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Bulletproof Car Rules India: क्या आम आदमी भी खरीद सकता है बुलेटप्रूफ कार? जान लें ये जरूरी नियम और पूरा खर्च

क्या आम लोग भी Bullet Proof कार खरीद सकते हैं? आइए जानते हैं क्या होता है इसका नियम और इसे लेने की पूरी प्रोसेस, साथ ही किनता होता है इसमें खर्च.

भारत में बुलेटप्रूफ कार लेने के नियम. (News 24 GFX)

Bulletproof Car Rules India: सलमान खान ने कुछ महीने पहले ही अपने कार कलेक्शन में एक बुलेटप्रूफ मर्सिडीज-मेबैक जीएलएस 600 (Mercedes-Maybach GLS 600) को एड की है. ऐसे में कई सवाल अक्सर जहन में आते हैं जैसे कि ये गाड़ियां सिर्फ वीवीआईपी, सेलिब्रिटी और बड़े नेताओं के पास ही क्यों दिखती हैं? क्या एक आम आदमी भी ऐसी कार खरीद सकता है, और अगर हां, तो इसके नियम क्या हैं? सबसे जरूरी, ऐसी गाड़ी बनवाने में कितना खर्च आता है? अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं, तो आइए, आज हम इस पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझते हैं.

बुलेटप्रूफ गाड़ी क्या होती है और क्यों जरूरी है?

बुलेटप्रूफ कार का सीधा मतलब है एक ऐसा वाहन जो आपको किसी भी तरह के हथियारों के हमले से सुरक्षित रखे. इन गाड़ियों को इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि इन पर गोलियों का कोई असर नहीं होता. ज्यादा सुरक्षा वाली गाड़ियां तो हैंड ग्रेनेड या रॉकेट लॉन्चर के हमले से भी बचा सकती हैं. वीवीआईपी और नेताओं को गंभीर सुरक्षा खतरों के कारण ऐसी गाड़ियों की ज़रूरत पड़ती है. भारत में भी कई कंपनियां इन्हें तैयार करती हैं, और कुछ गाड़ियां विदेशों से इम्पोर्ट भी की जाती हैं, लेकिन अक्सर लोग अपनी मौजूदा कार को ही मॉडिफाई करवा लेते हैं.

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किन गाड़ियों को बुलेटप्रूफ बनाया जा सकता है?

किसी भी कार को बुलेटप्रूफ बनाने के लिए उसमें अतिरिक्त वज़न सहन करने की क्षमता होनी चाहिए. सुरक्षा के लिए जो स्टील की शीट्स और मोटे शीशे लगाए जाते हैं, उनसे गाड़ी का वज़न लगभग 1000 किलोग्राम तक बढ़ जाता है. इसीलिए, ज्यादातर लोग एसयूवी (SUV) को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनका इंजन और चेसिस मजबूत होता है. भारत में आमतौर पर टाटा सफारी, महिंद्रा स्कॉर्पियो, टोयोटा फॉर्च्यूनर, इनोवा, या लग्जरी सेगमेंट में बीएमडब्ल्यू और ऑडी जैसी गाड़ियां बुलेटप्रूफ करवाई जाती हैं.

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कार को बुलेटप्रूफ कैसे बनाया जाता है?

किसी भी सामान्य कार को बुलेटप्रूफ बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है. इसमें कार के इंजन को छोड़कर लगभग पूरे हिस्से को बदल दिया जाता है. दरवाजों से लेकर विंडशील्ड, खिड़कियां, छत और यहां तक कि पूरा पैनल भी बुलेटप्रूफ मैटेरियल से बदला जाता है. इस काम के लिए खास तरह की स्टील शीट का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी मोटाई लगभग 6.5 मिमी तक होती है.

  • शीशे- सबसे कमजोर हिस्सा शीशा होता है, इसलिए इसमें 45 से 55 मिमी तक का मोटा, कई परतों वाला ग्लास लगाया जाता है.
  • टायर- हमले की स्थिति में भी गाड़ी चलती रहे, इसके लिए खास रन-फ्लैट (Run-Flat) ट्यूबलेस टायरों का इस्तेमाल किया जाता है.

वजन बढ़ने के कारण गाड़ी की मैक्सिमम स्पीड और माइलेज पर असर पड़ता है. हर हिस्से को कवर किया जाता है, ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो.

बुलेटप्रूफ कार बनाने में कितना खर्च आता है?

बुलेटप्रूफिंग का खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी सुरक्षा चाहते हैं. अगर गाड़ी को सिर्फ गोलियों के हमले से बचाना है, तो यह खर्च 20 लाख से 50 लाख रुपये के बीच आ सकता है. लेकिन अगर आप हैंड ग्रेनेड और ज्यादा शक्तिशाली हथियारों से सुरक्षा चाहते हैं (एडवांस स्तर की सुरक्षा), तो यह खर्च बहुत बढ़ जाता है. मर्सिडीज या BMW जैसी महंगी गाड़ियों की पूरी बुलेटप्रूफिंग पर 3 से 4 करोड़ रुपये तक भी खर्च हो सकते हैं. केवल शीशे बुलेटप्रूफ कराने पर भी लगभग 5 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है.

क्या एक आम आदमी बुलेटप्रूफ कार खरीद सकता है?

हां, एक आम आदमी भी बुलेटप्रूफ गाड़ी खरीद सकता है, लेकिन यह सामान्य कार खरीदने जितना आसान नहीं है. चूंकि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए सरकार ने कुछ कड़े नियम बनाए हैं, ताकि इसका दुरुपयोग न हो सके.

बुलेटप्रूफ गाड़ी खरीदने या बनवाने के लिए क्या नियम हैं?

अगर आपको लगता है कि आपकी जान को गंभीर खतरा है और आपको धमकियां मिल रही हैं, तो आप बुलेटप्रूफ कार के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आपको तीन लेवल पर सरकारी अनुमति लेनी जरूरी है

  1. जिलाधिकारी (DM) को आवेदन- आपको सबसे पहले अपने जिलाधिकारी को एक आवेदन देना होगा, जिसमें आपको अपनी जान के खतरे का ठोस कारण बताना होगा.
  2. पुलिस अधीक्षक (SP) से सुरक्षा जांच- जिलाधिकारी के आवेदन को आगे पुलिस अधीक्षक के पास भेजा जाता है, जो आपके खतरे की गंभीरता की पूरी जांच करते हैं.
  3. गृह मंत्रालय की अंतिम मंजूरी- SP की रिपोर्ट के बाद, गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs - MHA) से अंतिम मंजूरी लेनी होती है.

एक बार मंजूरी मिल जाने के बाद ही आप किसी अधिकृत कंपनी से अपनी गाड़ी को बुलेटप्रूफ बनवा सकते हैं. इस पूरी प्रक्रिया के बाद, गाड़ी को क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में आर्मर्ड व्हीकल के रूप में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना भी जरूरी होता है. बिना सरकारी अनुमति के ऐसा करना पूरी तरह से गैरकानूनी है और इसके लिए सजा भी हो सकती है.

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