मोदी सरकार ने साल 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखा है. ओर इस लक्ष्य को पूरा करने में इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की अहम भूमिका होगी. इसे देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को इस बार बजट से कुछ खास उम्मीदें हैं. पिछले बजट में सरकार ने इस सेग्मेंट को 11.11 लाख करोड़ खर्च करने का लक्ष्य रखा था. इस बार उम्मीद है कि इसे बढ़ाकर 13 से 15 लाख करोड़ किया जाएगा. जितना ज्यादा पैसा सड़कों, पुलों और रेलवे पर खर्च होगा, उतना ही सीमेंट, स्टील और लेबर की मांग बढ़ेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
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रेलवे का कायाकल्प
इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर चाहता है कि 400-500 नई 'वंदे भारत' और 'अमृत भारत' ट्रेनों के लिए विशेष फंड जारी किया जाए. साथ ही, पुराने रेलवे स्टेशनों को एयरपोर्ट जैसा बनाने के काम में तेजी आए. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के विस्तार और अन्य रूट्स (जैसे दिल्ली-वाराणसी) के लिए बड़े ऐलान की उम्मीद है.
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'पीएम गति शक्ति' और लॉजिस्टिक्स
भारत में सामान ढोने की लागत (Logistics Cost) अभी भी काफी ज्यादा है. सेक्टर चाहता है कि मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क बनाने के लिए और अधिक पैसा दिया जाए. सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का खर्च GDP के 14% से घटाकर 8% पर लाने का लक्ष्य रखा जा सकता है.
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ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर (Green Energy)
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने और सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए बड़ी सब्सिडी की मांग भी की जा रही है. इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि हाइड्रोजन फ्यूल और रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए 'सस्ता कर्ज' मिलेगा.
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शहरों का विस्तार और अर्बन प्लानिंग
एक मांग ये भ्ीा है कि बड़े शहरों के ट्रैफिक को कम करने के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स और 'स्मार्ट सिटी' मिशन के अगले चरण के लिए भारी निवेश हो.
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आम आदमी पर इसका क्या असर होगा ?
अगर बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलता है, तो नई सड़कें और ट्रेनें आपका समय बचाएंगी. कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लाखों नई नौकरियां निकलेंगी. और जब सामान का ट्रांसपोर्ट सस्ता होगा, तो फल-सब्जियां और अन्य सामान के दाम भी कम होंगे.