ऑटो सेक्टर में लंबे समय से साथ काम कर रहीं दो बड़ी कंपनियां, स्टेलेंटिस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, अब अपने सहयोग को नए स्तर पर ले जाने जा रही हैं. दोनों कंपनियों ने 20 साल की साझेदारी पूरी होने पर एक नया समझौता (MoU) साइन किया है. इस कदम से भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजारों में भी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सहयोग को और मजबूत करने की तैयारी है. यह नया समझौता 10 फरवरी 2026 को पुणे में साइन किया गया. इसका मकसद मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन के क्षेत्र में नए अवसर तलाशना है.
FIAPL- साझेदारी की नींव
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यह सहयोग 50:50 जॉइंट वेंचर Fiat India Automobiles Private Limited (FIAPL) के तहत चल रहा है. अब तक इस साझेदारी के जरिए 13.7 लाख से ज्यादा वाहन बनाए जा चुके हैं. रंजनगांव (पुणे) स्थित प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता करीब 2.22 लाख यूनिट है और यहां लगभग 5,000 लोगों को रोजगार मिला हुआ है.
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एक ही प्लांट से कई बड़े मॉडल
रंजनगांव प्लांट से स्टेलेंटिस और टाटा दोनों के वाहन बनाए जाते हैं. यहां Jeep Compass, Meridian, Grand Cherokee (CKD) और Wrangler (CKD) का उत्पादन होता है. वहीं टाटा की Nexon, Altroz और Curvv भी इसी प्लांट से तैयार होती हैं. इसके अलावा यहां इंजन, ट्रांसमिशन और ट्रैक्शन मोटर भी बनाए जाते हैं और कुछ वाहनों का निर्यात जापान और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में किया जाता है.
भविष्य की तैयारी पर फोकस
स्टेलेंटिस के एशिया पैसिफिक COO ग्रेगोइर ओलिवियर ने कहा कि यह साझेदारी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन को आगे बढ़ाने पर केंद्रित रहेगी. वहीं टाटा मोटर्स के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने इसे भरोसे और साझा विजन पर आधारित मजबूत रिश्ता बताया और आगे इसे और गहरा करने की बात कही.
नए MoU के जरिए स्टेलेंटिस की वैश्विक विशेषज्ञता और टाटा मोटर्स की स्थानीय समझ को साथ लाकर आने वाले समय में नए प्रोजेक्ट्स और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा.
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