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हादसे के वक्त कैसे बचाता है जान! कार का एयरबैग कब और कैसे खुलता है? जान लें जरूरी बात

कार में लगा एयरबैग हादसे के समय आपकी जान बचा सकता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह कब खुलता है और कैसे काम करता है? हर टक्कर में एयरबैग एक्टिव नहीं होता और कई बार गलत तरीके से बैठना भी खतरनाक साबित हो सकता है. आइए जानते हैं एयरबैग से जुड़ी जरूरी बातें, इसके प्रकार और कौन-सी सावधानियां आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं.

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पलक झपकते ऐसे खुलता है जान बचाने वाला सिस्टम.

Car Airbag How It Works: कार में सफर करते समय हम अक्सर सीट बेल्ट और एयरबैग के बारे में सुनते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हादसे के वक्त एयरबैग इतनी तेजी से कैसे खुल जाता है? सड़क दुर्घटना के दौरान यही एयरबैग ड्राइवर और यात्रियों को गंभीर चोट से बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है. आइए समझते हैं कि एयरबैग कब खुलता है, कैसे काम करता है और इसके इस्तेमाल से जुड़ी जरूरी बातें क्या हैं.

एयरबैग कब खुलता है?

एयरबैग हर छोटी ब्रेक या हल्की टक्कर में नहीं खुलता. यह केवल तब एक्टिव होता है जब गाड़ी को तेज और गंभीर टक्कर लगती है. कार में लगे क्रैश सेंसर टक्कर की तीव्रता और झटके की ताकत को मापते हैं. अगर सिस्टम को लगता है कि दुर्घटना खतरनाक स्तर की है, तो एयरबैग करीब 20 से 40 मिलीसेकंड में खुल जाता है, यानी पलक झपकने से भी कम समय में. आमतौर पर यह तब खुलता है जब सामने से टक्कर की स्पीड लगभग 16 से 25 किमी/घंटा या उससे ज्यादा हो. वहीं साइड से तेज टक्कर होने पर साइड एयरबैग एक्टिव होते हैं.

एयरबैग कैसे काम करता है?

कार में एक कंट्रोल यूनिट और कई सेंसर लगे होते हैं. जैसे ही टक्कर होती है, सेंसर तुरंत सिग्नल भेजते हैं. इसके बाद एयरबैग मॉड्यूल के अंदर मौजूद गैस जनरेटर तेजी से गैस बनाता है और बैग तुरंत फूल जाता है. यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेज होती है कि यात्री का सिर या छाती स्टीयरिंग, डैशबोर्ड या दरवाजे से टकराने से पहले ही उसे एक नरम कुशन मिल जाता है.

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क्या एयरबैग अकेले पूरी सुरक्षा देता है?

कई लोग सोचते हैं कि एयरबैग ही काफी है, लेकिन ऐसा नहीं है. एयरबैग तभी सही तरीके से काम करता है जब आपने सीट बेल्ट लगाई हो. बिना सीट बेल्ट के एयरबैग खुलने पर शरीर की पोजिशन गलत हो सकती है, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए सफर के दौरान सीट बेल्ट और एयरबैग दोनों की भूमिका बराबर महत्वपूर्ण होती है.

कितनी तरह के एयरबैग होते हैं?

आजकल कारों में अलग-अलग तरह के एयरबैग दिए जाते हैं ताकि हर दिशा से सुरक्षा मिल सके. इनमें फ्रंट एयरबैग, साइड एयरबैग, कर्टन एयरबैग और नी एयरबैग शामिल हैं. अलग-अलग एयरबैग अलग तरह की टक्कर में यात्रियों को सुरक्षित रखने का काम करते हैं.

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इन बातों का ध्यान रखना जरूरी

डैशबोर्ड पर सामान रखने से बचें
कई लोग सामने डैशबोर्ड पर पैर रख लेते हैं या सामान रख देते हैं, जो खतरनाक हो सकता है. दुर्घटना के समय एयरबैग बहुत तेज गति से खुलता है. ऐसे में सामने रखा कोई भी सामान या गलत पोजिशन गंभीर चोट का कारण बन सकती है.

बच्चों को फ्रंट सीट पर न बैठाएं
छोटे बच्चों को हमेशा पीछे की सीट पर बैठाना चाहिए और चाइल्ड सीट का इस्तेमाल करना चाहिए. फ्रंट एयरबैग खुलने की स्थिति में बच्चे को गंभीर चोट लगने का खतरा रहता है, इसलिए यह सावधानी बेहद जरूरी है.

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एयरबैग वार्निंग लाइट को नजरअंदाज न करें
अगर डैशबोर्ड पर एयरबैग की चेतावनी लाइट लगातार जल रही है, तो यह सिस्टम में खराबी का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में तुरंत अधिकृत सर्विस सेंटर पर जांच करवानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर एयरबैग सही तरीके से काम कर सके.

ये भी पढ़ें- बीच रास्ते ऑटोमैटिक कार का गियर फंस जाए तो क्या करें? ये आसान ट्रिक्स बचा सकती हैं बड़ी परेशानी

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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