India Middle East Europe Economic Corridor: इजराइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने गुरुवार को ईरान पर इंडिया मिडल ईस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर को पटरी से उतारने का आरोप लगाया। इसहाक ने हमास द्वारा 7 अक्टूबर के हमलों को योजनाबद्ध करने का भी आरोप लगाया। हर्जोग ने आगे दावा किया कि ईरान क्षेत्रीय स्थिति को कमजोर करने के उद्देश्य से अरबों डॉलर देकर आतंकवादी मशीन का समर्थन कर रहा है। एएनआई को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने कहा, "हम पर उत्तर से हिजबुल्लाह द्वारा भी हमला किया गया है, जो एक बड़ा आतंकवादी संगठन है। जिसने लेबनान को ईरान के हाथों में दे दिया है। यहां बुराई का असली अंपायर तेहरान में शुरू होता है। वह पूरे क्षेत्र में इस्लामी कट्टरवाद फैलाता है।”

IMEC भारत को अधिक ताकत देने वाला एक दूरदर्शी कदम

इसहाक ने कहा- "सीरिया, लेबनान और गाजा पर कब्जा कर लिया गया है। अब यमन से इजराइल और ईराक पर हमला किया जा रहा है। हर किसी को पता होना चाहिए कि क्षेत्रीय स्थिति को कमजोर करने का ईरानी प्रयास कितना नापाक है।" इजराइल के राष्ट्रपति ने कहा कि भारत में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान घोषित भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) भारत को अधिक ताकत देने वाला एक दूरदर्शी कदम था। यह क्षेत्र के विकास में इजराइल के शामिल होने का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ईरान इस प्रयास और विशाल दृष्टिकोण को पटरी से उतारना चाहता था। भारत, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे।

भारत को बड़ी ताकत मिलेगी

उन्होंने कहा- "लगभग दो महीने पहले जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने खाड़ी और जॉर्डन में सऊदी अरब के लिए इजराइल से भारत तक ऊर्जा, संचार, व्यापार और विज्ञान के एक विशेष गलियारे की घोषणा की। यह हम सभी को एक साथ जोड़ेगा। यह यूरोप को दक्षिण पूर्व एशिया और यहां तक कि अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया तक जोड़ेगी। यह एक भव्य दृष्टि है जो भारत को बड़ी ताकत देगी।" यह पूछे जाने पर कि क्या इजराइल के पास 7 अक्टूबर के हमलों में ईरान की संलिप्तता का कोई सबूत है? हर्जोग ने कहा कि हालांकि उनके पास कुछ विशेष सबूत नहीं हैं, लेकिन उन्होंने बताया कि हमले से कुछ हफ्ते पहले आतंकवादी नेता बेरूत में मिले थे।

गलियारा लगभग 6 हजार किमी लंबा होगा

इतना ही नहीं, ईरान के विदेश मंत्री ने विशेष रूप से इजरायल, संयुक्त राज्य अमेरिका और सऊदी अरब के बीच एपोस्टील समझौते के खिलाफ धमकी दी। 7 अक्टूबर को 2000 से अधिक हमास आतंकवादियों ने इजराइली सीमाओं का उल्लंघन कर हमला किया, जिसमें 1400 से अधिक लोग मारे गए। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) कई देशों के बीच व्यापार का मार्ग है। इसका उद्देश्य मध्य पूर्व के देशों को रेलवे और उन्हें बंदरगाह के जरिए भारत से जोड़ना है। इस कॉरिडोर के जरिए भारत को यूरोप से जोड़ने की योजना बनाई गई है। कॉरिडोर में संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, सऊदी अरब और इजराइल शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, यह गलियारा लगभग 6 हजार किमी लंबा होगा। इसमें करीब 3,500 किलोमीटर का रास्ता समुद्री होगा।

होंगे कई फायदे

इस ऐतिहासिक कॉरिडोर के बनने से इंडिया को अपना सामान यूरोप तक पहुंचाने में करीब 40 फीसदी तक का कम समय लगेगा। इसमें रेलवे, समुद्री और सड़क परिवहन मार्ग शामिल रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने ईरान में चाबहार बंदरगाह में अरबों डॉलर का निवेश किया है, लेकिन कई बार ऐसी खबरें भी सामने आई हैं जिसमें चीन इसका फायदा उठाता नजर आ रहा है। आईएमईसी की चीन और ईरान के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा है। कहा ये जा रहा है कि ईरान ने इजराइल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को रोकने के लिए हमास को हमला करने का आदेश दिया था।