नई उम्मीद और चुनौतियों के साथ हम लोग 2026 में दाखिल हो चुके हैं . हर समझदार इंसान कैलेंडर पलटने के साथ अपने लिए कुछ-न-कुछ टारगेट तय करता है…वो Short Term भी हो सकता है और Long Term भी. उम्मीद है 2026 के लिए आपका भी टारगेट सेट हो चुका होगा . लेकिन, नए साल में ज्यादातर लोगों के टारगेट को जो फैक्टर सबसे अधिक प्रभावित करता दिख रहा है- वो है जनरेटिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस. अगर नौकरीपेशा हैं…तो बहुत हद तक आपका प्रमोशन-इंक्रीमेंट और नौकरी इस बात पर निर्भर करेंगे कि आपने AI का कितना और किस तरह से इस्तेमाल किया ? अगर बिजनेसमैन हैं – तो आपका Profit-Loss एआई के इस्तेमाल से प्रभावित होगा . अगर किसान है तो भी आपकी उत्पादकता और कमाई को एआई फैक्टर प्रभावित करेगा … किचेन से ट्रांसपोर्ट तक AI पूरी तस्वीर बदल देगा . एआई ने बहुत हद तक शिक्षा के क्षेत्र को भी प्रभावित किया है – ऐसे शिक्षकों की जरूरत दिनों-दिन कम होती जा रही है, जो किताब या नोट्स देख कर पढ़ाते थे. तथ्यों को रटने की सलाह देते थे… अब ऐसे शिक्षकों की जरूरत है – जो छात्रों के बेसिक कॉन्सेप्ट बताएं और इस बात के लिए तैयार करें कि जनरेटिव AI की मदद से तथ्यों को किस तरह खोजा जा सकता है … AI की मदद से किस तरह कम से कम समय में ईमेल ड्राफ्ट किया जा सकता है…प्लानिंग की जा सकती या प्रेजेंटेशन तैयार किया जा सकता है. सवाल ये भी है कि AI नौकरी खाएगा या नई नौकरियां देंगा ? अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार में किस तरह की हलचल मचाएगा एआई ?

AI के ‘धुरंधर’ बनेंगे 2026 के ‘सिकंदर’!

एक अरब 40 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत में समाज, सिस्टम और सरकार तीनों AI की अहमियत अच्छी तरह समझ रहे हैं . इसका सबसे बड़ा सबूत ये है कि नए साल में तीसरी कक्षा से ही छात्रों को AI सिखाया जाएगा . ये सब नई शिक्षा नीति 2020 के तहत हो रहा है… 6वीं क्लास की किताब में AI को प्रोजेक्ट के तौर पर जोड़ा गया है . NCERT ने 11वीं और 12वीं के लिए किताबें तैयार करने के मिशन में जुट चुका है…दुनिया जिस रफ्तार से बदल रही है उसमें बिना AI और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की ट्रेनिंग के छात्रों का भविष्य नहीं बन सकता है. ऐसे में छात्रों को प्राइमरी क्लास से ही एआई की परिचय कराने की इस साल से शुरुआत हो रही है .

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी जिंदगी में तेजी से जगह बनाता जा रहा है… इंटरनेट की ताकत से लैस स्मार्टफोन ने जनरेटिव एआई को इंसान की हाथों में ला दिया है और आज की तारीख में कोई भी इंसान AI का हाथ पकड़ कर तेजी से तरक्की की सीढ़ियां चढ़ सकता है. अपनी Speed, Skill, Efficiency कई गुना बढ़ा सकता है. ऐसे में हमारे देश में भी इस साल से तीसरी क्लास से स्कूलों में AI की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी हो चुकी है . 2026-27 से तीसरी कक्षा से सभी स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटेशनल थिंकिंग की पढ़ाई लागू करने की योजना है…जो पूरी तरह National Educational Policy 2020 के सुधारों के हिसाब से है… NCERT ने क्लास 6 की Vocational Education में AI का चैप्टर जोड़ा है…जिसका मकसद है छात्रों को एआई की प्रैक्टिकल जानकारी देना .

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स्कूली पढ़ाई में शुरुआती दौर से ही बच्चों को अगर एआई के बारे में बताया या सिखाया जाएगा … तो इससे उनके भीतर तकनीक के बारे में सोचने और काम करने की क्षमता विकसित होगी. साथ ही 11वीं और 12वीं क्लास में छात्रों को एआई के बारे में और विस्तार से पढ़ाया जाएगा … Skilling for AI Readiness नाम से एक राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरू किया गया है.
जिसका मकसद है 6वीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं के बीच AI को लेकर जागरूकता बढ़ाना… साथ ही टीचरों को भी नई तकनीक से रू-ब-रू कराना . सिर्फ स्कूल और कॉलेज में भी एआई की पढ़ाई नहीं हो रही है. पुलिस भी अपराधियों को पकड़ने और क्राइम रेट कम करने के लिए एआई की मदद ले रही है … पुलिसकर्मियों को भी एआई की ट्रेनिंग दी जा रही है - जिससे क्राइम रेट को कम किया जा सके .

हर सेक्टर में एआई बदलाव की क्रांतिकारी स्क्रिप्ट तैयार कर रहा है. नौकरियों के स्वरूप में बदलाव कर रहा है. ऐसे में छात्रों को शुरू से एआई के बारे में जानकारी देना समय की मांग है…स्कूल-कॉलेज में सिलेबस को भी इतना डायनेमिक बनाने की जरूरत है-जिससे बदलावों को तेजी से कोर्स का हिस्सा बनाया जा सके . छात्रों में ऐसी खास Skill विकसित करने की जरूरत है-जिससे वो हमेशा प्रयोग और बदलाव के लिए तैयार रहे..एक ऐसा व्यवहारिक रास्ता निकालने की भी जरूरत है - जिसमें हर उम्र के लोगों को तकनीक में आते बदलावों के हिसाब से समय-समय पर अपडेट और अपग्रेड किया जा सके .

कुछ दिनों पहले की बात है. मैं एक Engineering aspirant स्टूडेंट से मिली…बातचीत में उसकी Future Planning के बारे में पूछा…उसका जवाब था – अगर IIT, NIT या किसी अच्छे इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में एडमिशन हो भी गया तो क्या फर्क पड़ता है? ये भी तो हो सकता है कि 4 साल में मेहनत से इंजीनियरिंग की जो पढ़ाई की…वो पास आउट होने के तक आउटडेटेड हो जाए . बात में गंभीरता और दम है. इस बात की कोई गारंटी नहीं की आज की तारीख में छात्रों को जो पढ़ाया जा रहा है – वो कल की तारीख में काम आए . मतलब, छात्र चाहे जिस स्ट्रीम में पढ़ाई कर रहे हों – उन्हें खासतौर से दो बातों का ध्यान रखना होगा…AI के इस्तेमाल में धुरंधर बनना होगा और दूसरा खुद को हमेशा स्टूडेंट बनाए रखने यानी नया सीखने के लिए तैयार रखना होगा . कुछ हफ्ते पहले दुनिया के दिग्गज टेक बिजनेस टायकून एलन मस्क ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि अगले 10–20 वर्षों में AI और रोबोटिक्स इतना आगे बढ़ जाएंगे कि इंसानों के लिए काम करना जरूरी नहीं रहेगा . मतलब, इंसान के सामने दफ्तर जाने की टेंशन नहीं रहेगी … बिल्डिंग से रोड कंस्ट्रक्शन के काम में हाड़-मांस के इंसान की जगह लोहे और AI Algorithm से चलने वाले रोबोट काम करेंगे…गाड़ियां चलाने के लिए ड्राइवर की जरूरत नहीं होगी-क्योंकि ड्राइवर लेस गाड़ियां बाजार में मौजूद हैं. मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक में जनरेटिव AI और रोबोट्स के मेल से हर सेक्टर में काम-काज को ऑटोमेट करने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है… 2026 में हमारे देश के अलग-अलग सेक्टर्स में इंसान की जगह रोबोट की एंट्री दिखनी तय है.दफ्तरों के वर्क कल्चर में जनरेटिव एआई बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बढ़ने के चांस हैं .

भारतीय रेलवे रोजाना करीब साढ़े तेरह हजार ट्रेने चलाती है - जिनमें करीब ढाई करोड़ लोग सफर करते हैं . ऐसे में रेलवे ट्रेनों के बेहतर संचालन…यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है..रेल किचन में सफाई की निगरानी के लिए AI का इस्तेमाल हो रहा है…इससे गंदगी या नियमों की अनदेखी पर तुरंत अलर्ट भेजा जाता है…2025 में महाकुंभ के दौरान भी प्रयागराज में क्राउड मैनेजमेंट के लिए रेलवे ने AI और तकनीक का बहुत बेहतरीन इस्तेमाल किया . इसी तरह एविएशन सेक्टर से लेकर रोड-ट्रांसपोर्ट सिस्टम में भी सर्विस को सुविधाजनक बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल हो रहा है . भारत के हर सेक्टर में काम को आसान बनाने और जल्द पूरा करने के लिए सरकार के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है..तो कंपनियां भी चाहती हैं कि कर्मचारी तेजी से नई तकनीक का इस्तेमाल करें .

लखनऊ के इस रेस्टोरेंट में दो साल पहले दो रोबोट को इंसानों की जगह वेटर की ड्यूटी पर लगाया गया … रोबोट वेटर ठीक उसी तरह काम कर रहे थे- जैसे कोई इंसान वेटर अपने ग्राहकों की पसंद-नापसंद का ध्यान रखता है . ह्यूमनॉइड रोबोट तेजी से उन सभी क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने लगे हैं - जहां कल तक सिर्फ इंसान काम करते दिखते थे. ऐसे में अगले कुछ वर्षों में दफ्तरों के भीतर इंसान कम और रोबोट अधिक दिखें तो हैरानी नहीं होनी चाहिए… हालांकि, अभी ये आशंका भी जताई जा रही है कि रोबोट का इस्तेमाल सिर्फ उन सेक्टर्स तक सीमित रहेगा - जहां गलतियों से नुकसान के चांस कम है .

एक अरब 40 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत में साल 2024 तक फैक्ट्रियों में 52 हजार से अधिक औद्योगिक रोबोट ऑपरेशनल थे . ऐसे में भारत की फैक्ट्रियों में अभी ह्यूमनॉइड रोबोट की संख्या बहुत कम है … लेकिन, नए साल में देश की फैक्ट्रियों की लेबर फोर्स में ह्यूमनॉइड रोबोट की संख्या बढ़नी तय है . जिस रफ्तार से दुनिया में बेहतरीन AI रोबोट तैयार करने का काम हो रहा है - उससे आने वाले वर्षों में फैक्ट्री, वेयरहाउस, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में ज्यादातर काम ह्यूमनॉइड रोबोट करते दिखेंगे.अकाउंटिंग, लीगल डॉक्यूमेंट ड्राफ्टिंग, कोडिंग, कस्टमर सपोर्ट, ट्रांसलेशन, ग्राफिक्स डिजाइनिंग, एनिमेशन जैसे काम का 75 फीसदी से अधिक हिस्सा रोबोट करते दिख सकते हैं . पर्सनलाइज्ड AI ट्यूटर के रोल में भी ह्यूमनॉइड रोबोट का बड़े पैमाने पर दिखना तय है . दुनियाभर में सस्ता से सस्ता प्रोडक्ट बनाने की होड़ लगी है . कम समय में अधिक प्रोडक्शन बड़ी चुनौती है … ऐसे में हमारे देश की कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोट तेजी से अपनाने में जुटी हैं. मैन्युफैक्चरिंग से सर्विस सेक्टर तक…बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन से लेकर एजुकेशन सेक्टर तक में जनरेटिव AI की शक्ति से लैस ह्यूमनायड रोबोट मोर्चा संभालने लगे हैं .

नए साल में भारत के दफ्तरों और फैक्ट्रियों में जनरेटिव एआई बड़े पैमाने पर प्रयोग के दौर से निकलकर सामान्य कामकाज का हिस्सा बन चुका रहेगा … कंपनियां अपनी लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए जनरेटिव AI और रोबोट को शामिल करने की राह पर बढ़ती दिखेंगी . ऐसे में साल 2026 में नौकरियों में वही धुरंधर साबित होगा – जो बहुत स्मार्ट तरीके से AI का इस्तेमाल करेगा . आने वाले समय में ऐसे मैनेजरों की डिमांड बढ़ेगी–जो इंसान की जगह मशीनों से काम लेने में एक्सपर्ट होंगे . जनरेटिव एआई से होने वाली गलतियों को पकड़ने में धुरंधर होंगे . नए साल में घरेलू कामकाज में भी धीरे-धीरे रोबोट्स की एंट्री होने लगेगी. कई कंपनियां ऐसे रोबोट्स पर काम कर रही हैं-जो किचन में खाना बनाने से लेकर घर की साफ-सफाई जैसे काम कर सकें . जनरेटिव AI से लैस ऐसे रोबोट्स को पर्सनलाइज्ड जरूरतों के हिसाब से कुछ घंटे के डाटा के साथ इस तरह तैयार किया जाएगा… जिससे ह्यूमनॉइड रोबोट अपने मालिक के मूड-मिजाज और जरूरतों के हिसाब से एक आज्ञाकारी सेवक की तरह बिना थके…बिना रुके काम कर सके. बड़े लैंग्वेज मॉडल्स से ऐसे तेज-तर्रार रोबोट्स तैयार किए जा रहे हैं–जो थोड़ी ट्रेनिंग में ही इंसानी इंस्ट्रक्शन को आसानी से समझ सकें यानी 2026 में घरेलू जिंदगी में भी धीरे-धीरे घरेलू जिंदगी में रोबोट्स की एंट्री तय मानी जा रही है.

2026 में ऐसे रोबोट सबसे ज्यादा चर्चा में रहेंगे - जो घरेलू कामकाज को इंसानों की तरह करते दिखेंगे . दुनिया की कई दिग्गज टेक कंपनियां वर्षों से रोबोट को घरेलू कामकाज सिखा रही हैं . जनरेटिव AI के दौर में ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट विकसित किए जा रहे हैं - जो इंसानों की तरह ही कमांड लें और पलक झपकते काम निपटा दें . चैटजीपीटी जैसे मॉडल रोबोट में डाल कर कम ट्रेनिंग में ज्यादा स्मार्ट बनाने का प्रयोग चल रहा है… कुछ घंटों का डाटा फीट कर ह्यूमनॉइड रोबोट को पर्सनलाइज इस्तेमाल के लिए इस तरह से ट्रेंड किया जा रहा है - जिससे Voice Command पर कपड़ा फोल्ड करने से लेकर कचरा अलग करने जैसा काम भी कर सके .

माना जा रहा है कि जल्द ही ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार में उपलब्ध होंगे - जो ओवन में पीजा डालने से लेकर रेफ्रिजरेटर से कोल्ड ड्रिंक निकालने और मेहमानों के सामने अदब से सर्व करते दिख सकते हैं. किचन में खाना बनाने से बर्तन की सफाई तक का काम रोबोट संभालते दिख सकते हैं . कोरोना महामारी के बाद से ऐसे रोबोट बनाने का काम तेजी से बढ़ा…जो छोटे-मोटे घरेलू कामकाज में मददगार साबित हों..लेकिन, भारत जैसे देश में ह्यूमनॉइड रोबोट्स का घरेलू इस्तेमाल तेजी से बढ़ने की संभावना को एक्सर्ट्स शक की नजरों से देख रहे हैं. आज की तारीख में बिना ड्राइवर की गाड़ियां सड़कों पर दौड़ने लगी हैं. पर्सनल ट्यूटर के रूप में भी रोबोट मोर्चा संभाल रहा है.सेहत के मोर्चे पर लोगों को फिट रखने में भी AI दमदार भूमिका निभा रहा है … कैंसर से जंग में भी AI नए हथियार के रूप में सामने आया है - जो इलाज में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है .

अमेरिका से लेकर चीन तक हर तरह के ह्यूमनॉइड रोबोट को बनाने का काम तूफानी रफ्तार से जारी है. आज की तारीख में टेस्ला के Optimus ह्यूमनॉइड रोबोट की कीमत 20 से 30 हजार डॉलर यानी 18 से 27 लाख रुपये के बीच है. चाइना हर तरह के ह्यूमनॉइड रोबोट बना रहा है - जिसकी कीमत 5 लाख से 25 लाख के बीच है .

एक स्टडी के मुताबिक, 2050 तक पूरी दुनिया में 30 करोड़ से एक अरब तक ह्यूमनॉइड रोबोट काम करते दिख सकते हैं . बैंक ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2060 तक दुनिया भर में ह्यूमनॉइड रोबोट की संख्या तीन अरब पहुंच सकती है…तब दुनिया की आबादी 10 अरब से अधिक होने का अनुमान है . मतलब, हर तीन इंसान पर एक रोबोट इस कायनात में तरह- तरह का किरदार निभाता दिख सकता है .

भारत जैसे विशालकाय आबादी वाले देश में घरेलू कामकाज में रोबोट्स की एंट्री की प्रक्रिया धीमी दिख सकती है. इसकी तीन वजह है. पहली, ह्यूमनॉइड रोबोट्स अभी बहुत महंगे हैं. दूसरी, ह्यूमनॉइड रोबोट पर अभी लोगों का उतना भरोसा नहीं जमा है. तीसरा, लोगों में डर बना हुआ है कि इस बात की क्या गारंटी है कि पैर का मसाज करते-करते कहीं गर्दन दबाने पर रोबोट न उतारू हो जाए . एआई का एक और इस्तेमाल नए साल में दिख सकता है . कंपनियां दफ्तरों में अपने कामचोर कर्मचारियों की पहचान के लिए एआई की मदद ले सकती हैं…AI की मदद से आसानी से पता लगाया जा सकता है कि कर्मचारी कंप्यूटर के सामने सिर्फ बैठा रहता है या कुछ काम भी करता है…माउस क्लिक, टाइपिंग स्पीड और स्कीन मूवमेंट के डेटा एनालिसिस के जरिए पता किया जा सकता है. मतलब, 2026 में एआई सिर्फ काम की स्पीड ही नहीं बढ़ाएगा बल्कि कामचोर कर्मचारियों की पहचान करने में भी मैनेजमेंट की मदद करेगा . भारत के एक कृषि प्रधान देश है. हमारी आबादी में हर दूसरे व्यक्ति की रोजी-रोजगार खेती पर टिकी है. एआई तेजी से खेती की तस्वीर बदल रहा है. मामूली लागत पर किसान खेतों में एआई का इस्तेमाल करने लगे हैं… इससे प्रति एकड़ लागत कम पड़ रही है और उत्पादन में बढ़ोतरी का दावा किया जा रहा है. दरअसल, खेतों में एआई के इस्तेमाल से किसानों को हवा की गति, बारिश, तापमान, नमी और मिट्टी की सेहत की जानकारी मिल जाती है . मिट्टी और मौसम के मिजाज का विश्लेषण कर एआई किसान को बता देता है कि कौन सी फसल ठीक रहेगी…बुआई-कटाई के लिए कब का समय ठीक रहेगा. अच्छी पैदावार के लिए कब और कितना खाद-पानी देना है? अगर AI कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया जाए खेत की लगातार निगरानी की जा सकेगी..साथ ही फसल में बीमारी या कीट लगने का अलर्ट भी किसान को तुरंत मिल जाएगा .

भारत की आबादी में हर दूसरे शख्स की जिंदगी खेती-किसानी के सहारे आगे बढ़ रही है. साल 2047 तक भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है … जिसका एक पैमाना प्रति व्यक्ति आय भी है . भारत में किसानों की आय में हिस्सेदारी बहुत कम है…ऐसे में खेतों में तकनीक और एआई का इस्तेमाल कर ज्यादा पैदावार हासिल करने का प्रयोग जारी है .

जम्मू-कश्मीर में भी किसान पारंपरिक खेती से निकलते हुए तकनीक का इस्तेमाल कर खेतों में क्रांति कर रहे हैं . आकार में दिनों-दिन छोटे होते खेतों में अत्याधुनिक तकनीक और एआई से मिली जानकारी के आधार पर उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं . यूपी के अलीगढ़ में स्ट्रॉबेरी उगाने वाले किसानों हों या फिर संभल में आलू की खेती करने वाले किसान…नई तकनीक के जरिए खेतों में पैदावार और अपनी कमाई दोनों बढ़ाने में जुटे हैं .

भारत के कृषि क्षेत्र पर नज़र रखने वाले विशेषज्ञों की सोच है कि एआई की मदद से किसानों को मौसम के पूर्वानुमान,फसलों की कटाई-बुआई, मिट्टी की सेहत…फसलों की लगातार मॉनिटरिंग में मदद मिलती है. अगर फसल में कीट लगता है तो ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा सकती … AI से अलर्ट मिलने के बाद चिन्हित क्षेत्र में कीटनाशकों का इस्तेमाल कर फसलों को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है … डाटा विश्लेषण के आधार पर AI ये भी बताता है कि खेत में खड़ी फसल को कितनी सिंचाई की जरूरत है. कब, कितना और किस तरह के फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से अधिक पैदावार होगी .

महाराष्ट्र के बारामती क्षेत्र में कुछ किसानों ने गन्ने की खेती में AI का इस्तेमाल किया..खेत में एक ऐसा छोटा हाईटेक यंत्र लगाया
जो हवा की रफ्तार, बारिश,तापमान, नमी और मिट्टी की सेहत को मापता रहता है और उसकी जानकारी स्मार्टफोन पर भेजता रहता है. ख़बरों के मुताबिक, खेत में लगे डिवाइस, से मिले अलर्ट और डाटा का इस्तेमाल करते हुए किसानों ने पैदावार में करीब 30% की बढ़ोत्तरी की … देश के कई हिस्सों में किसान खेतों में AI और अत्याधुनिक तकनीक के जरिए आकार में छोटे खेतों में अधिक पैदावार की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. लेकिन, कृषि प्रधान भारत में अभी हाईटेक किसानों की संख्या बहुत कम है . अगर 2047 तक भारत को विकसित देशों की कतार में खड़ा करना है - किसानों की आय में क्रांतिकारी उछाल लाना है तो हमारे देश के खेतों में एआई क्रांति समय की मांग है… AI और तकनीक को खेतों में तेजी से ले जाना होगा जो अधिक पैदावार का रास्ता खोलती है. खेतों में लागत-जोखिम कम करती है और आमदनी बढ़ाती है .

अगर किसान बड़े पैमाने पर खेतों में एआई का इस्तेमाल करते हैं – तो इससे एक ओर कम लागत में पैदावार बढ़ाने में मदद मिलेगी. दूसरी ओर, मौसम के साथ जुड़े रिस्क फैक्टर कम करने में भी सहूलियत होगी. भारत में दिनों-दिनों खेतों का आकार छोटा होता जा रहा है…ऐसे में किसानों की खेत में उत्पादकता बढ़ाने के साथ कमाई बढ़ाने में एआई क्रांतिकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार है . लेकिन, अभी हमारे देश के खेतों में AI का इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है … जिसके इस साल बढ़ने के बहुत चांस हैं . एक स्टडी के मुताबिक, ग्लोबल इकोनॉमी में प्रोडक्टिविटी को 40% तक बढ़ा सकता है . लेकिन, एक सच ये भी है कि AI ने एक नई तरह की दुनिया और सामाजिक ताने-बाने को गढ़ना शुरू कर दिया है. दुनिया तेजी से दो हिस्सों में बंटती जा रही है. एक, धन कुबेर…जो एडवांस तकनीक और एआई की मदद से तेजी से अपनी दौलत बढ़ाने में लगे हैं और दूसरी खाली हाथ… जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सरकारी योजनाएं के भरोसे जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ा रहे हैं … हाल में सामने आई 2026 World inequality report के मुताबिक, भारत के टॉप 1 फीसदी लोगों के पास 40 फीसदी दौलत है. देश के टॉप 10 फीसदी लोगों की कुल कमाई में हिस्सेदारी 58 फीसदी है… वहीं, नीचे से 50 फीसदी लोग मिलकर सिर्फ 15% कमाई कर पाते हैं . ऐसे में जेनरेटिव AI गरीब और अमीर के बीच की खाई को और बढ़ाता दिख रहा है . इतिहास गवाह रहा है कि किसी भी लोकतंत्र को तानाशाहों से अधिक खतरा आर्थिक असमानता से रहा है…जो समाजिक तानेबाने के भीतर एक बड़े वर्ग के मन में असंतोष, असमानता और आक्रोश को जन्म देता है . ऐसे में नए साल में एआई से जहां एक ओर बहुत खूबसूरत दुनिया की उम्मीद दिख रही है . दूसरी ओर, इससे नकारात्मक पक्ष डिस्पोटिया पर भी गंभीरता से सोचना जरूरी है . टेक टायकूंस जितनी शिद्दत से जेनरेटिव AI की मदद से दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव की स्क्रिप्ट तैयार करने में जुटे हैं…उन्हें उतनी ही शिद्दत से नई तकनीक के मानवतावादी अवतार पर भी काम करना चाहिए .

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