Shani Favourite Zodiac Signs: ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफल का स्वामी और न्याय का देवता माना जाता है. शनि को धीमी चाल चलने वाला ग्रह कहा जाता है, लेकिन असर गहरा और दीर्घकालिक होता है. इनकी तीन विशेष दृष्टि मानी गई है- तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि. यही दृष्टि व्यक्ति के कर्म, करियर और संघर्ष को दिशा देती है. साढ़ेसाती और ढैय्या को शनि के प्रमुख चरण कहा जाता है, जो जीवन की परीक्षा का समय माना जाता है. आइए जानते हैं, किन 3 राशियों के जातकों पर शनि की विशेष कृपा बरसती है?
जीवन में शनि का महत्व
शनि अनुशासन, मेहनत और जिम्मेदारी का प्रतीक है. यह ग्रह तुरंत फल नहीं देता. पहले परखता है. फिर परिणाम देता है. जिनकी कुंडली में शनि मजबूत स्थिति में हो, वे लोग जमीन से जुड़े, गंभीर और कर्मठ स्वभाव के होते है. शनि अन्याय को पसंद नहीं करता. जो जैसा कर्म करता है, वैसा फल पाता है.
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तुला राशि: शनि की उच्च राशि
तुला राशि में शनि उच्च का माना जाता है. इस स्थिति में शनि सबसे अधिक बलवान होता है. ऐसे जातक संतुलित सोच रखते है. न्यायप्रिय होते है. जीवन में कई बार देर से सफलता मिलती है, पर मिलती जरूर है. तुला राशि के लोग प्रबंधन, कानून, प्रशासन और व्यापार में अच्छा नाम कमा सकते है. शनि यहां सहयोगी भूमिका में रहता है और सही दिशा देता है.
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मकर राशि: कर्म से बनती पहचान
मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि है. इसलिए इस राशि पर शनि का खास प्रभाव रहता है. मकर राशि के लोग बचपन या युवावस्था में संघर्ष देख सकते है. खासकर 30 वर्ष की आयु तक चुनौतियां अधिक रहती है. इसके बाद स्थिति बदलती है. मेहनत रंग लाती है. धीरे-धीरे पद, प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति होती है. यह लोग लक्ष्य पर फोकस रखते है. जोखिम समझदारी से लेते है.
कुंभ राशि: मूल त्रिकोण की शक्ति
कुंभ राशि को शनि की मूल त्रिकोण राशि कहा जाता है. यहां शनि स्थिर और संतुलित परिणाम देता है. इस राशि के जातक दूरदर्शी होते है. नई सोच रखते है. सामाजिक कार्य, तकनीक, रिसर्च और बड़े संगठनों में सफलता पा सकते है. कठिन परिस्थिति में भी हिम्मत नहीं हारते. धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति मजबूत बनाते है.
30 के बाद सफलता का सूत्र
ज्योतिष मान्यता के अनुसार शनि परिपक्वता 30 वर्ष के आसपास मानी जाती है. इसलिए इन तीन राशियों के जातक इस उम्र के बाद स्थिरता महसूस करते है. करियर दिशा पकड़ता है. धन संचय शुरू होता है. अनुभव काम आता है. आपको बता दें कि शनि की कृपा पाने के लिए नियमित कर्म, ईमानदारी और धैर्य को जरूरी माना गया है. अनुशासन ही शनि का वास्तविक उपाय बताया गया है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.