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राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर के बारे में जानें विशेषता, जिसके PM मोदी ने किए दर्शन, यहां अंबानी भी टेकने आते हैं माथा

PM Modi visited Sanwaliya temple of Rajasthan: राजस्थान में चुनावी माहौल बना हुआ है। चंद दिनों में चुनाव की तारीख घोषित होने वाली है। चुनावी माहौल को देखते हुए भारतीय जनता के सभी कार्यकर्ताओं ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी है। 2 अक्टूबर यानी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के दौरे […]

PM Modi
PM Modi visited Sanwaliya temple of Rajasthan: राजस्थान में चुनावी माहौल बना हुआ है। चंद दिनों में चुनाव की तारीख घोषित होने वाली है। चुनावी माहौल को देखते हुए भारतीय जनता के सभी कार्यकर्ताओं ने अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी है। 2 अक्टूबर यानी आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान के दौरे पर हैं। सभा के शुरू होने से पहले पीएम मोदी ने सांवलिया सेठ के प्रसिद्ध मंदिर के दर्शन किए। मंदिर के चारों ओर पुलिस-प्रशासन की पूरी तैयारी हैं। बता दें कि पीएम मोदी का राजस्थान का दौरा के लिए कुछ खास वजह बताया जा रहा है। नरेंद्र मोदी राजस्थान के जनता को 7000 हजार करोड़ रुपए की परियोजना का लोकार्पण करने वाले हैं। इसके साथ ही माधोपुर रेलवे ओवर ब्रिज का भी लोकार्पण, नाथद्वारा में पर्यटक व्याख्या एवं संस्कृति केंद्र का लोकार्पण, चित्तौड़गढ़ नीमच रेल लाइन का दोहरीकरण ,कोटा चित्तौड़गढ़ विद्युतीकृत रेल लाइन को शुरू करने, आबू रोड में एचपीसीएल के एलपीजी प्लांट की सौगात देंगे। कहा जाता है कि जब भी मुकेश अंबानी जब भी राजस्थान आते हैं, तो सांवलिया सेठ मंदिर में जरूर माथा टेकते हैं। तो आइए इस खबर में जानते हैं आखिर मंदिर इतना प्रसिद्ध क्यों हैं। आइए विस्तार से जानते हैं। यह भी पढ़ें- पीएम मोदी का राजस्थान, मध्य प्रदेश दौरा आज, देंगे करोड़ों की सौगात

सांवलिया सेठ जी के मंदिर की विशेषताएं

बता दें कि सांवलिया सेठ जी के मंदिर के बारे में कई तरह के प्रसिद्ध कथाएं प्रचलित हैं। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित हैं। ऐसी मान्यता है कि 1840 वर्ष में भोलाराम गुर्जर नाम के एक ग्वाला को एक रात सपना आया कि बागुंड गांव में श्री कृष्ण की 3 प्रतिमाएं जमीन के नीचे दबी हुई हैं। सपना पाकर भोलाराम ने उस स्थान पर खुदाई कराई तो वहां भगवान श्री कृष्ण की तीन मूर्तियां निकली। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण की तीनों मूर्तियां को 3 अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया गया। जिसमें से एक भादसोड़ा, दूसरी बांगुड गांव और तीसरी मंडफिया में की गई। मान्यताओं के अनुसार, मंडफियां में स्थापित मूर्ति को सांवलिया सेठ जी मंदिर कहा जाता है। कहा जाता है कि इन मंदिरों के बीच की दूरी 5 किलोमीटर हैं। यह भी पढ़ें- 8 बड़े चेहरे…जिन पर राजस्थान चुनाव में भाजपा की जीत का दारोमदार, CM की रेस में भी आगे  


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