India-EU FTA: भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के ऐलान के बाद देश की लग्जरी और परफॉर्मेंस कार मार्केट में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इस समझौते के तहत भारत ने पहली बार किसी ट्रेड पार्टनर को कारों पर इतनी बड़ी टैक्स छूट देने पर सहमति जताई है. इसका सीधा असर उन यूरोपीय कारों पर पड़ेगा, जो पूरी तरह इम्पोर्ट होकर भारत आती हैं और अब तक बेहद महंगी मानी जाती थीं.
FTA के तहत कैसे बदलेंगे इम्पोर्ट ड्यूटी के नियम
अब तक यूरोप से आने वाली पूरी तरह बनी हुई कारों (CBU) पर भारत में भारी-भरकम टैक्स लगता था. इन पर 70 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी, 40 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस, 28 प्रतिशत IGST और सेस मिलाकर कुल टैक्स 140 से 170 प्रतिशत तक पहुंच जाता था. यही वजह थी कि विदेश में सस्ती दिखने वाली कार भारत में आते-आते बेहद महंगी हो जाती थी.
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पहले चरण में बड़ी राहत
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India-EU FTA के तहत कारों पर इम्पोर्ट ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाया जाएगा. पहले चरण में यह ड्यूटी करीब 40 प्रतिशत तक लाई जा सकती है, जिसके बाद GST और सेस लगेगा. आगे चलकर यही ड्यूटी धीरे-धीरे घटते हुए 10 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. खास बात यह है कि भारत ने किसी और देश को कारों पर इतनी कम ड्यूटी का फायदा अब तक नहीं दिया है.
कार पार्ट्स पर भी मिलेगा फायदा
सिर्फ कारों ही नहीं, बल्कि कार पार्ट्स पर भी बड़ा बदलाव होने वाला है. समझौते के मुताबिक, अगले 5 से 10 साल में यूरोप से आने वाले कार पार्ट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी पूरी तरह खत्म की जा सकती है. इससे उन कंपनियों को फायदा होगा, जो भारत में कारें असेंबल करती हैं और उनकी लागत धीरे-धीरे कम हो सकती है.
कारों की कीमतों पर क्या पड़ेगा असर
अगर इम्पोर्ट ड्यूटी 40 प्रतिशत तक आ जाती है, तो कुल टैक्स बोझ करीब 70 से 90 प्रतिशत रह सकता है. इसका मतलब है कि आज के मुकाबले कारों की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है. उदाहरण के तौर पर, जिसकी इम्पोर्ट कीमत करीब 1 करोड़ रुपये है, वह कार आज भारत में लगभग 3 करोड़ रुपये में बिकती है. नए नियमों के बाद इसकी कीमत में अच्छी-खासी कटौती संभव है.
किन कारों के सस्ते होने की उम्मीद
शुरुआत में यह छूट हर साल करीब दो लाख कारों तक सीमित रहेगी. पहले चरण में पेट्रोल और डीजल कारों को फायदा मिलेगा, जबकि इलेक्ट्रिक कारों को पहले पांच साल इस समझौते से बाहर रखा गया है. Mercedes-Benz, BMW, Audi, Porsche, Lamborghini, Ferrari, Bentley, Rolls-Royce, Land Rover, Volvo, Volkswagen और Skoda जैसे ब्रांड्स की कई लग्जरी SUV, स्पोर्ट्स कार और परफॉर्मेंस मॉडल सस्ते हो सकते हैं.
| कार मॉडल | मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत | FTA के बाद अनुमानित कीमत |
|---|---|---|
| Mercedes-Benz G-Class | 2.90 – 4.00 करोड़ | 2.00 – 2.70 करोड़ |
| Land Rover Defender 130 | 1.70 – 2.00 करोड़ | लगभग 1.15 करोड़ |
| Porsche 911 | 2.00 – 3.80 करोड़ | 1.30 – 2.60 करोड़ |
| BMW i7 | 2.03 करोड़ | लगभग 1.40 करोड़ |
| Audi RS Q8 | 2.32 करोड़ | लगभग 1.60 करोड़ |
| Range Rover | 2.60 – 4.17 करोड़ | 1.80 – 2.90 करोड़ |
| Rolls-Royce Ghost | 6.95 – 7.95 करोड़ | 4.80 – 5.50 करोड़ |
| Bentley Bentayga | 4.10 करोड़ | लगभग 2.80 करोड़ |
| Lamborghini Urus | 4.18 करोड़ | लगभग 2.90 करोड़ |
| Ferrari Purosangue | 5.50 करोड़ | लगभग 3.80 करोड़ |
ऊपर दी गई कीमतें अनुमानित हैं और India–EU Free Trade Agreement के तहत प्रस्तावित इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव के आधार पर बताई गई हैं. असल एक्स-शोरूम कीमतें कार कंपनियों की प्राइसिंग रणनीति, मार्केट कंडीशन, करेंसी रेट और FTA के अंतिम लागू होने के तरीके पर निर्भर करेंगी. कीमतों में बदलाव समय के साथ अलग हो सकता है.
क्या कंपनियां पूरा फायदा ग्राहकों को देंगी?
यह जरूरी नहीं है कि ड्यूटी घटते ही कंपनियां कीमतों में उतनी ही कटौती कर दें. कीमत तय करना पूरी तरह कार कंपनियों के हाथ में होता है. सप्लाई की स्थिति, डिमांड, डॉलर-रुपया रेट और ब्रांड की पोजिशनिंग जैसे कई फैक्टर इसमें भूमिका निभाएंगे. कुछ लिमिटेड या ज्यादा डिमांड वाली कारों में कीमतें धीरे-धीरे कम हो सकती हैं.
भारतीय ऑटो मार्केट के लिए क्या मायने रखता है यह समझौता
India-EU FTA को भारतीय ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है. भले ही तुरंत हर कार सस्ती न हो, लेकिन आने वाले सालों में यूरोपीय लग्जरी और परफॉर्मेंस कारें भारत में ज्यादा किफायती और प्रतिस्पर्धी बन सकती हैं. लंबे समय में इसका फायदा सीधे ग्राहकों को मिलने की उम्मीद है.
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