अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ की कानूनी वैधता पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का फैसला कल शुक्रवार को आने वाला है. यह फैसला सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. जिन देशों पर टैरिफ लगाया गया है, वे लंबे समय से इसे अनुचित और कानून के दायरे से बाहर बता रहे हैं. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक बाजारों की दिशा तय कर सकता है. भारत में भी इस फैसले को लेकर सरकार से लेकर बाजार तक सतर्क नजर आ रहे हैं.
ट्रंप प्रशासन ने किस कानून के तहत लगाया टैरिफ?
ट्रंप प्रशासन ने साल 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट यानी IEEPA का इस्तेमाल करते हुए चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत जैसे देशों से आने वाले सामान पर 10 से 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था. ट्रंप सरकार का तर्क था कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी है. हालांकि निचली अदालतों ने इस फैसले को राष्ट्रपति की शक्तियों से बाहर बताया और कहा कि इस तरह टैरिफ लगाना कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसके बाद मामला सीधे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया, जहां अब अंतिम फैसला होना है.
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फैसला पलटा तो अमेरिका पर भारी आर्थिक बोझ
अगर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ प्रावधानों को रद्द कर देता है, तो इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा. अनुमान है कि ऐसी स्थिति में अमेरिका को अलग अलग देशों को करीब 140 अरब डॉलर का रिफंड करना पड़ सकता है. हालांकि ट्रंप की टीम पहले से ही वैकल्पिक रास्तों की तैयारी कर रही है. सूत्रों के मुताबिक अगर फैसला खिलाफ आता है तो ट्रंप समर्थक खेमे अन्य कानूनों और प्रावधानों के जरिए टैरिफ को किसी न किसी रूप में लागू रखने की कोशिश करेंगे. इससे यह साफ है कि विवाद खत्म होने के बजाय और गहरा सकता है.
भारत पर असर और बाजारों की चिंता
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी खास है क्योंकि टैरिफ के चलते भारतीय निर्यात और बाजारों पर सीधा असर पड़ा है. हाल ही में टैरिफ को बढ़ाकर 500 प्रतिशत तक करने से जुड़े अमेरिकी संसद के संभावित कानून की खबरों के बाद गुरुवार को भारतीय बाजार बुरी तरह टूट गए. निवेशकों में डर का माहौल देखा गया और कई सेक्टरों में भारी गिरावट आई. यही वजह है कि भारत की नजर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर टिकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत अमेरिका व्यापार संबंधों की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.