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8000 सैनिक, 70 एयरक्राफ्ट, पनडुब्बी-मिसाइलें… कितना शक्तिशाली है USS अब्राहम लिंकन? जंग छिड़ी तो ईरान का क्या होगा

USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group: अमेरिका ने अपने जिस एयरक्राफ्ट कैरियर को मिडिल ईस्ट की ओर रवाना किया है, वह अमेरिका का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली हथियार है, जो अकेला ही ईरान में तबाही मचाने में सक्षम है. इससे निपटना ईरान तो क्या किसी भी देश के बस की बात नहीं है.

USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group

USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group: ईरान में बेहद तनावपूर्ण हालात हैं. अली खामेनेई की सत्ता के खिलाफ लोग सड़कों पर हैं और 28 दिसंबर से हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं. ईरान की सरकार प्रदर्शनकारियों का दमन कर रही है, जिसका अमेरिका ने विरोध जताया है और ईरान पर हमला करने की धमकी दी है. ईरान के हालातों और बढ़ता संकट देखकर अमेरिका ने अपने USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को साउथ चाइना से मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है, जिसके चलते ईरान और अमेरिका में टकराव के आसार बढ़ गए हैं.

अपने आप में एक पूरी सेना है अब्राहम लिंकन

अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अपने आप में एक चक्रव्यूह है, जो दुश्मन के खेमे में घुसकर उसे पूरी तरह तबाह करने की क्षमता रखता है. यह ग्रुप अपने आप में एक सेना है, जिसे अब्राहम लिंकन कंपनी ने बनाया है और इसका मुख्य हथियार एयरक्राफ्ट कैरियर है. अमेरिकी नौसेना का यह युद्धपोत कैरियर स्ट्राइक ग्रुप-3 का हिस्सा है, जिसके साथ डेस्ट्रॉयर स्कवाड्रन 21 के जहाज चलते हैं. पूरे ग्रप में एक सुपर कैरियर, 3 से 6 डिस्ट्रॉयर्स औरी क्रूजर, 2 पनडुब्बियां, 7000 से 8000 सैनिक, 65 से 70 F-35, F/A-18 कैटेगरी के एयरक्राफ्ट. हजारों टोमाहॉक मिसाइलें और दूसरे हथियार, जो ईरान के एयरबेस, नेवी बेस, ऑयल प्लांट और न्यूक्लियर साइट्स पर हमला कर सकता है.

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सुपर कैरियर के साथ चलते ये जहाज-हथियार

अब्राहम लिंकन एयरस्ट्राइक करियर ग्रुप में एयरक्राफ्ट कैरियर, जो न्यूक्लियर पावर्ड है और इसका वजह एक लाख टन से ज्यादा है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक बनाता है. गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स जैसे USS माइकल मर्फी, USS स्प्रुऐंस, USS फ्रैंक ई पीटरसर, जो एयर डिफेंस, एंटी-सबमरीन और लैंड अटैक के लिए हैं. ग्रुप में कभी-कभी एक क्रूजर भी होता है. न्यूक्लियर अटैक के लिए वर्जिनिया और लॉस एंजेल्स क्लास की 2 सबमरीन होती हैं, जो दुश्मन के जहाजों और सबमरीन को ट्रैक करने के साथ-साथ टोमाहॉक मिसाइलें भी दाग सकती हैं. सपोर्ट के लिए एम्युनिशन, ऑयलर और सप्लाई शिप भी साथ चलते हैं.

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इन एयरक्राफ्ट-मिसाइलों से लैस है कैरियर

अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप में 7 से 8 हजार सैनिक तैनात होते हैं, जिसमें से अकेले कैरियर पर 5000-6000 क्रू मेंबर्स होते हैं. 65 से 70 एयरक्राफ्ट, जिसमें F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट (मल्टी-रोल फाइटर), F-35C लाइटनिंग-II (स्टील्थ फाइटर, VMFA-314 स्क्वाड्रन), E-2D हॉकेय, MH-60R/S सीहॉक हेलीकॉप्टर, एंटी-सबमरीन और सर्च-एंड-रेस्क्यू, EA-18G ग्रॉलर (इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर) जो दिन और रात दोनों समय में उड़ान भर सकते हैं. हवाई हमले करने के साथ-साथ जासूसी और डिफेंस करते हैं.

इनके अलावा पूरा ग्रुप टोमाहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस है और पूरा ग्रुप करीब 1000 टोमाहॉक मिसाइलें दाग सकता है. एयर-टू-एयर या एयर-टू-ग्राउंड अटैक मिसाइल AIM-120 AMRAAM, AGM-88 HARM, JDAM, JSOW आदि. डिफेंसिव मिसाइलें जैसे सी-सपैरो, ESSM, RAM, Phalanx CIWS, SM-6 (बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस) और न्यूक्लियर कैपेबिलिटी यानी एयरक्राफ्ट कैरियर न्यूक्लियर पावर्ड है, लेकिन इस पर अभी न्यूक्लियर हथियार नहीं हैं. अगर ऐसा हो जाए तो यह पूरे देश को खत्म करके रख दे.

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अब्राहम लिंकन का हमला हुआ तो क्या होगा?

अगर USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर ने ईरान पर हमला किया तो हवाई हमले हो सकते हैं और 70 से ज्यादा विमान हर रोज 100 से 150 सॉर्टी कर सकते हैं. ईरान के एयरबेस, मिसाइल साइट्स, नेवल बेस, ऑयल प्लांट और कमांड सेंटर पर हमला हो सकता है. क्रूज मिसाइल अटैक के जरिए टोमाहॉक मिसाइल दागकर मिलिट्री, नेवी, एयर डिफेंस और न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक हो सकता है.

ईरान की नौसेना तबाह हो सकती है. होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका का कंट्रोल हो सकता है. ईरान की एयरफोर्स ग्राउंड पर आने को मजबूर हो सकती है. ऑयल साइट्स पर हमला हुआ तो ईरान अर्थव्यवस्था को भारी झटका लग सकता है. अभी सिर्फ ईरान की मिलिट्री को नुकसान हो सकता है, लेकिन जंग छिड़ने पर देश तबाह हो सकता है.


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