बांग्लादेश चुनावों में बीएनपी की भारी जीत के बाद जमात-ए-इस्लामी और एनसीपी जैसे विपक्षी दलों ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. इन दलों का दावा है कि तारिक रहमान ने चुनावी नतीजों के साथ 'इंजीनियरिंग' यानी हेरफेर की है, जिसके बाद से उन्हें 'इंजीनियर' कहा जाने लगा है. एनसीपी नेता नासिरुद्दीन पटवारी ने सबसे पहले फेसबुक पर तारिक रहमान को इस नाम से पुकारा था. विपक्ष का आरोप है कि बीएनपी ने जनादेश की चोरी की है और 12 फरवरी को हुए मतदान में बड़े पैमाने पर धांधली और नतीजों में हेराफेरी की गई है.
सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़
सोशल मीडिया पर तारिक रहमान को लेकर जोक्स और मीम्स की बाढ़ आ गई है. विपक्षी समर्थकों ने एआई की मदद से ऐसी तस्वीरें और वीडियो बनाए हैं जिसमें तारिक रहमान को इंजीनियर वाली टोपी पहने दिखाया गया है. फेसबुक पर लोग 'लंदन से पास इंजीनियर' लिखकर तंज कस रहे हैं क्योंकि तारिक करीब 17 साल तक लंदन में रहे हैं. लोग मजाकिया अंदाज में लिख रहे हैं कि बिना डिग्री के ही कोई शख्स कैसे इंजीनियर बन गया. एक यूजर ने उनकी तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि 'द मैन, द मिथ, द लेजेंड, द इंजीनियर'.
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एजुकेशन क्वालिफिकेशन पर उठा सवाल
तारिक रहमान के एजुकेशन को लेकर भी काफी बहस हो रही है. चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए हलफनामे के अनुसार तारिक रहमान की शैक्षणिक योग्यता केवल 'हायर सेकेंडरी' यानी 12वीं पास है. विपक्ष इसी बात को आधार बनाकर उन पर कटाक्ष कर रहा है कि 12वीं पास व्यक्ति रातों-रात चुनाव नतीजों का बड़ा इंजीनियर बन गया है. जमात गठबंधन ने आरोप लगाया है कि बीएनपी ने हिंसा और दमन के जरिए नतीजों को अपने पक्ष में मोड़ा है. गठबंधन ने चुनाव आयोग में 32 सीटों पर नतीजों को चुनौती देते हुए शिकायत भी दर्ज कराई है.
बीएनपी और तारिक रहमान का जवाब
धांधली के आरोपों पर जब एक पत्रकार ने तारिक रहमान से सवाल किया तो उन्होंने बहुत शांति से जवाब दिया. उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र 'इंजीनियरिंग' लोगों को वोट देने के लिए राजी करना थी. उनके इस जवाब को बीएनपी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर 'सिक्सर' बताया है. हालांकि एनसीपी नेता आसिफ महमूद का दावा है कि उनके पास ढाका की कई सीटों पर नतीजों में गड़बड़ी के पुख्ता सबूत हैं. जमात प्रमुख शफीकुर रहमान का कहना है कि मतदान तो ठीक था लेकिन गिनती के दौरान धांधली कर नतीजे बदल दिए गए, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी.