कार खरीदने के बाद ज्यादातर लोग बस उसे चलाने पर ध्यान देते हैं, लेकिन उसकी देखभाल को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर भारी खर्च और अचानक खराबी की वजह बनती है. सच्चाई यह है कि अगर समय रहते कुछ बेसिक मेंटेनेंस टिप्स फॉलो कर लिए जाएं, तो कार लंबे समय तक बेहतर परफॉर्म करती है और जेब पर भी कम बोझ पड़ता है. इस लेख में हम आपको कार मेंटेनेंस से जुड़ी वही जरूरी बातें आसान भाषा में बता रहे हैं, जो हर कार मालिक को पता होनी चाहिए.
कार सर्विसिंग की जरूरी चेकलिस्ट
कार सर्विस के समय अगर आपको बेसिक चेकलिस्ट पता नहीं होगी, तो कई बार गैर-जरूरी काम जोड़ दिए जाते हैं या जरूरी चीजें छूट जाती हैं. सबसे अहम बात इंजन ऑयल की है. आमतौर पर 8,000 से 10,000 किलोमीटर चलने के बाद इंजन ऑयल बदलवा लेना सही माना जाता है. इससे इंजन स्मूथ रहता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है.
एयर फिल्टर और टायर रोटेशन को हल्के में न लें
एयर फिल्टर का काम इंजन तक साफ हवा पहुंचाना होता है. अगर यह गंदा हो जाए, तो माइलेज और परफॉर्मेंस दोनों प्रभावित होते हैं. इसलिए हर 15,000 किलोमीटर पर एयर फिल्टर बदलवाना बेहतर होता है. वहीं, टायर रोटेशन भी उतना ही जरूरी है. करीब 10,000 किलोमीटर के अंतराल पर टायर रोटेशन कराने से टायर बराबर घिसते हैं और उनकी लाइफ बढ़ती है.
कूलेंट की जांच समय पर कराना क्यों जरूरी है
कूलेंट इंजन को ओवरहीट होने से बचाता है. कई लोग इसे तब तक नजरअंदाज करते हैं, जब तक इंजन गर्म होकर परेशानी न दे दे. बेहतर यही है कि लगभग 40,000 किलोमीटर पर कूलेंट जरूर चेक करवा लें और जरूरत हो तो बदलवा दें. इससे लंबे सफर में भी इंजन सुरक्षित रहता है.
बैटरी और स्पार्क प्लग की अनदेखी पड़ सकती है भारी
हर सर्विसिंग के दौरान बैटरी की जांच कराना जरूरी है. अच्छी बात यह है कि ज्यादातर सर्विस सेंटर यह जांच मुफ्त में कर देते हैं. वहीं, स्पार्क प्लग की बात करें तो कार के मॉडल और टाइप के हिसाब से करीब 40,000 किलोमीटर के बाद इसकी जांच जरूरी हो जाती है. खराब स्पार्क प्लग से स्टार्टिंग और माइलेज दोनों पर असर पड़ता है.
ट्रांसमिशन फ्लूइड और वाइपर ब्लेड भी हैं जरूरी
अगर आप मैनुअल कार चलाते हैं, तो 60,000 किलोमीटर के बाद ट्रांसमिशन फ्लूइड जरूर चेक करा लें. समय पर जांच से गियर शिफ्टिंग स्मूथ रहती है और बड़ी खराबी से बचा जा सकता है. इसके अलावा, वाइपर ब्लेड भी अक्सर लोग भूल जाते हैं. इस्तेमाल के हिसाब से हर 10 से 12 हजार किलोमीटर पर वाइपर ब्लेड बदलवाना सही रहता है, ताकि बारिश या कोहरे में विजिबिलिटी बनी रहे.
कार एक मशीन है और उसमें कभी भी दिक्कत आ सकती है. लेकिन अगर आपको बेसिक मेंटेनेंस की जानकारी होगी, तो न तो आप बेवजह घबराएंगे और न ही गलत खर्च करेंगे. सही समय पर सही जांच और सर्विसिंग कराकर आप अपनी कार को लंबे समय तक फिट और भरोसेमंद बना सकते हैं.
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