पुखराज का ज्योतिष में महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पीले पुखराज का संबंध बृहस्पति ग्रह से है। जानकार बताते हैं कि जो कोई इस रत्न को विधिवत धारण करता है, उसकी बुद्धि प्रखर होती है। साथ ही इस रत्न के शुभ प्रभाव से व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है। इसके अलावा यह रत्न कुंडली के गुरु ग्रह को मजबूती प्रदान करने में अहम योगदान करता है। यही वजह है कि बृहस्पति ग्रह की शुभता को प्राप्त करने के लिए ज्योतिष से जानकार इस रत्न को धारण करने के सलाह देते हैं।पीला पुखराज कैसे किया जाता है धारण
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई जातक पीले पुखराज की शुभता को प्राप्त करना चाहता है उसे इस रत्न को धारण करने से पहले कुछ नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। क्योंकि रत्न से जुड़े नियमों का पालन करने से ही गुरु ग्रह की शुभता प्राप्त होती है। ऐसे में पीले पुखराज को धारण करने से पहले किसी अच्छे ज्योतिषी से सलाह लेना चाहिए। क्योंकि ज्योतिषी ही यह बता सकते हैं कि कुंडली में बृहस्पति ग्रह की क्या स्थिति और इसे धारण किया जा सकता है या नहीं। दरअसल कई बार बिना सलाह के रत्नों को धारण करने से उसके विपरीत परिणाम देखने को मिलते हैं। यह भी पढ़ें: जीवित्पुत्रिका व्रत पर महिलाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है ये खास मंत्र, संतान प्राप्ति की कामना जल्द होती है पूरीकिस उंगली में धारण किया जाता है पीला पुखराज?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र में इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पीले पुखराज को तर्जनी उंगली (अंगूठे के बगल वाली उंगली) में धारण करना शुभ है। पुरुषों को पीला पुखराज दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करना चाहिए। जबकि महिलाओं को यह रत्न बाएं हाथ की तर्जनी उंगली में पहनना शुभ बताया गया है। हालांकि इसके लिए भी ज्योतिषी से परामर्श लेना अच्छा रहेगा।किस धातु में बनवाना चाहिए पीला पुखराज?
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुखराज को सोना या चांदी में बनवाया जा सकता है। हालांकि इसके लिए सोना सबसे शुभ बताया गया है। जबकि ग्रहों की दशा और दिशा को देखते हुए ज्योतिषी इस रत्न को कई बार चांदी में बनवाने की सलाह भी देते हैं। इसके लिए उपयुक्त धातु स्वर्ण ही है। क्योंकि सोने में पिरोकर इस रत्न को धारण करने से सूर्य जैसी ऊर्जा प्राप्त होती है।पीला पुखराज को अभिषिक्त करना भी है जरूरी
पुखराज रत्न को धारण करने से पहले इस रत्न को जाग्रत करना होता है। रत्नों को जाग्रित करने के लिए उसे अभिषिक्त किया जाता है। जिसे प्राण-प्रतिष्ठा भी कहा जाता है। ऐसे में पीले पुखराज को अभिषिक्त करने के लिए दूध, शहद या गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। इसके साथ ही इस दौरान बृहस्पति के बीज मंत्र का जाप करना भी जरूरी है। क्योंकि पुखराज को बिना अभिषिक्त किए धारण करने पर कोई लाभ प्राप्त नहीं होता।पीला पुखराज किस दिन धारण करें
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरुवार का संबंध बृहस्पति ग्रह से है। ऐसे में पीले पुखराज को पहनने के लिए सबसे शुभ दिन गुरुवार है। ऐसे में इस रत्न को धारण करने के लिए हमेशा गुरुवार का चयन करना चाहिए। यह भी पढ़ें: इन पक्षियों को दाना खिलाने से कुबेर भी खोल देते हैं अपना खजाना, चंद दिनों में बदल जाती है किस्मत!
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।