गुरु पुष्य योग का महत्व
सनातन पंचांग में गुरु पुष्य योग एक शुभ योग मुहूर्त है। वैदिक ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना गया है। इस नक्षत्र के स्वामी शनि ग्रह और देवता बृहस्पति हैं। इसे 27 नक्षत्रों में अष्टम यानी आठवां स्थान प्राप्त है। अष्टम संख्या देवी दुर्गा और मां लक्ष्मी को समर्पित है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति ग्रह का दिन है। बृहस्पति वैदिक ज्योतिष में सर्वाधिक शुभ ग्रह हैं। बृहस्पति द्वारा नियंत्रित और शासित होने के कारण यह दिन शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है। ये भी पढ़ें: Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा ने हनुमान चालीसा की हर पंक्ति को बताया महामंत्र, जानें उनके अनमोल विचार! इसके अलावा, गुरु पुष्य योग का महत्व इस कारण भी है कि इस योग में माता लक्ष्मी जन्म हुआ था, जो धन और सुख-समृद्धि की देवी हैं। यही कारण है कि गुरु पुष्य नक्षत्र धन और वित्त से संबंधित काम के साथ-साथ नए कायों के लिए उपयुक्त माना गया है। इस योग में शिक्षा ग्रहण करने, नवीन कार्य शुरू करने और महत्वपूर्ण कान्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं। भूमि या वाहन की खरीददारी के लिए भी यह योग बहुत शुभ माना जाता है।साल 2025 में बनेंगे 3 गुरु पुष्य योग
साल 2024 में कुल 5 गुरु पुष्य योग का निर्माण हुआ था। इस साल का यह पहला योग 25 जनवरी को पड़ा था, जबकि अंतिम गुरु पुष्य योग नवंबर माह की 21 तारीख को बना था। जहां तक साल 2025 की बात है, तो दृक पंचांग के अनुसार, इस साल में मात्र 3 गुरु पुष्य योग बनेंगे। इसे आप यहां दिए गए टेबल में देख सकते हैं:| साल 2025 में गुरु पुष्य योग की तिथियां और मुहूर्त समय | |
| गुरु पुष्य योग की तारीख | गुरु पुष्य योग का समय |
| जुलाई 24, 2025, बृहस्पतिवार | 04:43 PM जुलाई 24 से 05:39 AM, जुलाई 25 |
| अगस्त 21, 2025, बृहस्पतिवार | 05:53 AM अगस्त 21 से 12:08 AM, अगस्त 22 |
| सितंबर 18, 2025, बृहस्पतिवार | 06:07 AM से 06:32 AM |