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Explainer: लाखों नई नौकरियां, यूरोप में एक्सपोर्ट… जानें, मदर ऑफ ऑल डील्स से भारत को क्या-क्या फायदे?

यूरोपीय संघ की अध्यक्ष ने भारत के साथ होने वाले व्यापार समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया है. जानें कैसे 2 अरब लोगों का यह बाजार यूरोप को देगा ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’.

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भारत और यूरोपीय यून‍ियन के बीच हाल ही में हुई ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (Mother of All Deals) ने वैश्विक व्यापार जगत में तहलका मचा दिया है. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने 20 जनवरी 2026 को दावोस (स्विट्जरलैंड) में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान जो बयान दिया, उसने वैश्विक व्यापार की दिशा बदल दी है. उन्होंने भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मदर ऑफ ऑल डील्स (सभी समझौतों की जननी) करार दिया है. माना जा रहा है क‍ि यह डील 2 अरब लोगों का एक एकीकृत बाजार तैयार करेगी और साथ ही इससे नौकर‍ियों में इजाफे की उम्‍मीद भी है.

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क्‍या अमेरिका और चीन से आगे निकल जाएगा भारत?

ये तो देखा जा सकता है क‍ि अभी अमेरिका की व्यापारिक नीतियां (खासकर ट्रंप प्रशासन के तहत) क‍ितनी अनिश्चित हैं और चीन के साथ यूरोप के संबंध भी तनावपूर्ण ही हैं. ऐसे में भारत जैसी सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ सबसे पहले ‘व्यापक समझौता’ करके यूरोपीय कंपनियां भारतीय बाजार में अमेरिकी और चीनी कंपनियों से पहले अपनी पकड़ मजबूत कर लेंगी.

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सप्लाई चेन पर नियंत्रण:
यूरोप को भारत के रूप में एक विश्वसनीय ‘डेमोक्रेटिक पार्टनर’ मिलेगा. सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में यूरोप को भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाने का पहला मौका मिलेगा.

टैरिफ में भारी छूट:
इस डील के बाद यूरोपीय ऑटोमोबाइल (कारें), वाइन और स्पिरिट्स पर भारत में लगने वाली भारी ड्यूटी कम हो जाएगी, जिससे यूरोपीय ब्रांड्स को भारतीय बाजार में शुरुआती बढ़त मिलेगी.

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भारत के लिए क्या है खास?

रक्षा ढांचा (Defense Framework): इस डील के साथ एक ‘सुरक्षा और रक्षा साझेदारी’ (SDP) पर भी हस्ताक्षर होंगे, जिससे भारतीय फर्मों को यूरोप के €150 बिलियन के ‘सेफ’ (SAFE) कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिलेगा.

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वीजा और मोबिलिटी: भारतीय प्रोफेशनल्स और कुशल कामगारों के लिए यूरोप में काम करने के नियम आसान होंगे.

एक्सपोर्ट बूस्ट: भारत के कपड़ा (Textiles), जूते और रत्नों के निर्यात को यूरोप के 27 देशों में टैक्स-फ्री एंट्री मिलेगी.

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बता दें क‍ि उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 25-27 जनवरी को भारत के दौरे पर रहेंगे और गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे.

नौकर‍ियों की होगी बार‍िश :
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच होने जा रही ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ (India-EU FTA) भारत के जॉब मार्केट के लिए एक ऐस मोड़ साबित होने वाली है ज‍िसमें लाखों डायरेक्‍ट और इनडायरेक्‍ट नौकरियां पैदा हो सकती हैं. खासतौर से ऐ क्षेत्र जहां श्रम आधार‍ित काम यानी हाथों से काम हो रहे हैं, जैसे क‍ि टेक्सटाइल और लेदर, जेम्स एंड ज्वैलरी आद‍ि .

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इसके अलावा स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए जैसे क‍ि आईटी और डिजिटल सर्विसेज, हेल्थकेयर सेक्‍टर्स में भी रोजगार के मौके बढ़ेंगे. यूरोपीय कंपनियां चीन से अपनी निर्भरता हटाकर भारत को अपना नया बेस बना रही हैं. इसल‍िए यूरोपीय ऑटो दिग्गज (जैसे मर्सिडीज, फॉक्सवैगन) भारत में अपने कंपोनेंट्स बनाने की यूनिट्स बढ़ाएंगे. इससे मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरों और टेक्नीशियन्स की भारी मांग निकलेगी.

यूरोप अब दवाओं के लिए भारत को अपनी मुख्य सप्लाई चेन बना रहा है. रेगुलेटरी नियमों में ढील मिलने से फार्मा सेक्टर में आरएंडडी (R&D) और प्रोडक्शन से जुड़ी हजारों नौकरियां आएंगी.

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दूसरी ओर भारत यूरोप का प्रमुख ‘ग्रीन एनर्जी पार्टनर’ बनने जा रहा है. इसलिए सोलर, विंड और हाइड्रोजन ऊर्जा संयंत्रों में विशेषज्ञों की जरूरत होगी. भारत के टेक पार्कों में हाई-एंड रिसर्च की नौकरियां बढ़ेंगी.

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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