बलूचिस्तान एक बार फिर भीषण हमलों और बढ़ते विद्रोह की आग में जल रहा है. बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन हेरोफ 2.0' ने पाकिस्तानी सेना के सुरक्षा तंत्र को झकझोर कर रख दिया है. एक साथ कई शहरों में हुए इन हमलों में चौकियों पर कब्जा किया गया और सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा. इस पूरे ऑपरेशन का सबसे खतरनाक चेहरा 'मजीद ब्रिगेड' बनकर उभरी है जो अपने आत्मघाती हमलों के लिए कुख्यात है. पाकिस्तानी आर्मी में इस ब्रिगेड का नाम सुनते ही खौफ पैदा हो जाता है क्योंकि इसके लड़ाके मौत से नहीं डरते और सीधे फिदाईन हमला करते हैं.
कौन है मजीद ब्रिगेड और कैसे हुई इस खूंखार यूनिट की शुरुआत?
मजीद ब्रिगेड को बीएलए की 'स्पेशल फोर्सेज यूनिट' माना जाता है जिसकी स्थापना 2011 में असलम अचू ने की थी. इस यूनिट का नाम दो भाइयों मजीद लंगोव सीनियर और मजीद लंगोव जूनियर की याद में रखा गया है जो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ते हुए मारे गए थे. पिछले एक दशक में पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील ठिकानों जैसे कराची स्टॉक एक्सचेंज और कराची एयरपोर्ट पर हुए बड़े हमलों के पीछे इसी ब्रिगेड का हाथ रहा है. यह यूनिट केवल हथियारों से नहीं बल्कि मानव बम बनकर हमला करने की अपनी रणनीति के कारण पाकिस्तानी सेना के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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महिला फिदाईन ने मचाई तबाही
इस बार के ऑपरेशन में मजीद ब्रिगेड ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए महिला फिदाईन हमलावरों को भी मैदान में उतारा है. हवा बलोच और असिफा मेंगल जैसी महिलाओं ने ग्वादर और नुश्की में आईएसआई (ISI) और सीटीडी के ठिकानों पर विस्फोटकों से भरी गाड़ियों से आत्मघाती हमले किए. बीएलए के मुताबिक इस ऑपरेशन में उनके 18 लड़ाके मारे गए जिनमें 11 अकेले मजीद ब्रिगेड के फिदाईन थे. इससे साफ पता चलता है कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ इस बड़ी जंग में मजीद ब्रिगेड ही विद्रोहियों की सबसे मुख्य ताकत और रीढ़ की हड्डी बनी हुई है.
अमेरिका ने घोषित किया आतंकी संगठन
मजीद ब्रिगेड की बढ़ती हिंसक गतिविधियों ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है. साल 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने बीएलए और मजीद ब्रिगेड दोनों को औपचारिक रूप से विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) घोषित कर दिया है. इस प्रतिबंध के बाद से इन संगठनों की फंडिंग और गतिविधियों पर दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी नजर रखना शुरू कर दिया है. अमेरिका की इस कार्रवाई से पाकिस्तान पर भी दबाव बढ़ा है कि वह अपने देश में पल रहे इन उग्रवादी समूहों पर लगाम लगाए लेकिन जमीन पर मजीद ब्रिगेड का कहर रुकने का नाम नहीं ले रहा है.