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सुनामी का क्या होता है मतलब, कहां से आया ये नाम? क्यों बार-बार कांप रही धरती

Russia Earthquake Today: भूकंप को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है, दरअसल, रिक्टर स्केल भूकंप की तरंगों की तीव्रता मापने का एक गणितीय पैमाना होता है। आज रूस के कामचटका में भूकंप आया है, जिसके बाद तीन देशों में सुनामी का अलर्ट जारी किया गया है। आइए आपको बताते हैं कि जापानी शब्द ‘सुनामी’ का क्या अर्थ होता है?

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रूस में आई सुनामी का प्रतीकात्मक फोटो

What does tsunami mean: रूस का कामचटका आज भूकंप के झटकों से थर्रा गया। यहां रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 8.8 मापी गई। ये पहली बार नहीं है जब सुनामी आई हो, मानव इतिहास में इससे पहले भी कई विनाशकारी सुनामियां आ चुकी हैं। क्या कभी आपने सोचा है कि ‘सुनामी’ का अर्थ क्या होता है, ये नाम कहां से आया और ये क्यों रखा गया?

दरअसल, सुनामी शब्द जापानी भाषा से लिया गया है। इसे जापान के दो शब्द ‘tsu’, जिसका मतलब होता है बंदरगाह और ‘nami’ जिसका अर्थ होता है लहर को जोड़कर बनाया गया है। जहां तक अर्थ की मानें तो जापानी भाषा के जानकर बताते हैं कि इसका अर्थ होता है बंदरगाह की लहर। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि सुनामी लहरें समुद्र में भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट या भूस्खलन जैसी घटनाओं से उत्पन्न होती हैं।

800 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं, 100 फीट ऊंचाई तक लहरें बनती हैं भीषण तबाही का कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सुनामी या tidal wave समुद्र तल में भूकंपीय हलचल से आती है। साइंटिफिक भाषा में बताएं तो जब समुद्र के तल में टेक्टोनिक प्लेट खिसकती हैं तो भूकंपीय सागरीय लहर, भूस्खलन या उल्कापात से सुनामी आती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 7.0 रिक्टर स्केल से अधिक वाले भूकंप में ऊंची लहरें होने का खतरा अधिक होता है जो सुनामी का कारण बनता है। इस दौरान सम्रुद्र में करीब 800 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलती हैं, जो भीषण तबाही ला सकती हैं। वहीं, इस दौरान समुद्र की लहरें करीब 100 फीट ऊंचाई तक जा सकती हैं।

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प्रशांत महासागर में सबसे ज्यादा सुनामी आती हैं

अब तक दुनिया में कितनी सुनामी आई हैं इसका सटीक आंकड़ा तो नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में ज्यादा सुनामी आती हैं। प्रशांत महासागर में इनका खतरा सबसे अधिक रहता है। अभी तक 12 से अधिक सुनामी आ चुकी हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सुनामी के बारे में समय से पता लग जाए इसके लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन इस बारे में पुख्ता भविष्यवाणी करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। साल 2000 में डीप ओशियन असेसमेंट एंड रिपोर्टिंग ऑफ सुनामी (DART) सिस्टम शुरू किया गया था। ये सिस्टम समुद्र तल पर दबाव रिकॉर्डर और सतह पर तैरती डिवाइस के माध्यम से सुनामी का पता लगाता है।

ये भी पढ़ें: 2011 की तरह फिर से जापान में आएगी सुनामी? चेतावनी के बाद फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को किया जा रहा खाली

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लेखक के बारे में

Amit Kasana

अमित कसाना: पत्रकारिता की दुनिया में एक सिद्धहस्त कहानीकार अमित कसाना सिर्फ खबरें नहीं लिखते बल्कि उन्हें बारीकी से संवारते हैं ताकि पाठकों तक सटीक, ताजा और प्रभावी जानकारी पहुंचे. News 24 में न्यूज एडिटर के रूप में उनकी भूमिका समाचारों को प्रस्तुत करने से कहीं अधिक है, वह उन्हें संदर्भ और दृष्टिकोण के साथ गढ़ते हैं. 2008 में 'दैनिक जागरण' से अपनी यात्रा शुरू करने वाले अमित ने 'दैनिक भास्कर' और 'हिंदुस्तान' जैसे प्रतिष्ठित प्रकाशनों में भी अपनी पहचान बनाई. 17 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने पत्रकारिता के हर पहलू को बारीकी से समझा, चाहे वह प्रिंट, टेलीविजन या डिजिटल मीडिया हो. राजनीति, अपराध, खेल, मनोरंजन, कानून, ऑटोमोबाइल, लाइफस्टाइल और अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़े विषयों की रिपोर्टिंग में उनकी गहरी पकड़ है. ब्रेकिंग न्यूज की रोमांचक दुनिया, खोजी पत्रकारिता की गहराई और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग का संयोजन अमित की कार्यशैली की पहचान है. News 24 में उनका लक्ष्य स्पष्ट है समाचारों को त्वरितता और सटीकता के साथ प्रस्तुत करना ताकि पाठकों को भरोसेमंद और सार्थक जानकारी मिल सके.
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