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युद्ध के लिए कितना तैयार है अमेरिका, ट्रंप ने ईरान के करीब क्या-क्या तैनात करवाया?

Iran- America Tension: ईरान के नजदीक अमेरिका ने बड़ा सैन्य जमावड़ा कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़ा आर्माडा बताते हुए कई युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर और लड़ाकू विमानों की तैनाती की है. इस कदम से मिडिल ईस्ट में तनाव और गहरा गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर दबाव बनाकर उसे बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है.

Credit: Social Media

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव थमने का नाम नहीं ले रहा. अमेरिका अपनी ताकत दिखाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा. ट्रंप सरकार ईरान को ये दिखाना चाहती है कि वो उसे चुटकी बजाते ही मसल सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नजदीक अपनी सबसे बड़ी सैन्य ताकत भेजी है, जिसे उन्होंने खुद बड़ा आर्माडा कहा है. इस सैन्य मुहिम का मकसद तेहरान पर दबाव बनाना और उसे बातचीत के लिए मजबूर करना बताया जा रहा है. ट्रंप के इस कदम के बाद पूरी दुनिया की नजर मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई है.

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अमेरिका ने USS अब्राहम लिंकन किया तैनात

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने कई बड़े युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर, लड़ाकू विमान और ड्रोन तैनात किये हैं. इसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी शामिल है, जो अपने साथ कई युद्धपोतों और फाइटर जैट्स के साथ ईरान के पास पहुंच चुका है. ये शक्तिशाली ग्रुप फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और मिसाइलों से लैस है. USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का सबसे पावरफुल हथियार है. ये न्यूक्लियर पावर वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है. इसके साथ कई घातक जहाज हैं. इस पर कैरियर एयर विंग 9 तैनात हैं, जिसमें छिपकर हमला करने वाले F-35C स्टील्थ फाइटर जेट, मल्टी-रोल फाइटर F/A-18E/F सुपर होर्नेट, EA-18G ग्रोलर, निगरानी और कमांड के लिए E-2D हॉकआई, MH-60 हेलीकॉप्टर शामिल हैं. इसमें टोमाहॉक क्रूज मिसाइल वाले घातक युद्धपोत के साथ करीब 5700 अमेरिकी सैनिक और दर्जनों फाइटर जेट हैं.

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ईरान को अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने पहले ही पारस की खाड़ी और उसके आसपास कई घातक जहाज, सप्लाई और रिफ्यूलिंग जहाज तैनात कर रखे हैं. अमेरिका के कुल 6-10 युद्धपोत इलाके में हैं, जो मिसाइल और टोमाहॉक से लैस है. F-15E स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट अब मिडिल ईस्ट में तैनात हैं. ये डीप अटैक के लिए जानी जाती है. अमेरिकी कार्गो प्लेन हथियार मिडिल ईस्ट तक पहुंचा रहे हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि ये कदम इलाके में सुरक्षा बनाए रखने और किसी भी खतरे से निपटने के लिए उठाया गया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अमेरिका किसी भी हाल में अपने नागरिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा. उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई हुई तो अमेरिका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. हालांकि ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्ध नहीं चाहता, लेकिन मजबूरी में कड़ा कदम उठाया जा सकता है.

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ईरान ने अमेरिका पर लगाया आरोप

ईरान ने अमेरिका की इस सैन्य तैनाती को उकसाने वाली कार्रवाई बताया है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है. ईरान ने भी अपनी सेना को अलर्ट पर रखा है और तटीय इलाकों में सैन्य अभ्यास तेज कर दिए हैं. ईरान का दावा है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह पूरी ताकत से जवाब देगा. सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ये कदम सिर्फ ताकत दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि ईरान पर मानसिक और राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर बातचीत करे.


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