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दोस्ती पक्की पर भरोसे की कमी, Donald Trump के इस बयान से टूट सकता है Elon Musk का दिल

डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क एक-दूसरे के काफी करीब हैं। मस्क ने चुनावी अभियान में ट्रंप का साथ दिया था। राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ट्रंप ने मस्क को उस साथ का इनाम देते हुए सरकार का हिस्सा बनाया। हालांकि, इसके बावजूद डोनाल्ड ट्रंप को एलन मस्क पर पूरी तरह भरोसा नहीं है।

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एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने खास सहयोगी और दोस्त एलन मस्क पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर कर दिया है कि सरकार में मस्क की भूमिका सीमाओं से बंधी है। दरअसल, यह माना जाता रहा है कि मस्क अमेरिकी सरकार के हर फैसले और नीति में शामिल रहते हैं, लेकिन ट्रंप ने साफ करने का प्रयास किया है कि ऐसा कुछ नहीं है और वह रक्षा से जुड़े मामलों में मस्क पर भरोसा नहीं कर सकते। क्योंकि उनके व्यापारिक हित चीन से जुड़े हुए हैं।

रिपोर्ट्स को किया खारिज

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि रक्षा योजनाओं को उनके सलाहकार और निकटतम सहयोगी एलन मस्क के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि प्रतिद्वंद्वी देशों में उनके व्यापारिक हित जुड़े हुए हैं। ट्रंप ने अपने ओवल ऑफिस में एक नए लड़ाकू विमान के डेवलपमेंट पर आयोजित बैठक के दौरान यह बात कही। साथ ही उन्होंने उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि मस्क को यह बताया जाएगा कि अमेरिका चीन के साथ काल्पनिक युद्ध कैसे लड़ेगा।

मस्क को देशभक्त भी बताया

यूएस प्रेसिडेंट ने कहा कि चूंकि एलन मस्क का चीन में कारोबार है, इसलिए वे उस देश के प्रभाव के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने एलन मस्क की देशभक्त के रूप में प्रशंसा भी की। उन्होंने बताया कि मस्क ने शुक्रवार की सुबह सरकारी खर्च घटाने पर चर्चा के लिए पेंटागन का दौरा किया था। वह सरकारी दक्षता विभाग के माध्यम से अच्छा काम कर रहे हैं।

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टेस्ला के लिए चीन बड़ा बाजार

ऐसे आरोप थे कि मस्क को चीन के संबंध में गोपनीय जानकारी प्राप्त हुई थी। एलन मस्क की टेस्ला के लिए अमेरिका के बाद चीन सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में चीन उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। शायद यही वजह है कि खासकर रक्षा से जुड़े मामलों में डोनाल्ड ट्रंप को अपने दोस्त पर भरोसा नहीं है। अमेरिका ने चीन पर टैरिफ लगाया है और चीन ने भी जवाब में अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगा दिया है. इससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।

टेस्ला की बिक्री में गिरावट

टेस्ला इस समय मुश्किल दौर से गुजर रही है. चीन में कंपनी की बिक्री घटी है. इसके अलावा, यूरोप में भी उसके सेल्स फिगर खराब हुए हैं. जर्मनी और फ्रांस में टेस्ला कारों की बिक्री में बड़ी गिरावट आई है। जनवरी 2025 के आंकड़े कंपनी को परेशान करने वाले हैं। टेस्ला की यूरोपीय देश स्कैंडिनेविया में बिक्री फरवरी में एक साल पहले की तुलना में तेजी से गिरी है, जिससे इसकी बाजार हिस्सेदारी कम हो गई। टेस्ला की कारें 2023 और 2024 में नॉर्वे, स्वीडन और डेनमार्क में सेल्स चार्ट में सबसे ऊपर थीं। जबकि इस साल वह फॉक्सवैगन और टोयोटा जैसे नए मॉडल लाइनअप वाले प्रतिद्वंद्वियों से पीछे रह गई हैं। फरवरी में स्वीडन में कुल 613 नई टेस्ला कारों का रजिस्ट्रेशन किया गया, जो पिछले साल की तुलना में 42% कम है। इसी तरह, नॉर्वे और डेनमार्क में टेस्ला कारों का रजिस्ट्रेशन 48% घट गया है।

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मुश्किल में फंस जाएगी कंपनी

नॉर्वे, जहां लगभग सभी नई कारें पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं, कुल कार बिक्री में टेस्ला की हिस्सेदारी वर्ष-दर-वर्ष घटकर 8.8% रह गई है। जबकि 2024 में यह आंकड़ा 18.9% और 2023 में 20% था। वहीं, चीन में भी टेस्ला की कारों की बिक्री घटी है। अमेरिका के बाद चीन टेस्ला के लिए सबसे बड़ा बाजार है। वहां अब स्थानीय कंपनियां एलन मस्क की टेस्ला को कड़ी टक्कर दे रही हैं। अगर इस तरह से मस्क के प्रति गुस्सा टेस्ला के विरोध के रूप में सामने आता रहा, तो कंपनी बड़ी मुश्किल में फंस जाएगी।

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