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हेड-अप डिस्प्ले क्या होता है? महंगी कारों की पहचान था HUD, अब मिड-रेंज कारों में मचा रहा धूम

अब कार चलाते वक्त स्पीड या नेविगेशन देखने के लिए नजरें सड़क से हटाने की जरूरत नहीं. हेड-अप डिस्प्ले (HUD) फीचर लग्जरी कारों से निकलकर अब बलेनो और फ्रॉन्क्स जैसी मिड-रेंज गाड़ियों तक पहुंच गया है. जानिए यह फीचर क्या है, कैसे काम करता है और क्यों इसे ड्राइविंग सेफ्टी के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है.

कार में हेड-अप डिस्प्ले क्या होता है? (Photo-Hyundai)

What Is Head Up Display: आज की कारें सिर्फ चार पहियों पर चलने वाला साधन नहीं रहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से लैस स्मार्ट मशीन बन चुकी हैं. कुछ साल पहले तक जिन फीचर्स की कल्पना करना भी मुश्किल था, वे अब आम कारों में भी मिलने लगे हैं. ऐसा ही एक फीचर है हेड-अप डिस्प्ले (HUD). पहले यह सुविधा केवल ऑडी, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी महंगी कारों तक सीमित थी, लेकिन अब मिड-रेंज कारों में भी इसकी एंट्री हो चुकी है. मारुति बलेनो और फ्रॉन्क्स जैसी कारों में HUD मिलना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर HUD क्या है और यह काम कैसे करता है.

हेड-अप डिस्प्ले (HUD) क्या होता है

हेड-अप डिस्प्ले एक ऐसा एडवांस फीचर है, जो ड्राइवर के लिए जरूरी जानकारी सीधे कार की विंडशील्ड पर दिखाता है. इसमें स्पीड, नेविगेशन, फ्यूल से जुड़ी जानकारी और कुछ जरूरी अलर्ट सामने कांच पर नजर आते हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ड्राइवर को इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर या स्क्रीन की तरफ देखने के लिए सिर नीचे नहीं करना पड़ता और नजरें सड़क पर ही बनी रहती हैं.

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नाम से ही समझ आता है इसका मकसद

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इस फीचर को हेड-अप इसलिए कहा जाता है क्योंकि ड्राइवर का सिर हमेशा ऊपर रहता है. यानी गाड़ी चलाते समय आंखें सड़क पर और जरूरी जानकारी सामने शीशे पर. इससे ड्राइविंग के दौरान ध्यान भटकने की संभावना काफी कम हो जाती है और सफर ज्यादा सुरक्षित बनता है.

HUD सिस्टम कैसे काम करता है

हेड-अप डिस्प्ले सिस्टम में डैशबोर्ड के अंदर एक छोटा सा प्रोजेक्टर लगा होता है. यह प्रोजेक्टर कार के सिस्टम से डेटा लेकर उसे ड्राइवर के सामने दिखाता है. यह तकनीक काफी सटीक होती है और तेज धूप या रात के समय भी जानकारी साफ नजर आती है.

HUD के दो मुख्य प्रकार

HUD आमतौर पर दो तरह के होते हैं. पहला विंडशील्ड-बेस्ड HUD, जिसमें जानकारी सीधे सामने के कांच पर प्रोजेक्ट होती है. दूसरा ट्रांसपेरेंट पैनल वाला HUD, जिसमें ड्राइवर के सामने एक छोटा पारदर्शी पैनल लगा होता है. बजट और मिड-रेंज कारों में ज्यादातर यही पैनल वाला सिस्टम देखने को मिलता है.

सुरक्षा के लिहाज से क्यों जरूरी है HUD

HUD का सबसे बड़ा फायदा सुरक्षा से जुड़ा है. गाड़ी चलाते वक्त एक पल के लिए भी नजर हटना खतरनाक हो सकता है. HUD की मदद से ड्राइवर को स्पीड या दिशा देखने के लिए नीचे नहीं झुकना पड़ता. इससे सड़क पर पूरा ध्यान बना रहता है और दुर्घटनाओं का खतरा कम होता है.

Photo-Social media

नेविगेशन को बनाता है आसान

अगर आप मैप के सहारे ड्राइव करते हैं, तो HUD काफी काम का साबित होता है. सामने शीशे पर ही रास्ते की जानकारी मिलने से कन्फ्यूजन नहीं होता और बार-बार मोबाइल या इंफोटेनमेंट स्क्रीन देखने की जरूरत नहीं पड़ती. लंबी यात्राओं में यह फीचर काफी आरामदायक अनुभव देता है.

बजट कारों में प्रीमियम फील

HUD सिर्फ सुविधा ही नहीं देता, बल्कि कार के केबिन को एक प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक लुक भी देता है. यही वजह है कि अब कार कंपनियां इसे मिड-रेंज गाड़ियों में भी शामिल कर रही हैं, ताकि ग्राहकों को बेहतर अनुभव मिल सके.

किन कारों में मिल रहा है HUD फीचर

भारत में अब यह फीचर केवल लग्जरी कारों तक सीमित नहीं है. मारुति सुजुकी बलेनो, फ्रॉन्क्स, टोयोटा ग्लैंजा और हाल ही में चर्चा में रही टाटा सिएरा जैसी कारों में HUD दिया जा रहा है. अगर आप सेफ्टी और कंफर्ट को अहमियत देते हैं, तो हेड-अप डिस्प्ले एक ऐसा फीचर है, जो आपकी ड्राइविंग को आसान और सुरक्षित दोनों बना सकता है.

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