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व्रती महिलाएं सूर्य देव को अर्घ्य देते वक्त भूलकर भी न करें ऐसी गलती, व्रत हो सकता है निष्फल!

Surya Arghya Vidhi: छठ पूजा के तीसरे दिन आज डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। आइए जानते हैं सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि, संध्या अर्घ्य का समय और मंत्र।

surya arghta vidhi
Surya Arghya Vidhi, Mantra and Timing: छठ पूजा के तीसरे दिन आज यानी 19 नवंबर को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार, छठ पूजा के तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। ऐसे में आज सूर्यास्त के समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। पंचांग के अनुसार, सूर्य को अर्घ्य देने का समय शाम 5 बजकर 26 मिनट पर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। आइए जानते हैं कि सूर्य देव को अर्घ्य देने की सही विधि और शुभ मंत्र क्या है।

आज संध्या काल में इस विधि दें सूर्य देव को अर्घ्य

छठ पूजा के तीसरे दिन यानी आज डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। ऐसे में आज जब सूर्यास्त होने के साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य प्रदान करें। विशेष कृपा पाने के लिए आप चाहें तो सूर्य देव की विशेष कृपा पाने के लिए जल में दूध मिलाकर भी उन्हें अर्पित कर सकते हैं। आज संध्या काल में डूबते हुए सूर्य को 5 बजकर 26 मिनट पर पहला अर्घ्य दिया जाएगा। 20 नवंबर 2023 यानी कल उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। ऐसे में सूर्योदय के समय ही उन्हें जल अर्पित करना शुभ रहेगा। पंचांग के अनुसार, 20 नवंबर को सूर्योदय का समय 6 बजकर 48 मिनट है। ऐसे में इस वक्त सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव अर्घ्य देने के लिए हमेशा तांबे के पात्र को ही उपयोग में लाना चाहिए। सूर्य देव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करना शुभ माना गया है। यह भी पढ़ें: छठ पूजा पर राशि अनुसार अर्पित करें खास वस्तुएं, सूर्य देव होंगे प्रसन्न नौकरी-व्यापार में होगी जमकर तरक्की आज शाम के समय सूर्य को जल देते वक्त आपका पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए, क्योंकि सूर्यास्त पश्चिम में होता है और इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य देव को अर्पित किए जाने वाले जल में रोली या लाल चंदन जरूर डालें। इसके अलावा लाल फूल भी सूर्य देव को अर्पित करना शुभ माना गया है।

इन मंत्रों से दें सूर्य देव को अर्घ्य

ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर: ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः ॐ सूर्याय नम: ॐ घृणि सूर्याय नम: ॐ भास्कराय नमः ॐ अर्काय नमः ॐ सवित्रे नमः
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी उपाय को करने से पहले संबंधित विषय के एक्सपर्ट से सलाह अवश्य लें।


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