1950 में भारत ने सिक्किम के साथ शांति समझौता किया था। उसके अधीन सिक्किम भारत के संरक्षण में आ गया। फिर 1975 के समय में इसे पूरी तरह से मर्ज कर दिया गया। सिक्किम में चोग्याल का शासन चल रहा था। उन्होंने 1948 में सिक्किम इनकम टैक्स मैनुअल जारी किया और जब इसका भारत में विलय हुआ तो एक शर्त थी कि सिक्किम के लोगों को इनकम टैक्स से छूट मिलेगी। आपको बता दें कि आयकर अधिनियम की धारा 10 (26एएए) के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को छूट मिलती है।
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