Gemstone Wearing Rules: रत्न शास्त्र में ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए रत्न पहनने की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है. माना जाता है कि सही रत्न जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता ला सकते हैं. लेकिन ज्योतिष के अनुसार, कुछ रत्न ऐसे भी हैं जिन्हें एक साथ पहनना नुकसानदेह हो सकता है. गलत संयोजन से लाभ की जगह परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए रत्न पहनने से पहले इनके नियम जानना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं, किस रत्न को किसके साथ नहीं धारण करना चाहिए और रत्न पहनने का ज्योतिषीय नियम क्या हैं?
रत्न क्यों देते हैं असर
हर रत्न किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है. जब कोई व्यक्ति रत्न धारण करता है, तो उस ग्रह की ऊर्जा शरीर और मन पर प्रभाव डालती है. मित्र ग्रहों के रत्न साथ पहनने से लाभ बढ़ता है, जबकि शत्रु ग्रहों के रत्न साथ हों तो टकराव की स्थिति बन सकती है.
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माणिक्य के साथ किन रत्नों से बचें
माणिक्य सूर्य का रत्न माना जाता है. यह आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता बढ़ाता है. ज्योतिष के अनुसार, माणिक्य को नीलम, हीरा, गोमेद और लहसुनिया के साथ पहनने से बचना चाहिए. यह संयोजन मानसिक तनाव और काम में रुकावट पैदा कर सकता है.
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मूंगा पहनते समय सावधानी
मूंगा मंगल का रत्न है और साहस का प्रतीक माना जाता है. इसे पन्ना, हीरा, नीलम, गोमेद और लहसुनिया के साथ पहनना ठीक नहीं माना जाता. ऐसे संयोजन से क्रोध बढ़ सकता है और ऊर्जा असंतुलित हो सकती है.
मोती और मानसिक प्रभाव
मोती चंद्र ग्रह का रत्न है. यह मन को शांति देता है. लेकिन मोती को पन्ना, हीरा, गोमेद और लहसुनिया के साथ पहनने से मानसिक उलझन और निर्णय में भ्रम की स्थिति बन सकती है.
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पन्ना किन रत्नों से टकराता है
पन्ना बुध ग्रह से जुड़ा होता है और बुद्धि व व्यापार के लिए पहना जाता है. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पन्ना को पुखराज, मूंगा और मोती के साथ पहनने से आर्थिक परेशानी बढ़ सकती है.
हीरा और उसका सही संयोजन
हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है. यह सुख और वैभव से जुड़ा है. माणिक्य, मोती, मूंगा और पुखराज के साथ हीरा पहनना आर्थिक नुकसान और पारिवारिक तनाव का कारण बन सकता है.
पुखराज, गोमेद और नीलम
पुखराज गुरु का रत्न है. इसे हीरा, पन्ना, नीलम और गोमेद के साथ पहनना शुभ नहीं माना जाता. वहीं गोमेद को मूंगा, माणिक्य, मोती और पुखराज के साथ पहनने से मन अस्थिर रह सकता है. नीलम शनि का रत्न है और इसे अक्सर अकेले पहनने की सलाह दी जाती है.
ये है रत्न पहनने का ज्योतिषीय नियम
रत्न पहनने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से सलाह लेना जरूरी होता है, क्योंकि कुंडली देखकर ही यह तय किया जाता है कि कौन सा रत्न आपके लिए लाभकारी रहेगा. हर व्यक्ति की ग्रह स्थिति अलग होती है, इसलिए जरूरी नहीं कि जो रत्न एक व्यक्ति के लिए शुभ हो, वही दूसरे के लिए भी असरदार हो.
- रत्न हमेशा शुभ दिन और उचित मुहूर्त में ही धारण करना चाहिए, जिससे उसका सकारात्मक प्रभाव जल्दी दिखाई दे.
- ज्योतिष में शुक्ल पक्ष को रत्न पहनने के लिए अधिक शुभ समय माना जाता है.
- रत्न की शुद्धता बहुत महत्वपूर्ण होती है, इसलिए टूटा, दरार वाला या दोषयुक्त रत्न कभी नहीं पहनना चाहिए.
- माना जाता है कि अशुद्ध या खराब रत्न अपने पूरे ज्योतिषीय प्रभाव नहीं दे पाते.
- रत्न जिस धातु में जड़ा जाता है, उसका सही होना भी जरूरी होता है, क्योंकि हर रत्न के लिए अलग धातु शुभ मानी जाती है.
- कुछ रत्न सोने में और कुछ चांदी में बेहतर फल देते हैं, गलत धातु में पहनने से लाभ कम हो सकता है.
- रत्न हमेशा सही उंगली में ही पहनना चाहिए, क्योंकि हर उंगली का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है.
- अनामिका, मध्यमा या तर्जनी में रत्न पहनने का चुनाव कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर किया जाता है.
- रत्न धारण करने से पहले उसे मंत्रों द्वारा अभिमंत्रित कराना शुभ माना जाता है.
- रत्न इस तरह पहनना चाहिए कि वह सीधे त्वचा को स्पर्श करे, जिससे उसकी ऊर्जा शरीर पर सही तरीके से असर डाले.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.